Silver Crash: वैश्विक और घरेलू बाजारों में पिछले कुछ समय से कीमती धातुओं में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है. इस बीच चांदी की कीमतों में आई भारी गिरावट ने निवेशकों का ध्यान खींचा है. महीनेभर के भीतर चांदी के दाम में 18 फीसदी की बड़ी गिरावट दर्ज की गई है, जिससे यह अपने निचले स्तर पर पहुंच गई है. ऐसे में बाजार के जानकारों का मानना है कि लॉन्ग-इनवेस्टमेंट के लिए यह एक सुनहरा मौका हो सकता है.
चांदी की कीमतों में आई हालिया गिरावट ने निवेशकों के लिए एक नया अवसर पैदा कर दिया है. महीनेभर में 18% तक टूटने के बाद चांदी फिलहाल आकर्षक वैल्युएशन पर मिल रही है. हालांकि भू-राजनीतिक और आर्थिक कारणों से बाजार में अभी दबाव बना हुआ है, लेकिन लंबी अवधि के निवेशकों के लिए यह चांदी में अपना एक्सपोजर बढ़ाने का सबसे सही समय माना जा रहा है.
चांदी में ऐतिहासिक गिरावट और मौजूदा स्थिति
पिछले कुछ महीनों में रिकॉर्ड ऊंचाई छूने के बाद अब चांदी की कीमतों में जबरदस्त करेक्शन देखने को मिला है. एक साल के मुकाबले चांदी के भाव काफी नीचे आ चुके हैं. आंकड़ों के मुताबिक, साप्ताहिक आधार पर इसमें करीब 9 फीसदी और पिछले एक महीने में 18 फीसदी की गिरावट आई है. वैश्विक बाजार में चांदी का हाजिर भाव गिरकर 48 डॉलर प्रति औंस के आसपास चल रहा है, जिससे निवेशकों में हलचल तेज हो गई है.
घरेलू बाजार (MCX) पर असर
सिर्फ वैश्विक बाजार ही नहीं, बल्कि भारतीय घरेलू बाजार में भी चांदी की चमक फीकी पड़ी है. मल्टीकमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर चांदी की कीमतों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है. अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने की आशंका, मजबूत जॉब डेटा, बढ़ती महंगाई, महंगे कच्चे तेल और भू-राजनीतिक तनावों के चलते घरेलू स्तर पर भी चांदी के दाम लुढ़ककर निचले स्तर पर आ गए हैं.
क्यों गिर रहे हैं चांदी के दाम?
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, चांदी की कीमतों में इस गिरावट के पीछे कई मुख्य कारण हैं. अमेरिकी अर्थव्यवस्था से जुड़े आंकड़े और केंद्रीय बैंकों की मौद्रिक नीतियां इसका मुख्य आधार हैं. इसके अलावा, सेमीकंडक्टर, एआई इंफ्रास्ट्रक्चर, इलेक्ट्रॉनिक्स और सोलर मैन्युफैक्चरिंग जैसे सेक्टर्स से जुड़ी मांग के समीकरण भी कीमतों पर दबाव बना रहे हैं. सोने और चांदी का अनुपात (Gold-Silver Ratio) भी बढ़कर अपने हालिया उच्च स्तर पर पहुंच गया है.
आगे क्या रहेगा चांदी का रुख और निवेश की सलाह?
कमोडिटी रिसर्च विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में चांदी का भाव 47 से 50 डॉलर प्रति औंस के दायरे में बना रह सकता है. यदि कीमतें और फिसलती हैं, तो यह 43 से 45 डॉलर के सपोर्ट जोन पर टिक सकती हैं. जानकारों का कहना है कि यह गिरावट एक चक्रीय प्रक्रिया है और निचले स्तर पर खरीदारी करने से भविष्य में अच्छा रिटर्न मिल सकता है.
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-भारत एक्सप्रेस
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