भारत और पोलैंड ने आतंकवाद के खिलाफ मिलकर लड़ाई तेज करने का संकल्प लिया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क ने गुरुवार को नई दिल्ली के हैदराबाद हाउस में हुई द्विपक्षीय वार्ता के दौरान आतंकवाद और हिंसक उग्रवाद की कड़े शब्दों में निंदा की. दोनों नेताओं ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से आतंकवादियों को मिलने वाली आर्थिक मदद रोकने, उनके सुरक्षित ठिकानों को खत्म करने और आतंकी संगठनों के नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त करने की अपील की.
इस बैठक में दोनों देशों के बीच सुरक्षा सहयोग के साथ-साथ संयुक्त राष्ट्र में सुधार, हिंद-प्रशांत क्षेत्र की स्थिरता और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर आपसी सहयोग जैसे अहम मुद्दों पर भी चर्चा हुई.
पहलगाम आतंकी हमले की दोनों नेताओं ने की निंदा
प्रधानमंत्री मोदी और डोनाल्ड टस्क ने 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले की कड़ी निंदा की. दोनों नेताओं ने स्पष्ट किया कि आतंकवाद को किसी भी परिस्थिति में सही नहीं ठहराया जा सकता. इससे निपटने के लिए दुनिया के सभी देशों को एकजुट होकर काम करना होगा.
बैठक के बाद जारी संयुक्त बयान में आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक सहयोग को मजबूत बनाने पर जोर दिया गया. दोनों देशों ने माना कि केवल आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन व्यवस्थाओं को भी खत्म करना जरूरी है, जिनकी मदद से आतंकी संगठन अपना नेटवर्क चलाते हैं.
इसमें आतंकवाद के लिए जुटाए जाने वाले पैसे, आतंकियों को शरण देने वाले ठिकानों और उनके संगठनात्मक ढांचे को निशाना बनाने की जरूरत पर भी जोर दिया गया.
संयुक्त राष्ट्र की प्रतिबंध सूची में शामिल आतंकियों पर कार्रवाई की मांग
भारत और पोलैंड ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की 1267 प्रतिबंध समिति द्वारा सूचीबद्ध आतंकियों और आतंकी संगठनों के खिलाफ ठोस और समन्वित कार्रवाई की अपील की. दोनों नेताओं ने कहा कि आतंकवाद से मुकाबला करने के लिए देशों के बीच बेहतर तालमेल जरूरी है, ताकि आतंकी संगठनों को किसी भी तरह की सुरक्षित जगह या आर्थिक सहायता न मिल सके.
इसके साथ ही दोनों प्रधानमंत्रियों ने संयुक्त राष्ट्र में अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद पर व्यापक सम्मेलन (सीसीआईटी) को जल्द से जल्द अपनाने की मांग दोहराई. इस सम्मेलन का उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आतंकवाद से निपटने के लिए एक व्यापक कानूनी ढांचा तैयार करना है.
दोनों पक्ष आतंकवाद से जुड़े मुद्दों पर आगे भी बातचीत जारी रखने और आपसी सहयोग बढ़ाने पर सहमत हुए.
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की सदस्यता का समर्थन
आतंकवाद के अलावा भारत और पोलैंड ने वैश्विक संस्थाओं में सुधार की जरूरत पर भी जोर दिया. प्रधानमंत्री मोदी और टस्क ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र को मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों के अनुरूप अधिक प्रभावी और प्रतिनिधित्व के लिहाज से बेहतर बनाया जाना चाहिए.
दोनों नेताओं ने संयुक्त राष्ट्र चार्टर के सिद्धांतों के आधार पर बहुपक्षीय सहयोग को मजबूत करने की बात कही. उनका मानना है कि दुनिया के सामने मौजूद चुनौतियों का समाधान निकालने के लिए अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं का भरोसेमंद और प्रभावी बने रहना जरूरी है.
संयुक्त बयान में पोलैंड ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता का समर्थन किया. इसके साथ ही पोलैंड ने वर्ष 2028-29 के लिए सुरक्षा परिषद की अस्थायी सीट पर भारत की उम्मीदवारी के समर्थन को भी दोहराया.
भारत लंबे समय से सुरक्षा परिषद में सुधार और स्थायी सदस्यों की संख्या बढ़ाने की मांग करता रहा है. ऐसे में पोलैंड का समर्थन दोनों देशों के बीच बढ़ते कूटनीतिक सहयोग को दर्शाता है.
जी20 के मंच पर भी बढ़ेगा सहयोग
मोदी और टस्क ने जी20 को अंतरराष्ट्रीय आर्थिक और राजनीतिक सहयोग के लिए एक महत्वपूर्ण मंच बताया. दोनों नेताओं ने उन क्षेत्रों में साथ काम करने की इच्छा जताई, जिनमें पोलैंड पहले से भाग लेता है या भविष्य में उसे शामिल होने का अवसर मिल सकता है.
इस पहल का मकसद वैश्विक चुनौतियों पर मिलकर काम करना और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर आपसी संवाद को आगे बढ़ाना है.
हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति और स्थिरता पर जोर
दोनों देशों ने एक स्वतंत्र, खुले, शांतिपूर्ण और समृद्ध हिंद-प्रशांत क्षेत्र के महत्व को भी दोहराया. नेताओं ने कहा कि समुद्री मार्गों की स्वतंत्रता बनाए रखना और अंतरराष्ट्रीय कानूनों का सम्मान करना बेहद जरूरी है.
इस दौरान वर्ष 1982 के संयुक्त राष्ट्र समुद्र कानून कन्वेंशन (यूएनसीएलओएस) का भी उल्लेख किया गया. दोनों पक्षों ने समुद्री विवादों को अंतरराष्ट्रीय कानूनों के अनुरूप शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाने की जरूरत पर बल दिया.
संयुक्त बयान के मुताबिक, भारत ने पोलैंड को हिंद-प्रशांत महासागर पहल (आईपीओआई) में शामिल होने का निमंत्रण दिया है. इस पहल का उद्देश्य हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा, सहयोग और स्थिरता को बढ़ावा देना है.
भारत और विशेग्राद समूह के बीच भी मजबूत होंगे रिश्ते
बैठक में भारत और विशेग्राद समूह (वी4) के बीच सहयोग बढ़ाने पर भी चर्चा हुई. इस समूह में पोलैंड के अलावा हंगरी, चेक गणराज्य और स्लोवाक गणराज्य शामिल हैं. दोनों नेताओं ने भारत और विशेग्राद समूह के देशों के विदेश मंत्रियों की पहली बैठक का स्वागत किया.
साथ ही, वी4+भारत प्रारूप के जरिए आपसी संबंधों को आगे बढ़ाने और साझा हितों से जुड़े मुद्दों पर मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता जताई.
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