Brij Bhushan Sharan Singh on SIR Controversy: भक्ति का माहौल, शंख-घंटों की गूंज और पूज्य राजन जी महाराज के मुखारविंद से बहती प्रभु श्री राम के जीवन आदर्शों की अमृतमयी कथा. शनिवार को चंदौली के धानापुर में जब हजारों श्रद्धालु प्रभु भक्ति के रस में डूबे थे, तभी सियासत के सबसे मुखर चेहरों में गिने जाने वाले पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह की मौजूदगी ने पूरे माहौल में एक अलग ही हलचल पैदा कर दी. मौका भले ही धार्मिक अनुष्ठान का था, लेकिन मीडिया के सामने आते ही हालिया चुनावी व प्रशासनिक विवाद यानी ‘SIR’ का मुद्दा उछल पड़ा.
विपक्ष द्वारा मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग पर बृजभूषण शरण सिंह ने तीखी नाराजगी जताई. उन्होंने दो टूक कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में हर बात पर सीधे मुखिया का इस्तीफा मांगना कोई समाधान नहीं, बल्कि केवल विरोध की सस्ती राजनीति है.
चंदौली में चल रही है रामकथा (Brij Bhushan Sharan Singh in Chandauli)
- चंदौली के धानापुर में भाजपा विधायक सुशील सिंह द्वारा आयोजित भव्य श्रीराम कथा.
- प्रसिद्ध राम कथा वाचक पूज्य राजन जी महाराज.
जमकर भड़के बृजभूषण शरण सिंह
बृजभूषण शरण सिंह ने कहा कि लोग अपने निजी घरों में कथा कराते हैं, लेकिन विधायक सुशील सिंह ने पूरे क्षेत्र की जनता के कल्याण के लिए यह सार्वजनिक आयोजन किया है. विपक्ष की तरफ से मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को उन्होंने सिरे से खारिज करते हुए इसे गैर-जिम्मेदाराना रवैया बताया.
‘सुझाव दीजिए, सीधे इस्तीफा क्यों?’ (CEC Gyanesh Kumar resignation row Brij Bhushan)
बृजभूषण शरण सिंह ने विपक्ष की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि व्यवस्थाओं को सुधारने के लिए रचनात्मक दृष्टिकोण की जरूरत होती है. उन्होंने कहा कि यदि व्यवस्था या प्रक्रिया में कहीं कोई खामी या गड़बड़ी नजर आती है, तो विपक्ष को ठोस सुझाव और तथ्य लेकर सामने आना चाहिए. अगर हर मुद्दे पर सीधे संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों के इस्तीफे की मांग होने लगेगी, तो इस तरह देश का कोई भी लोकतांत्रिक ढांचा सामान्य रूप से कैसे काम कर पाएगा?
अखिलेश यादव के बयानों पर नपे-तुले बोल (Brij Bhushan Sharan Singh on Akhilesh Yadav)
सपा प्रमुख अखिलेश यादव द्वारा भाजपा पर लगातार किए जा रहे हमलों के सवाल पर बृजभूषण शरण सिंह का अंदाज थोड़ा संतुलित नजर आया. उन्होंने तंज भरे लहजे में कहा कि अखिलेश यादव विपक्ष में बैठे हैं और सत्ता पक्ष का विरोध करना उनकी नैतिक व राजनीतिक जिम्मेदारी है. विपक्ष में रहकर कोई सरकार की तारीफ तो नहीं करेगा, इसलिए उनके विरोध को उसी चश्मे से देखा जाना चाहिए.
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भक्ति के मंच से सियासत का पैगाम
धार्मिक आयोजनों के पंडाल अक्सर केवल आस्था का केंद्र नहीं रहते, बल्कि वहां से उठने वाली राजनीतिक आवाजें भी दूर तक संदेश छोड़ती हैं. चंदौली के इस मंच से बृजभूषण शरण सिंह ने यह स्पष्ट कर दिया कि चुनावी प्रणाली या संवैधानिक संस्थाओं पर विपक्ष के किसी भी प्रहार को भाजपा खेमा चुपचाप बर्दाश्त नहीं करेगा. राम कथा के आध्यात्मिक प्रवाह के बीच उठा यह सियासी तूफान आने वाले दिनों में उत्तर प्रदेश की राजनीति को और गरमाने का काम करेगा.
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