केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के उस बयान को लेकर बिहार और झारखंड में सियासी बयानबाजी तेज हो गई है, जिसमें उन्होंने कहा था कि गुजरात में बैलेट पेपर से चुनाव होने के बावजूद कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा. शाह के इस बयान के बाद एनडीए के कई नेताओं ने कांग्रेस और राहुल गांधी पर निशाना साधा. उनका कहना है कि चुनाव में हार-जीत का फैसला वोटिंग मशीन या बैलेट पेपर से नहीं, बल्कि जनता के बीच किए गए काम और लोगों के भरोसे से होता है.
एनडीए नेताओं ने कांग्रेस को सलाह दी कि वह चुनावी नतीजों पर सवाल उठाने के बजाय अपनी राजनीतिक रणनीति और जनता से जुड़ाव पर ध्यान दे. हालांकि, इन बयानों के बीच कांग्रेस की ओर से उठाए जाने वाले चुनावी प्रक्रिया से जुड़े सवाल भी राजनीतिक बहस का हिस्सा बने हुए हैं.
भाजपा से सीखें राहुल गांधी- राम कृपाल यादव
पटना में बिहार सरकार के मंत्री राम कृपाल यादव ने अमित शाह के बयान का समर्थन किया. उन्होंने कहा कि राहुल गांधी को भाजपा के काम करने के तरीके से सीख लेनी चाहिए. उनके मुताबिक, भाजपा अलग-अलग राज्यों में स्थानीय निकाय चुनावों से लेकर उपचुनावों तक अपनी मौजूदगी दर्ज करा रही है.
राम कृपाल यादव ने राहुल गांधी और कांग्रेस के दूसरे नेताओं पर तंज कसते हुए कहा कि उन्हें पहले अपनी पार्टी की स्थिति की चिंता करनी चाहिए. उन्होंने सवाल उठाया कि कांग्रेस के नेता 2029 के चुनाव तक अपनी राजनीतिक जमीन कितनी मजबूत कर पाएंगे.
यादव ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र और राज्यों में किए गए कामों पर जनता ने भरोसा जताया है. उन्होंने उम्मीद जताई कि 2029 में भी मोदी सरकार सत्ता में वापसी करेगी.
बैलेट पेपर से चुनाव हो या EVM से, कांग्रेस पर निशाना
भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता गुरु प्रकाश ने भी कांग्रेस की चुनावी हार को लेकर कटाक्ष किया. पटना में उन्होंने कहा कि चुनाव कराने का तरीका बदलने से नतीजे नहीं बदलते, अगर किसी पार्टी को जनता का समर्थन नहीं मिल रहा हो.
उन्होंने कहा कि बैलेट पेपर से चुनाव होने पर भी कांग्रेस हारती है और EVM से मतदान होने पर भी उसे हार का सामना करना पड़ता है. मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के कार्यकाल का जिक्र करते हुए भी उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधा.
गुरु प्रकाश ने दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ, पंजाब विश्वविद्यालय छात्र संघ और असम के सिलचर में हुए चुनावों का उदाहरण दिया. उनके मुताबिक, इन जगहों पर बैलेट पेपर से चुनाव होने के बावजूद कांग्रेस को सफलता नहीं मिली.
भाजपा प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि कांग्रेस की समस्या चुनावी प्रक्रिया नहीं, बल्कि कुछ परिवारों की राजनीति और सत्ता पर अपना दबदबा बनाए रखने की सोच है. हालांकि, ये टिप्पणियां भाजपा नेता के राजनीतिक आरोप हैं.
जेडीयू ने भी कामकाज को बताया जीत का आधार
जेडीयू प्रवक्ता राजीव रंजन ने भी अमित शाह के बयान का समर्थन करते हुए कहा कि मतदाताओं का समर्थन किसी पार्टी को उसके काम के आधार पर मिलता है. उनके अनुसार, चुनाव EVM से हो या बैलेट पेपर से, जनता उन नेताओं और दलों को पसंद करती है जो उनके बीच सक्रिय रहते हैं और उनकी समस्याओं के समाधान के लिए काम करते हैं.
राजीव रंजन ने गुजरात के निकाय चुनावों के नतीजों का हवाला देते हुए कहा कि चुनाव जीतने के लिए जनता के बीच अपनी उपलब्धियों को साबित करना जरूरी है. उन्होंने जोर दिया कि जब किसी सरकार के काम से लोगों की जिंदगी में बदलाव आता है, तो उसका असर मतदान में भी दिखाई दे सकता है.
झारखंड में राहुल गांधी और SIR पर भी घमासान
झारखंड की राजधानी रांची में भाजपा के मुख्य प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने अमित शाह के बयान को महत्वपूर्ण बताते हुए कांग्रेस पर हमला बोला. उन्होंने राहुल गांधी के SIR यानी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के विरोध पर सवाल उठाए.
प्रतुल शाहदेव ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी इस प्रक्रिया का विरोध करके बांग्लादेशी और रोहिंग्या घुसपैठियों को बचाने की कोशिश कर रहे हैं. उन्होंने झारखंड की हेमंत सोरेन सरकार पर भी निशाना साधा और दावा किया कि राज्य की सरकार को कांग्रेस का समर्थन हासिल है.
भाजपा प्रवक्ता ने यह भी आरोप लगाया कि झारखंड की मतदाता सूची में तीन अफगानी नागरिकों के नाम शामिल थे. उन्होंने सवाल किया कि अगर मतदाता सूची से विदेशी नागरिकों के नाम हटाने की प्रक्रिया चलाई जा रही है, तो कांग्रेस को इस पर आपत्ति क्यों है.
शाहदेव के मुताबिक, कांग्रेस ने घुसपैठियों को अपना वोट बैंक बना लिया है. हालांकि, मतदाता सूची में विदेशी नागरिकों के नाम होने और उन्हें लेकर लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि इस खबर में उपलब्ध जानकारी के आधार पर नहीं की जा सकती.
चुनावी नतीजों के बहाने बढ़ी सियासी तकरार
अमित शाह के बयान के बाद बिहार और झारखंड के एनडीए नेताओं ने कांग्रेस की चुनावी रणनीति, राहुल गांधी के नेतृत्व और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों पर सवाल उठाए हैं. एनडीए नेताओं का मुख्य तर्क है कि चुनावी जीत का आधार जनता का समर्थन और सरकार का कामकाज होना चाहिए, न कि मतदान के लिए इस्तेमाल किया गया माध्यम.
दूसरी ओर, चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची को लेकर राजनीतिक दलों के बीच जारी बहस यह दिखाती है कि आने वाले समय में भी ये मुद्दे सियासत के केंद्र में रह सकते हैं. अब देखना होगा कि कांग्रेस इन आरोपों पर क्या प्रतिक्रिया देती है और चुनावी सुधारों से जुड़ी बहस आगे किस दिशा में बढ़ती है.
-भारत एक्सप्रेस
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