इन दिनों इंटरनेट पर एक वीडियो धड़ल्ले से शेयर किया जा रहा है, जिसमें दावा किया जा रहा है कि भारतीय सेना की कार्रवाई में दो लोगों की मौत हो गई है. लेकिन जब इस वायरल दावे की सच्चाई सामने आई, तो पाकिस्तान से जुड़े एक बड़े प्रोपेगेंडा और फर्जीवाड़े का पर्दाफाश हो गया. भारतीय सेना ने खुद इस मामले पर सख्त रुख अपनाते हुए इस वीडियो को पूरी तरह फर्जी करार दिया है.
क्या था सोशल मीडिया पर वायरल दावा?
सोशल मीडिया पर पाकिस्तान से जुड़े एक प्रोपेगेंडा अकाउंट से यह झूठी कहानी फैलाई गई कि 23 अक्टूबर की सुबह भारतीय सेना ने किसी ‘कॉकरोच पार्टी’ या ‘जेन जेड’ के खिलाफ बड़ा क्रैकडाउन किया है. इस फर्जी पोस्ट में यह तक दावा किया गया कि इस कथित कार्रवाई में सात युवा घायल हो गए और दो लोगों की जान चली गई. भारतीय नामों का इस्तेमाल करके लोगों को गुमराह करने की इस घिनौनी साजिश का मकसद सिर्फ और सिर्फ देश के रक्षा बलों की छवि को धूमिल करना था.
सेना के फैक्ट चेक में खुली पोल
भारतीय सेना ने तुरंत एक्शन लेते हुए इस वायरल दावे का सच सामने रखा. सेना ने साफ किया कि जिस वीडियो और तस्वीर का इस्तेमाल किया जा रहा है, उसका इस फर्जी कहानी से दूर-दूर तक कोई लेना-देना नहीं है. असलियत यह है कि वह वीडियो 17 अक्टूबर का है, जब दक्षिण दिल्ली की मशहूर जामिया मिलिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी में छात्र संघ की बहाली की मांग को लेकर छात्र भूख हड़ताल पर बैठे थे और सुरक्षाकर्मी वहां हालात संभाल रहे थे. उस दौरान किसी भी तरह की अनहोनी या जान जाने की कोई घटना नहीं हुई थी.
दूसरी ओर, जामिया प्रशासन ने स्पष्ट किया कि यूनिवर्सिटी में छात्र संघ का संविधान तैयार करने के लिए एक विशेष समिति का गठन कर दिया गया है, जो 2006 से बंद पड़े छात्र संघ के तमाम पहलुओं की समीक्षा कर रही है. साफ है कि पाकिस्तान समर्थित हैंडल ने पुरानी और सामान्य तस्वीरों का गलत इस्तेमाल कर देश में सनसनी फैलाने की साजिश रची थी, जिसे फैक्ट चेक ने बेनकाब कर दिया है.
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-भारत एक्सप्रेस
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