प्रयागराज इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल 2026 का आयोजन 30 अक्टूबर से 1 नवंबर तक होगा
Prayagraj Film Festival 2026: संगम नगरी प्रयागराज में 30 अक्टूबर से 1 नवंबर तक इंटरनेशनल प्रयागराज फिल्म फेस्टिवल 2026 का आयोजन किया जाएगा. तीन दिवसीय इस महोत्सव में सिनेमा, संस्कृति और आधुनिक तकनीक से जुड़े कई पहलुओं पर चर्चा होगी. साथ ही, युवा फिल्मकारों को अपनी प्रतिभा दिखाने और अनुभवी कलाकारों से सीखने का मौका मिलेगा. आयोजन को लेकर फिल्म फेस्टिवल के अवार्ड का भी अनावरण किया गया.
मधुबाला फिल्म्स के तत्वावधान में आयोजित होने वाले इस महोत्सव का मकसद फिल्मों को सिर्फ मनोरंजन का साधन मानने तक सीमित नहीं रखना है. आयोजक सिनेमा के जरिए सामाजिक मुद्दों, सांस्कृतिक विरासत और नई पीढ़ी की रचनात्मक सोच को सामने लाना चाहते हैं.
तीन दिन तक होंगे अलग-अलग कार्यक्रम
फिल्म फेस्टिवल के पहले दिन, 30 अक्टूबर को होटल प्रयाग इन में उद्घाटन कार्यक्रम होगा. मुख्य अतिथि नंद गोपाल गुप्ता की मौजूदगी में फिल्मकारों और कलाकारों के साथ संवाद किया जाएगा. इस दौरान फिल्मों की सामाजिक भूमिका और संस्कृति से उनके जुड़ाव पर भी चर्चा होगी.
31 अक्टूबर को इसी होटल में फिल्म निर्माण, पटकथा लेखन, निर्देशन, अभिनय और सिनेमैटोग्राफी जैसे विषयों पर कार्यक्रम प्रस्तावित हैं. डिजिटल तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते इस्तेमाल पर भी विशेषज्ञ अपनी बात रखेंगे. इससे फिल्म निर्माण में रुचि रखने वाले युवाओं को नई तकनीकों और संभावनाओं को समझने में मदद मिलेगी.
महोत्सव का समापन 1 नवंबर को मोतीलाल नेहरू राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एमएनएनआईटी) के एमपी हॉल में होगा. इस कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य की मौजूदगी में चयनित फिल्मों और रचनात्मक क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वालों को सम्मानित किया जाएगा.
लोकभाषाओं के कलाकारों को मिलेगा सम्मान
आयोजन समिति के अध्यक्ष डॉ. अमित त्रिपाठी ने बताया कि अवधी, भोजपुरी, ब्रज और बुंदेलखंडी जैसी लोकभाषाओं में काम करने वाले कलाकारों को विशेष मंच देना भी इस महोत्सव का अहम उद्देश्य है. समिति का मानना है कि क्षेत्रीय भाषाओं की कहानियों और कलाकारों को व्यापक पहचान मिलनी चाहिए.
मधुबाला फिल्म्स के चेयरमैन आलोक मालवीय ने कहा कि जिस भाषा में इंसान अपनी पहली लोरी सुनता है, उस भाषा की कहानियां भी बड़े मंच पर सम्मान पाने की हकदार हैं.आयोजन समिति में आईटी का काम देख रहीं डॉ. गरिमा कुशवाहा ने कहा कि यह महोत्सव स्थानीय युवाओं को फिल्म निर्माण की बारीकियां समझने और विशेषज्ञों से संवाद करने का अवसर देगा.
आयोजकों के मुताबिक, तकनीक के साथ मानवीय संवेदना और मौलिक सोच भी अच्छी फिल्म के लिए जरूरी हैं. उन्हें उम्मीद है कि यह आयोजन प्रयागराज में सिनेमा और रचनात्मक गतिविधियों को नया प्रोत्साहन देगा. मीडिया से भी इस पहल को लोगों तक पहुंचाने में सहयोग की अपील की गई है.
-भारत एक्सप्रेस
इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.



