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अमेरिका के फैसले से भारत को मिल सकती है राहत, रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर भारी टैरिफ लगाने की योजना फिलहाल टली

रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 100 फीसदी तक टैरिफ लगाने की योजना पर डोनाल्ड ट्रंप ने फिलहाल रोक लगा दी है. भारत भी इस कानून के दायरे में आ सकता था. ऐसे में सवाल है कि क्या ट्रंप के इस फैसले से भारत को अमेरिकी टैरिफ के मोर्चे पर राहत मिलेगी?

US Tariff

रूस पर ट्रंप की नरमी से भारत को राहत?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक नए फैसले से भारत को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद जगी है. रूस से कच्चा तेल खरीदने वाले देशों पर 100 फीसदी तक टैरिफ लगाने की तैयारी कर रहे अमेरिका ने फिलहाल अपने कदम पीछे खींच लिए हैं. ट्रंप ने रूस और ईरान से जुड़े प्रतिबंधों के लिए लाए गए नए कानून के कई अहम प्रावधानों पर रोक लगा दी है. इस कानून की जद में भारत और चीन जैसे देश भी आ सकते थे, जो रूस से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल खरीदते हैं.

रूस पर टैरिफ लगाने के कानून पर ट्रंप की रोक

ट्रंप ने 16 अक्टूबर को एक कार्यकारी आदेश जारी कर यह फैसला लिया. इसके तहत उन्होंने ‘लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट, 2026’ के कुछ प्रावधानों को फिलहाल लागू नहीं करने का निर्णय किया है. यह कानून 18 सितंबर को बनाया गया था. इसके तहत रूस से तेल और गैस खरीदने वाले बड़े देशों के अमेरिकी बाजार में आने वाले सामान पर 100 फीसदी तक टैरिफ लगाने का प्रावधान था. वहीं, रूस से अमेरिका आने वाले सामान पर शुल्क 500 फीसदी तक बढ़ाने का भी रास्ता खुला था. फिलहाल ट्रंप ने इन शुल्कों को लागू करने से छूट दे दी है. हालांकि, अमेरिका भविष्य में इन उपायों को फिर से लागू कर सकता है.

भारत को कैसे मिल सकता है फायदा?

भारत लंबे समय से अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए रूस से कच्चा तेल खरीदता रहा है. रूस से मिलने वाला तेल भारतीय रिफाइनरियों के लिए अहम रहा है. ऐसे में अमेरिका की ओर से 100 फीसदी तक अतिरिक्त टैरिफ लगाने का खतरा भारत के लिए चिंता का विषय था.

इस तरह के टैरिफ का सीधा असर भारत से अमेरिका भेजे जाने वाले सामान पर पड़ सकता था. इससे भारतीय निर्यातकों की लागत बढ़ती और अमेरिकी बाजार में उनके उत्पाद महंगे हो सकते थे. कपड़ा, इंजीनियरिंग सामान और दूसरे निर्यात क्षेत्रों के कारोबारियों को भी मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता था.

अब नए कानून के तहत प्रस्तावित टैरिफ पर रोक लगने से भारत को तत्काल राहत मिलने की संभावना है. हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि भारत-अमेरिका व्यापार से जुड़े सभी शुल्क खत्म हो गए हैं या रूस से तेल खरीदने पर भविष्य में कोई कार्रवाई नहीं होगी. अमेरिका ने अपने पास आगे कदम उठाने का विकल्प रखा है.

भारत पर पहले कितना टैरिफ लगा था?

इस मामले में एक जरूरी अंतर समझना होगा. अगस्त 2025 में ट्रंप प्रशासन ने भारत के रूसी तेल आयात को आधार बनाकर भारतीय सामान पर 25 फीसदी अतिरिक्त टैरिफ लगाया था. हालांकि, फरवरी 2026 में अमेरिका ने इस अतिरिक्त शुल्क को हटाने का फैसला किया. इसके साथ ही भारत के लिए पारस्परिक टैरिफ की दर 25 फीसदी से घटाकर 18 फीसदी करने का ऐलान भी किया गया था.

अब ग्राहम एक्ट के तहत 100 फीसदी तक टैरिफ लगाने का प्रावधान एक अलग मामला था. यह नया कानून रूस से तेल और गैस खरीदने वाले बड़े देशों पर दबाव बनाने के लिए लाया गया था. ट्रंप के ताजा आदेश ने इसी कानून के तहत प्रस्तावित शुल्कों को फिलहाल रोक दिया है. इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि भारत पर पहले से लागू 100 फीसदी टैरिफ हटा लिया गया है. दरअसल, यह टैरिफ लगाने की संभावित कार्रवाई थी, जिसे अब टाल दिया गया है.

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रूस से डीजल खरीदने के फैसले ने बदला रुख?

ट्रंप का यह फैसला ऐसे समय आया है, जब अमेरिका में डीजल की कीमतें बढ़ रही हैं और नवंबर में होने वाले मध्यावधि चुनाव नजदीक हैं. ट्रंप ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ डीजल आपूर्ति को लेकर हुए समझौते को बड़ी उपलब्धि बताया है.

ट्रंप के मुताबिक, रूस अमेरिका को तुरंत 3 लाख टन से ज्यादा डीजल उपलब्ध कराएगा. इसके बाद नवंबर में 5 लाख टन और फिर 10 लाख टन डीजल की आपूर्ति की जाएगी. उन्होंने आगे भी बड़ी मात्रा में डीजल मिलने की बात कही है. हालांकि, इस आपूर्ति का वास्तविक असर अमेरिकी बाजार में कीमतों पर कितना पड़ेगा, यह आने वाले समय में साफ होगा.

यह घटनाक्रम इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि अमेरिका एक ओर रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहा था, वहीं अब खुद रूस से डीजल की आपूर्ति लेने की दिशा में आगे बढ़ रहा है. इससे उसकी ऊर्जा नीति को लेकर सवाल भी उठ रहे हैं.

आगे भारत के लिए क्या मायने हैं?

ट्रंप के ताजा फैसले से भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक तनाव बढ़ने का तत्काल खतरा कुछ कम हो सकता है. खासकर भारतीय निर्यातकों के लिए यह राहत की खबर है, क्योंकि रूस से तेल खरीदने के मुद्दे पर अमेरिका की ओर से और सख्त कदम उठाए जाने की आशंका थी.

फिर भी भारत को आगे की स्थिति पर नजर रखनी होगी. ट्रंप प्रशासन ने फिलहाल नए कानून के तहत टैरिफ और कुछ प्रतिबंधों को लागू करने से छूट दी है, लेकिन जरूरत पड़ने पर दोबारा कार्रवाई करने का विकल्प खुला रखा है.

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-भारत एक्सप्रेस



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