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केरल के पत्रकार सिद्दीकी कप्पन के पासपोर्ट रिलीज मामले पर सुप्रीम कोर्ट 2 नवंबर को करेगा सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट केरल के पत्रकार सिद्दीकी कप्पन द्वारा अपना पासपोर्ट रिलीज करने की मांग को लेकर दायर याचिका पर 2 नवंबर को सुनवाई करेगा. जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक आराधे की बेंच इस मामले की सुनवाई कर रही है.

Supreme Court
Edited by Radha Priya

Siddique Kappan Case: सुप्रीम कोर्ट हाथरस मामले में केरल के पत्रकार सिद्दीकी कप्पन की ओर से दायर याचिका पर 2 नवंबर को सुनवाई करेगा. कप्पन ने अपना पासपोर्ट रिलीज करने की मांग की है. जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक आराधे की बेंच दायर याचिका पर सुनवाई कर रही है. इससे पहले कप्पन ने जमानत की शर्त में छूट के लिए एक और अर्जी दायर की थी, जिसके तहत उन्हें हर सोमवार को उत्तर प्रदेश के पुलिस स्टेशन में अपनी उपस्थिति दर्ज करानी होती थी, जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया था.

सुप्रीम कोर्ट द्वारा जमानत मिलने की पृष्ठभूमि

9 सितंबर 2022 को सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के कप्पन को जमानत देने से इनकार करने के आदेश के खिलाफ अपील को स्वीकार करते हुए उन्हें जमानत दी थी. सिद्दीकी कप्पन की ओर से दायर जमानत का विरोध करते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने कहा था कि सिद्दीकी कप्पन सीएए-एनआरसी और बाबरी फैसले को लेकर धार्मिक उन्माद फैलाने की बड़ी साजिश का हिस्सा है. सरकार का यह भी आरोप था कि कप्पन देश में धार्मिक कलह और आतंक फैलाने की बड़ी साजिश का हिस्सा हैं.

गिरफ्तारी और जेल में बिताए गए साल

कप्पन को अक्टूबर 2020 में हाथरस में कथित तौर पर सामूहिक बलात्कार पीड़िता की मौत के बाद वहां जाते वक्त रास्ते में गिरफ्तार किया गया था. सुप्रीम कोर्ट ने 9 सितंबर 2022 को कप्पन को जमानत देते हुए कहा था कि हर व्यक्ति को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार है. कप्पन को करीब दो साल तक जेल में रहने के बाद जमानत मिली थी. कोर्ट ने जमानत की शर्त के तहत कहा था कि कप्पन को जेल से रिहा होने के बाद अगले 6 हफ्ते तक दिल्ली में रहना होगा और हर सप्ताह सोमवार को यहां निजामुद्दीन पुलिस थाने में हाजिरी लगानी होगी.

पीएफआई से जुड़े आरोप और यूएपीए के तहत मामला

पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) के साथ कथित संबंध रखने के लिए कप्पन सहित चार लोगों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता और गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के विभिन्न प्रावधानों के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी. पीएफआई पर पहले भी देशभर में नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ विरोध प्रदर्शनों के लिए आर्थिक मदद का आरोप लगा था. पुलिस ने पहले भी दावा किया था कि आरोपी हाथरस में कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगाड़ने का प्रयास कर रहे थे.

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हाथरस मामले की मुख्य घटना

एक दलित महिला से 14 सितंबर 2020 को उसके गांव के चार लोगों ने कथित तौर पर सामूहिक बलात्कार किया था और इसके एक पखवाड़े बाद दिल्ली के एक अस्पताल में उसकी मौत हो गई थी. उसका आधी रात को उसके गांव में अंतिम संस्कार कर दिया गया था. उसके परिवार ने दावा किया था कि उनकी सहमति के बगैर अंतिम संस्कार किया गया और उन्हें आखिरी बार शव घर लाने की अनुमति नहीं दी गई थी.



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