(AI IMAGE)
EPFO Big News: EPFO ने नौकरीपेशा कर्मचारियों के लिए अनिवार्य पेंशन कवरेज की वेतन सीमा 15,000 रुपये से बढ़ाकर 25,000 रुपये कर दी है, जिससे लाखों कर्मचारियों को फायदा मिलेगा.
कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ने एम्प्लॉइज पेंशन स्कीम (EPS) के तहत mandatory coverage की लिमिट को 15,000 रुपये से बढ़ाकर 25,000 रुपये प्रति माह कर दिया है. श्रम मंत्रालय के इस फैसले से 51 लाख से ज्यादा नए कर्मचारियों को सोशल सिक्योरिटी का फायदा मिलेगा. हालांकि, जिन कर्मचारियों का वेतन 25,000 रुपये से ज्यादा है और वे पहले कभी EPS सदस्य नहीं रहे, वे इसके लिए पात्र नहीं होंगे. EPS पात्रता में कर्मचारी की पिछली सदस्यता का रिकॉर्ड सबसे अहम भूमिका निभाएगा.
EPFO ने जारी की नई शर्तें: पेंशन कवरेज के नियमों में बड़ा बदलाव
अगर आप नौकरीपेशा हैं और कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) की पेंशन योजना का लाभ उठाना चाहते हैं, तो आपके लिए वेतन सीमा और सदस्यता के नए नियमों को समझना बेहद जरूरी है. EPFO ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (X) पर एक पोस्ट शेयर करके एम्प्लॉइज पेंशन स्कीम (EPS) की सदस्यता, वेतन सीमा और पात्रता की शर्तों को लेकर स्थिति साफ की है.
17 सितंबर से लागू हुआ नया नियम: 25,000 रुपये हुई वेतन सीमा
EPFO द्वारा दी गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार, अनिवार्य कवरेज की मासिक वेतन सीमा को 15,000 रुपये से बढ़ाकर 25,000 रुपये कर दिया गया है. श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के मुताबिक, इस ऐतिहासिक बदलाव के चलते देश के करीब 51 लाख से अधिक कर्मचारियों को सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाने की उम्मीद है. हालांकि, केवल वेतन ही नहीं, बल्कि कर्मचारी का पिछला रिकॉर्ड भी यह तय करेगा कि उसे पेंशन मिलेगी या नहीं.
किसे मिलेगी EPS पेंशन योजना की सदस्यता और किसे नहीं?
नियमों के अनुसार, यदि आपका मासिक वेतन 25,000 रुपये या उससे कम है, तो पात्रता शर्तों के तहत आपके लिए EPS की सदस्यता अनिवार्य हो सकती है. लेकिन, यदि आपका मूल वेतन 25,000 रुपये से अधिक है और आप पहले कभी भी EPS के सदस्य नहीं रहे हैं, तो आप इस योजना की नई सदस्यता के पात्र नहीं होंगे. यानी केवल मौजूदा वेतन के आधार पर फैसला नहीं होगा, बल्कि कर्मचारी का पुराना PF रिकॉर्ड भी देखा जाएगा.
EPF और EPS में क्या होता है अंतर?
कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) और एम्प्लॉइज पेंशन स्कीम (EPS) दोनों ही कर्मचारी की सामाजिक सुरक्षा से जुड़े हैं, लेकिन दोनों के काम करने का तरीका अलग है:
- EPF (भविष्य निधि): इसमें रिटायरमेंट के लिए फंड जमा होता है, जिसे जरूरत पड़ने पर नियमों के तहत निकाला जा सकता है.
- EPS (पेंशन योजना): इसके तहत निर्धारित शर्तें पूरी करने वाले पात्र कर्मचारियों को रिटायरमेंट के बाद हर महीने पेंशन दी जाती है.
नियोक्ता का योगदान कैसे बंटता है?
सामान्य व्यवस्था के तहत, नियोक्ता (कंपनी) कर्मचारी के वेतन का 12% हिस्सा EPF खाते में योगदान करता है. इस योगदान में से 8.33% हिस्सा एम्प्लॉइज पेंशन स्कीम (EPS) में जाता है, जबकि बाकी बचा हुआ हिस्सा कर्मचारी के EPF फंड में जमा होता है.
यह भी पढ़ें-खरीदारों की बल्ले-बल्ले! सोना-चांदी की कीमतों में आई भारी गिरावट, चेक करें आज के भाव
-भारत एक्सप्रेस
इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

