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Delhi Riots Case: ‘हाजिरी और दिल्ली से छूट नहीं!’ जानिए सुप्रीम कोर्ट ने जमानत याचिका पर क्या कहा?

Supreme court: दिल्ली दंगा मामले में आरोपी शादाब अहमद ने सुप्रीम कोर्ट से जमानत शर्तों में ढील देने की मांग की है. वहीं कोर्ट ने उमर खालिद और शरजील इमाम की भूमिका को लेकर भी अहम टिप्पणी की.

Supreme Court
Edited by Shubhra Rai

Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली दंगों के मामले में आरोपी शादाब अहमद की ओर से दायर उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें उसने गाजियाबाद की एक लॉ यूनिवर्सिटी में क्लास अटेंट करने के लिए दिल्ली से बाहर जाने की अनुमति मांगी थी. हालांकि जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस एनवी अंजारिया की बेंच ने आरोपी को निचली अदालत जाने की छूट दे दिया है.

शादाब अहमद की याचिका और सुप्रीम कोर्ट की कड़ी शर्तें

अहमद ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा जमानत के समय लगाई गई दो शर्तो में बदलाव की मांग की थी. पहला कि उसे दिल्ली से बाहर जाने की अनुमति दी जाए जबकि दूसरा हफ्ते में दो दिन (सोमवार और गुरुवार) दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच के स्टेशन हाउस ऑफिसर के पास अपनी उपस्थिति दर्ज करानी होती है. उसने बदलकर हफ्ते में एक बार करने की अपील की थी. बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने शरजील इमाम, उमर खालिद को छोड़कर गुलफिशा फातिमा, मीरान हैदर, शिफा उर रहमान, शादाब अहम और मोहम्मद सलीम खान को कुछ शर्तों के साथ जमानत दे दिया था. कोर्ट ने जमानत देते हुए कड़ी शर्ते लगाई थी. कोर्ट ने कहा था कि ये आरोपी किसी रैली में हिस्सा नहीं ले सकते और पोस्टर नहीं बांट सकते. कोर्ट ने कहा था कि पांचों आरोपी बिना ट्रायल कोर्ट की अनुमति के दिल्ली के बाहर नहीं जा सकते है.

उमर खालिद और शरजील इमाम पर कोर्ट की सख्त टिप्पणी

कोर्ट ने पांचों को अपना पासपोर्ट निचली अदालत में जमा करने का निर्देश दिया था. कोर्ट ने कहा था कि अगर किसी आरोपी के पास पासपोर्ट नहीं है तो इस संबंधी हलफनामा दाखिल करेगा. उमर खालिद, शरजील इमाम, गुलफिशा फातिमा, मीरान हैदर, शिफा उर रहमान, मोहम्मद सलीम खान और शादाब अहमद पर यूएपीए और भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत फरवरी 2020 के दिल्ली दंगों का मास्टरमाइंड होने का आरोप है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि जमानत बचाव पक्ष के मूल्यांकन का मंच नहीं है. न्यायिक संयम कर्तव्य का परित्याग नहीं है.

उचित प्रयोग के लिए न्यायालय को एक व्यवस्थित जांच करनी होगी. क्या जांच से प्रथम दृष्टया अपराध सिद्ध होते हैं? क्या आरोपी की भूमिका का अपराध घटित करने से कोई उचित संबंध है? कोर्ट ने कहा था कि हाई कोर्ट ने जमानत की मांग को ठुकराया है.

दिल्ली दंगों का खौफनाक मंजर और दिल्ली पुलिस का पक्ष

कोर्ट ने कहा था इस प्रक्रिया से साजिश के अभियोजन पक्ष का मामला कमजोर नहीं होता है. कोर्ट ने कहा था उमर खालिद और शरजील इमाम अन्य आरोपियों की तुलना में गुणात्मक रूप से भिन्न स्थिति में हैं. मामले की सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने कोर्ट को बताया था कि इस दंगे में 53 लोग मारे गए और 700 से अधिक लोग घायल हुए थे.

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-भारत एक्सप्रेस



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