Swami Kailashanand Giri Navratri Sadhana: सावन मास के दौरान अपनी कठिन तपस्या से आध्यात्मिक जगत में मिसाल कायम करने वाले आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरि महाराज की साधना का क्रम नवरात्र के इन पवित्र दिनों में भी अनवरत जारी है. मां आदिशक्ति के प्रति अटूट निष्ठा, अगाध श्रद्धा और लोककल्याण के संकल्प के साथ चल रही उनकी यह 16 दिवसीय साधना इन दिनों देश भर के श्रद्धालुओं के बीच चर्चा का केंद्र बनी हुई है.
111 डिग्री की रीडिंग ने खींचा ध्यान
साधना स्थल से सामने आए एक वीडियो ने लोगों का विशेष रूप से ध्यान आकर्षित किया है. इस वीडियो में तापमान मापने वाले एक डिजिटल उपकरण के डिस्प्ले पर 111.0 डिग्री सेल्सियस की रीडिंग दर्ज की गई है, जो इस अनुष्ठान की कठोरता और उसकी विशिष्टता को बयां करती है. सावन के बाद नवरात्र में भी इस स्तर का कड़ा साधना क्रम बनाए रखना उनके अद्वितीय आध्यात्मिक अनुशासन का परिचायक है.
ये भी पढ़ें: धनतेरस पर यम दीपदान: किस दिन जलाएं यमराज के नाम का दीपक? जानें सही विधि और धार्मिक महत्व
सनातन धर्म के विस्तार का संकल्प
भारतीय सनातन परंपरा में मां आदिशक्ति की आराधना हमेशा से शक्ति, आस्था, आत्मसंयम और सामूहिक कल्याण का प्रतीक रही है. स्वामी कैलाशानंद गिरि जी महाराज की इस साधना के मूल में व्यक्तिगत आध्यात्मिक उन्नति के साथ-साथ समाज कल्याण, राष्ट्र की सुख-समृद्धि और सनातन संस्कृति की चेतना का विस्तार प्रमुख रूप से निहित है.
ये भी पढ़ें: Karwa Chauth Kab Hai: 28 या 29 अक्टूबर, कब मनेगी करवा चौथ? जानें सही तारीख और शुभ मुहूर्त
नवरात्र के इन पावन दिनों में महाराज का यह अनुष्ठान श्रद्धालुओं को धैर्य, अटूट संकल्प और कठिन परिस्थितियों में भी अपने नैतिक व आध्यात्मिक लक्ष्यों के प्रति अडिग रहने की प्रेरणा देता है. साधना, संकल्प और सेवा की त्रिवेणी से ओत-प्रोत यह आराधना हर किसी को सनातन मूल्यों के प्रति समर्पित होने का संदेश दे रही है.
इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.



