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हबीब-उर-रहमान को दिल्ली हाईकोर्ट से झटका, तीन साल से बंद आरोपी की जमानत याचिका ने ठुकराई

दिल्ली हाईकोर्ट ने सैन्य खुफिया जानकारी लीक करने के आरोपी हबीब-उर-रहमान की जमानत याचिका खारिज कर दी है. एम्स की रिपोर्ट के आधार पर कोर्ट ने कहा कि जेल में इलाज संभव है.

Delhi High Court

सैन्य खुफिया जानकारी हासिल करने और पाकिस्तान को भेजने के आरोपी हबीब-उर-रहमान को दिल्ली हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है. अदालत ने आरोपी की ओर से दायर जमानत याचिका को खारिज कर दिया है. हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि आरोपी तीन साल से अधिक समय से हिरासत में है और उसके खिलाफ मामले में आरोप (Charges) तय किए जा चुके हैं.

वर्तमान में मामले में अभियोजन पक्ष के गवाहों और सबूतों को पेश करने की प्रक्रिया चल रही है. अदालत ने माना कि मुकदमे की सुनवाई में देरी जमानत पर फैसला लेते समय एक अहम पहलू हो सकती है, लेकिन मौजूदा रिकॉर्ड और केस की परिस्थितियों को देखते हुए इसे जमानत देने का पर्याप्त आधार नहीं माना जा सकता.

खराब सेहत की दलील और एम्स की रिपोर्ट

सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के वकील ने आरोपी की खराब स्वास्थ्य स्थिति का हवाला देते हुए जमानत की मांग की थी. दलील दी गई थी कि हबीब-उर-रहमान व्हीलचेयर पर निर्भर हैं और उन्हें कई तरह की गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं हैं.

हालांकि, हाईकोर्ट ने अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) की मेडिकल रिपोर्ट पर गौर किया. रिपोर्ट के मुताबिक, आरोपी का इलाज जेल में रहते हुए भी प्रभावी ढंग से किया जा सकता है. इसके बाद अदालत ने जमानत देने से साफ इनकार कर दिया.

जेल प्रशासन को निर्देश

जमानत याचिका खारिज करते हुए हाईकोर्ट ने जेल प्रशासन को कड़े निर्देश दिए हैं कि आरोपी की स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों का पूरा और उचित ध्यान रखा जाए. अदालत ने जेल अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने को कहा है कि आरोपी के लिए जरूरी मेडिकल जांच, विशेषज्ञ डॉक्टरों से परामर्श, फिजियोथेरेपी और अन्य आवश्यक इलाज की व्यवस्था समय पर की जाए.

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क्या है पूरा मामला?

हबीब-उर-रहमान के खिलाफ यह मामला आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम, 1923 (Official Secrets Act) के तहत दर्ज किया गया था. उन्हें वर्ष 2021 में गिरफ्तार किया गया था. जांच एजेंसी का आरोप है कि हबीब-उर-रहमान के पास सैन्य प्रशिक्षण से जुड़े अत्यंत संवेदनशील दस्तावेज और गोपनीय सामग्रियां मौजूद थीं. आरोप है कि उसने पाकिस्तान उच्च आयोग (Pakistan High Commission) के एक अधिकारी तक सैन्य खुफिया जानकारी पहुंचाने में एक माध्यम (Agent) की भूमिका निभाई थी.



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