Supreme Court: अयोध्या राम मंदिर चंदा चोरी मामले में दायर सभी याचिकाओं का सुप्रीम कोर्ट ने निपटारा कर दिया है. मामले की सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया कि इस मामले में चार्जशीट दाखिल हो गई है.
सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला और याचिकाओं का निपटारा
सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने सभी पक्षों की जिरह के बाद दायर सभी याचिकाओं का निपटारा कर दिया है. साथ ही कोर्ट इसी मामले में दायर एक अन्य याचिकाकर्ता को सिविल कोर्ट जाने को कहा जिसमें सुप्रीम कोर्ट के संविधान पीठ ने अयोध्या राम मंदिर बनाने का जिस जगह पर निर्देश दिया था, उसी जगह पर बना है या नहीं, इसकी जांच की जाए. कोर्ट ने अपने आदेश में सभी याचिककर्ताओ से मजिस्ट्रेट कोर्ट में चल रही सुनवाई में सहायता करने को कहा है.
SIT चार्जशीट और करोड़ों का वित्तीय विवाद
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि उसने इन आरोपों की सच्चाई या गुण-दोष पर कोई राय नहीं दी है. एसआईटी ने सितंबर 2026 में इस मामले में 8 आरोपियों के खिलाफ करीब 74 हजार पेज की चार्जशीट दाखिल की थी. जिसमें रिपोर्टों के मुताबिक जांच के दौरान सात आरोपियों से करीब 79.8 लाख की बरामदगी की गई. एसआईटी ने आठ आरोपियों से जुड़ी 105 ऐसी घटनाओं की रिपोर्ट दी थी, जिसके मुताबिक बिना अनुमति के नकदी निकाली गई थी और संदिग्ध जमा किए गए थे. पिछली सुनवाई में कोर्ट ने मामले की जांच के लिए गठित एसआईटी से दो सप्ताह में रिपोर्ट देने को कहा था.
यूपी सरकार का रुख और फॉरेंसिक ऑडिट का निर्देश
कोर्ट ने एक फॉरेंसिक ऑडिटर को एसआईटी में शामिल करने का निर्देश दिया था. उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया था कि मामले की जांच के लिए एसआईटी का गठन कर दिया गया है. इसकी कमान लखनऊ रेंज में आईजी किरण एस. को सौपी गई है. इसके अन्य सदस्य पुलिस उपमहानिरीक्षक (डीआईजी) सोमेन वर्मा और अयोध्या के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) गौरव ग्रोवर शामिल है. मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ वकील देवदत्त कामत ने कहा था कि लोगों ने 500 या 1000 रुपए दिए हैं. आखिरकार वह पैसा ट्रस्ट तक नहीं पहुचा है, ट्रस्ट को जो भी मिला है, उसे वेबसाइट पर दिखाया जाना चाहिए ताकि लोगों को पता चल सके कि उनका पैसा पहुच गया है. यह कोई टकराव वाला मामला नहीं है.
सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी और निर्मोही अखाड़े की मांग
कोर्ट ने कहा था एसआईटी को पहले रिपोर्ट देने दीजिए. सीजेआई ने कहा था पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए सभी जरूरी कदम उठाए जाएंगे. उन्होंने कहा था कि हम घटना की गुणवत्तापूर्ण जांच कर रहे है. सीजेआई ने एक याचिकाकर्ता की ओर से सुप्रीम कोर्ट द्वारा निगरानी की मांग को खारिज कर दिया था. इसको लेकर निर्मोही अखाड़े, वकील अजय कुमार राय, वकील दिनेश कुमार यादव, हिंदू धर्म परिषद और राष्ट्रीय जनता दल के सांसद सुधाकर सिंह की ओर से याचिका दायर की गई है. निर्मोही अखाड़े ने राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पुनर्गठन की मांग की है.
दायर याचिका में सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया गया है कि ट्रस्ट को सार्वजनिक ट्रस्ट घोषित किया जाए. साथ ही वित्तीय लेनदेन का फॉरेंसिक ऑडिट कराने की मांग की गई है. अखाड़े ने अदालत से अनुरोध किया है कि वर्तमान ट्रस्ट के गठन और उसके कामकाज में पारदर्शिता की कमी है.
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-भारत एक्सप्रेस
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