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AISA अध्यक्ष Neha Bora की याचिका HC में खारिज, शांति बनाए रखने के मुचलके पर था विवाद

दिल्ली हाई कोर्ट ने AISA अध्यक्ष नेहा बोरा की उस याचिका को खारिज कर दिया है जिसमें उन्होंने पुलिस के बॉन्ड नोटिस को चुनौती दी थी. हालांकि, कोर्ट ने मजिस्ट्रेट को उनके खिलाफ इस्तेमाल सामग्री उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं.

AISA President Neha Bora Delhi High Court Petition Dismissed SEM Notice
Edited by Vaibhav Gupta

ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की अध्यक्ष नेहा बोरा को दिल्ली हाई कोर्ट से एक बड़ा झटका लगा है. कोर्ट ने स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट (SEM) द्वारा जारी किए गए उस नोटिस के खिलाफ दाखिल उनकी याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें उन्हें 10 हजार रुपये का निजी मुचलका भरने और शांति बनाए रखने का निर्देश दिया गया था. जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद की बेंच ने इस मामले पर फैसला सुनाते हुए हालांकि मजिस्ट्रेट को कुछ अहम निर्देश भी दिए हैं, जिससे बचाव पक्ष को थोड़ी राहत जरूर मिल सकती है.

क्या है पूरा मामला?

यह पूरा विवाद पिछले दिनों दिल्ली में हुए एक विरोध प्रदर्शन से जुड़ा है. दिल्ली पुलिस ने 18 अक्टूबर को नेहा बोरा को नोटिस जारी कर स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट के सामने पेश होने को कहा था. बोरा ने इस बॉन्ड नोटिस को हाई कोर्ट में चुनौती दी थी. उनकी तरफ से कोर्ट में दलील दी गई थी कि 15 अक्टूबर को प्रेस क्लब में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस करने के बाद उन्होंने सोशल मीडिया पर सिर्फ लोगों से मंडी हाउस जुटने की अपील की थी. उनके वकीलों का कहना था कि इस अपील का मकसद किसी भी तरह की हिंसा भड़काना या कानून व्यवस्था बिगाड़ना नहीं था, बल्कि वह एक शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन का हिस्सा था.

सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस की ओर से पेश हुए एडिशनल सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने कोर्ट को बताया कि उस दौरान इलाके में निषेधाज्ञा लागू थी. पुलिस का तर्क था कि शांति भंग होने की आशंका को देखते हुए ही नेहा बोरा को हिरासत में लिया गया था और उनके खिलाफ कानूनी प्रक्रिया के तहत ही नोटिस जारी किया गया था. पुलिस ने तो यहां तक कहा था कि यह याचिका सुनवाई के लायक ही नहीं है.

हाई कोर्ट का मजिस्ट्रेट को निर्देश

भले ही कोर्ट ने बोरा की याचिका को खारिज कर दिया हो, लेकिन जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद ने मजिस्ट्रेट को स्पष्ट निर्देश दिया है कि नेहा बोरा के खिलाफ इस्तेमाल की जा रही सभी सामग्री उन्हें उपलब्ध कराई जाए. इसके साथ ही मजिस्ट्रेट को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 135 के प्रभाव पर भी गंभीरता से विचार करने को कहा गया है.

नेहा बोरा ने अपनी याचिका में यह भी आरोप लगाया था कि 16 अक्टूबर को रिहा होने के बाद से सादे कपड़ों में पुलिसकर्मी उनका पीछा कर रहे हैं और उन्हें लगातार डराया-धमकाया जा रहा है. बहरहाल, कोर्ट के इस फैसले के बाद अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि आगे की कानूनी प्रक्रिया में क्या नया मोड़ आता है.

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-भारत एक्सप्रेस



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