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‘अधिकारियों को जेल भेजेंगे…’ SC की तल्ख टिप्पणी के बाद सुधरा BMC का रुख, हलफनामा करेगी पेश

Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद बीएमसी ने दी संतोषजनक जानकारी। वरिष्ठ वकील आरपी भट्ट ने कोर्ट से व्यक्तिगत रूप से माफी मांगते हुए जल्द हलफनामा दाखिल करने का भरोसा दिया.

Supreme Court
Edited by Shubhra Rai

Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने अतिक्रमण हटाने के आदेशों का पालन नहीं करने के मामले में बीएमसी कमिश्नर कर फिलहाल राहत दे दिया है. मामले की सुनवाई के दौरान बीएमसी की ओर से पेश वरिष्ठ वकील आरपी भट्ट ने कोर्ट को बताया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन कर लिया गया है और संबंधित सभी अवैध निर्माणों को हटा दिया गया है.

CJI की सख्ती के बाद बीएमसी ने दी संतोषजनक जानकारी, वकील ने मांगी व्यक्तिगत माफी

एक दिन पहले ही सीजेआई सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने बीएमसी कमिश्नर को अवमानना का नोटिस जारी किया था और उनका वेतन रोकने का आदेश दिया था. सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी मोहना की पीठ ने बीएमसी के रवैये की आलोचना करते हुए कहा था कि अधिकारियों को जेल भेज देंगे, तब उन्हें हमारे आदेश की भाषा समझ मे आ जायेगी. बीएमसी की ओर से दी गई जानकारी पर सीजेआई सूर्यकांत ने संतुष्टि जताई है. उन्होंने कहा धन्यवाद. आपके दखल के बाद यह काम नहीं हो पाता. मामले की सुनवाई के दौरान बीएमसी की ओर से पेश वरिष्ठ वकील आरपी भट्ट ने अदालत से व्यक्तिगत रूप से माफी भी मांगी है.

वकील आरपी भट्ट की खुली स्वीकारोक्ति, सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर हलफनामा जल्द होगा दाखिल

उन्होंने कहा कि पहले वह अधिकारियों का बचाव कर रहे थे, लेकिन अब उन्हें अपनी गलती का एहसास हो गया है. उन्होंने कहा, मैं व्यक्तिगत रूप से आप सभी जजों से माफी मांगता हूं. साथ ही आरपी भट्ट ने कोर्ट को भरोसा दिलाया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन किए जाने के संबंध में हलफनामा आज या कल दाखिल कर दिया जाएगा. इस हलफनामे के जरिए नगर निगम की ओर से की गई कार्रवाई की जानकारी आधिकारिक तौर पर अदालत के सामने रखी जाएगी. कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि प्रथम दृष्टया हम इस नतीजे पर पहुंचे है कि ग्रेटर मुंबई नगर निगम के आयुक्त अदालत की अवमानना के दोषी हैं.

अतिक्रमण मामले में कोर्ट की दोटूक: पहले आदेश का पालन करें, फिर मांगें राहत

कोर्ट ने अतिक्रमण हटाने के अपने पुराने आदेश पर अमल करने के लिए अतिरिक्त समय मांगने पर भी बीएमसी को राहत नहीं दी थी. कोर्ट ने नगर निगम पर 5 लाख रुपए का जुर्माना लगाया था. उन्होंने 13 नवंबर 2025 और 28 जुलाई 2026 दिए गए हमारे समयबद्ध निर्देशों का उल्लंघन किया है. उन्हें कारण बताना होगा कि उनके खिलाफ उचित कार्रवाई क्यों न की जाए. पिछली सुनवाई में सिविक बॉडी ने कहा था कि सिविक कोर्ट में फाइल किए गए दस्तावेज मराठी में थे और उन्हें इंग्लिश में ट्रांसलेट करने में समय लगेगा.

हालांकि कोर्ट ने इन दलीलों को खारिज कर दिया था. मामले की सुनवाई के जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने कहा था कि बीएमसी सुप्रीम कोर्ट के पिछले आदेश पर अमल किए गए बिना अतिरिक्त राहत या समय मांगने की हकदार नहीं है. उन्होंने कहा था कि नियम बहुत सीधा है, पहले आदेश का पूरी तरह पालन कीजिए. उसके बाद ही किसी प्रकार की राहत के लिए अर्जी दाखिल कीजिए.

यह भी पढ़ें-दिल्ली SIR विवाद: सुप्रीम कोर्ट इस तारीख को करेगा सुनवाई, 33 लाख नोटिस और 47 लाख नाम काटने के आरोपों पर EC से तीखे सवाल

-भारत एक्सप्रेस



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