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जानें क्या होता है सीजर अटैक? क्यों और कैसे आता है दौरा, पढ़ें लक्षण, कारण और बचाव के तरीके

Seizure Attack: सीजर अटैक यानी दौरा दिमाग की इलेक्ट्रिकल एक्टिविटी में अचानक गड़बड़ी के कारण आता है. यह जागते समय ही नहीं, बल्कि सोते वक्त भी हो सकता है. अचानक बेहोशी, हाथ-पैरों में झटके और मांसपेशियों में अकड़न इसके प्रमुख लक्षण हैं. जानिए इसके कारण, बचाव और दौरा पड़ने पर क्या करना चाहिए.

Seizure Attack

Seizure Attack

Seizure Attack: सीजर अटैक (Seizure Attack) यानी मिर्गी का दौरा एक ऐसी न्यूरोलॉजिकल स्थिति है, जिसमें दिमाग की इलेक्ट्रिकल एक्टिविटी अचानक असामान्य और अनियंत्रित हो जाती है. इसकी वजह से व्यक्ति के शरीर की गतिविधियों, व्यवहार, संवेदनाओं और होश पर असर पड़ सकता है. कई बार व्यक्ति अचानक बेहोश होकर जमीन पर गिर जाता है और उसके हाथ-पैर तेजी से कांपने लगते हैं. हालांकि, हर सीजर अटैक में ऐसा होना जरूरी नहीं है. कुछ मामलों में व्यक्ति कुछ सेकंड के लिए एकटक देखने लगता है या उसे आसपास की चीजों का अहसास नहीं रहता. सीजर अटैक बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक किसी को भी आ सकता है. यह एक बार भी हो सकता है और कुछ लोगों में बार-बार भी हो सकता है. आइए जानते हैं कि सीजर अटैक क्या है, इसके पीछे क्या कारण होते हैं, लक्षण कैसे पहचानें और इससे बचाव के लिए क्या करना चाहिए.

1. क्या होता है सीजर अटैक?

हमारा दिमाग शरीर के सभी अंगों को नियंत्रित करने का काम करता है. इसके लिए दिमाग की कोशिकाएं इलेक्ट्रिकल सिग्नल के जरिए एक-दूसरे तक संदेश पहुंचाती हैं. जब इन सिग्नलों में अचानक असामान्य गतिविधि होने लगती है, तो व्यक्ति को सीजर यानी दौरा पड़ सकता है. इस दौरान व्यक्ति के शरीर में झटके लग सकते हैं, मांसपेशियां अकड़ सकती हैं, आंखें पलट सकती हैं या कुछ समय के लिए चेतना खत्म हो सकती है. कुछ लोगों को केवल कुछ पलों के लिए भ्रम या खालीपन महसूस होता है.

ध्यान देने वाली बात: एक बार दौरा पड़ने का मतलब यह नहीं है कि व्यक्ति को मिर्गी (Epilepsy) है. मिर्गी एक ऐसी बीमारी है, जिसमें बिना किसी तत्काल कारण के बार-बार दौरे पड़ने की प्रवृत्ति होती है.

2. सीजर अटैक क्यों आता है? क्या हैं इसके मुख्य कारण?

सीजर अटैक आने के पीछे कई कारण हो सकते हैं. कुछ लोगों में यह दिमाग से जुड़ी बीमारी के कारण होता है, जबकि कुछ मामलों में शरीर में होने वाले बदलाव भी दौरे की वजह बन सकते हैं.

इसके प्रमुख कारण हैं:

मिर्गी (Epilepsy): यह बार-बार दौरे आने का एक प्रमुख कारण है.
दिमाग में चोट: सिर पर गंभीर चोट लगने से दिमाग की इलेक्ट्रिकल गतिविधि प्रभावित हो सकती है.
ब्रेन स्ट्रोक या ट्यूमर: दिमाग में खून की सप्लाई बाधित होने या असामान्य गांठ होने से दौरे पड़ सकते हैं.
दिमाग में संक्रमण: मेनिनजाइटिस और एन्सेफलाइटिस जैसे संक्रमण सीजर का कारण बन सकते हैं.
ब्लड शुगर कम होना: शरीर में शुगर का स्तर बहुत कम होने पर दौरा पड़ सकता है.
इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन: सोडियम, कैल्शियम और अन्य जरूरी मिनरल्स का स्तर बिगड़ने से भी सीजर आ सकता है.
शराब या नशीले पदार्थ: अत्यधिक शराब का सेवन या अचानक शराब छोड़ने से दौरे का खतरा बढ़ सकता है.

इसके अलावा नींद की कमी, अत्यधिक तनाव, डिहाइड्रेशन और समय पर दवाएं न लेना उन लोगों में दौरे को ट्रिगर कर सकता है, जिन्हें पहले से इसकी समस्या है.

3. सीजर अटैक आने से पहले और दौरान क्या होते हैं लक्षण?

सीजर अटैक के लक्षण हर व्यक्ति में अलग-अलग हो सकते हैं. कुछ लोगों को दौरा आने से पहले ही शरीर में कुछ असामान्य बदलाव महसूस होने लगते हैं.

अचानक डर या बेचैनी महसूस होना.
अजीब गंध या स्वाद महसूस होना.
चक्कर आना या आंखों के सामने धुंधलापन.
पेट में अचानक अजीब हलचल महसूस होना.
हाथ-पैर में झनझनाहट होना.

दौरे के दौरान दिखाई देने वाले लक्षण:

अचानक बेहोश होकर गिर जाना.
हाथ-पैरों में तेज झटके लगना.
शरीर की मांसपेशियों का अकड़ जाना.
मुंह से झाग आना या लार निकलना.
जीभ कट जाना.
पेशाब पर नियंत्रण न रहना.
कुछ समय के लिए आसपास की चीजों का अहसास खत्म होना.

दौरा खत्म होने के बाद व्यक्ति को काफी थकान, सिरदर्द, नींद और भ्रम महसूस हो सकता है.

4. क्या सोते समय भी आ सकता है सीजर अटैक?

जी हां, सीजर अटैक केवल जागते समय ही नहीं, बल्कि सोते समय भी आ सकता है. इसे नॉक्टर्नल सीजर (Nocturnal Seizure) कहा जाता है. इस स्थिति में व्यक्ति सोते समय अचानक झटके खा सकता है, उसके हाथ-पैर अकड़ सकते हैं या कुछ समय के लिए उसकी सांस लेने की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है. कई बार व्यक्ति को खुद पता भी नहीं चलता कि रात में उसे दौरा पड़ा था. कुछ मामलों में सुबह उठने पर तेज सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द, असामान्य थकान, जीभ पर काटने के निशान या बिस्तर पर पेशाब के संकेत दिखाई दे सकते हैं. हालांकि, नींद में होने वाली हर असामान्य हरकत सीजर नहीं होती. इसकी पुष्टि डॉक्टर की जांच से ही की जा सकती है.

5. सीजर अटैक आने पर तुरंत क्या करना चाहिए?

अगर आपके सामने किसी व्यक्ति को दौरा पड़ता है, तो घबराने के बजाय सही तरीके से उसकी मदद करना जरूरी है.

व्यक्ति को धीरे से सुरक्षित जगह पर लिटाएं.
उसके सिर के नीचे कोई मुलायम कपड़ा या तकिया रखें.
आसपास मौजूद नुकीली और कठोर चीजों को हटा दें.
गले में मौजूद टाइट कपड़े या टाई ढीली कर दें.

दौरा कितनी देर तक चला, इसका समय नोट करें.
झटके रुकने के बाद व्यक्ति को करवट से लिटाएं.
उसके पूरी तरह होश में आने तक उसके पास रहें.

इन गलतियों से बचें:

व्यक्ति के हाथ-पैरों को जबरदस्ती न पकड़ें.
उसके मुंह में चम्मच, पानी, दवा या उंगली न डालें.
दौरे के दौरान उसे पानी या खाना न दें.
जबरदस्ती झटके रोकने की कोशिश न करें.

अगर दौरा 5 मिनट से ज्यादा चले, एक के बाद एक दौरे आएं, सांस लेने में परेशानी हो या व्यक्ति होश में न आए तो तुरंत मेडिकल इमरजेंसी की मदद लें. पहली बार दौरा पड़ने पर भी तुरंत अस्पताल ले जाना चाहिए.

6. सीजर अटैक से बचाव के लिए क्या करें?

सीजर अटैक को हर स्थिति में रोकना संभव नहीं है, लेकिन कुछ सावधानियां बरतकर दौरे का खतरा कम किया जा सकता है.

रोजाना 7-8 घंटे की पर्याप्त नींद लें.
समय पर खाना खाएं और लंबे समय तक भूखे न रहें.
शरीर में पानी की कमी न होने दें.
शराब और नशीले पदार्थों से दूरी बनाएं.
तनाव कम करने के लिए योग और मेडिटेशन करें.
नियमित रूप से स्वास्थ्य की जांच करवाएं.
अगर पहले से मिर्गी की समस्या है तो डॉक्टर की बताई दवाएं नियमित लें.
बिना डॉक्टर की सलाह के दवाएं बंद न करें.
अपने दौरे के संभावित ट्रिगर्स को पहचानें और उनसे बचने की कोशिश करें.

मिर्गी के मरीजों को नहाते समय बाथटब के बजाय शॉवर का इस्तेमाल करना चाहिए. तैराकी या अन्य जोखिम वाली गतिविधियां अकेले नहीं करनी चाहिए.

7. सीजर अटैक का पता लगाने के लिए कौन-सी जांच होती है?

अगर किसी व्यक्ति को पहली बार दौरा पड़ा है तो डॉक्टर से तुरंत संपर्क करना चाहिए. डॉक्टर मरीज की मेडिकल हिस्ट्री और दौरे के दौरान दिखाई देने वाले लक्षणों के आधार पर जांच की सलाह देते हैं.

इसमें मुख्य रूप से शामिल हैं:

EEG टेस्ट: दिमाग की इलेक्ट्रिकल गतिविधियों की जांच की जाती है.
MRI ब्रेन: दिमाग की संरचना में किसी तरह की असामान्यता का पता लगाया जाता है.
CT स्कैन: दिमाग में चोट, ब्लीडिंग या अन्य समस्या की जांच की जाती है.
ब्लड टेस्ट: ब्लड शुगर और शरीर में सोडियम जैसे इलेक्ट्रोलाइट्स के स्तर की जांच होती है.

सीजर का इलाज उसके कारण और प्रकार पर निर्भर करता है. मिर्गी के मरीजों को डॉक्टर एंटी-सीजर दवाएं दे सकते हैं. सही इलाज और नियमित दवाओं से बहुत से मरीज दौरे को नियंत्रित कर सामान्य जीवन जी सकते हैं.

कब हो सकती है जानलेवा स्थिति?

ज्यादातर दौरे कुछ मिनटों में अपने आप रुक जाते हैं, लेकिन अगर दौरा 5 मिनट से ज्यादा चलता है या व्यक्ति को होश आए बिना बार-बार दौरे पड़ते हैं, तो यह गंभीर मेडिकल इमरजेंसी हो सकती है. इसे स्टेटस एपिलेप्टिकस (Status Epilepticus) कहते हैं. इसलिए दौरे को सामान्य बेहोशी समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. समय पर इलाज और सही मेडिकल देखभाल बेहद जरूरी है.

भारत एक्सप्रेस



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