पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहा है और इस बार उसने पैसे कमाने का ऐसा घटिया और शर्मनाक पैंतरा निकाला है, जिसने पूरी क्रिकेट दुनिया में सनसनी फैला दी है. पीसीबी अब छोटे देशों की क्रिकेट लीग्स और एसोसिएट नेशंस को खुलेआम लूटने पर उतारू हो गया है.
हाल ही में नेपाल प्रीमियर लीग (NPL) के बाद अब अबू धाबी टी10 लीग (Abu Dhabi T10 League) से जुड़ा एक बड़ा मामला सामने आया है, जहां पीसीबी ने अपने ही खिलाड़ियों को एनओसी (No Objection Certificate) देने के एवज में आयोजकों से डॉलर में भारी-भरकम फिरौती जैसी रकम वसूली है. आइए पर्दा उठाते हैं पाकिस्तानी क्रिकेट बोर्ड के इस काले कारनामे से.
अबू धाबी T10 लीग में PAK का ब्लैकमेलिंग खेल
क्रिकइन्फो की रिपोर्ट के मुताबिक, अबू धाबी T10 लीग मैनेजमेंट ने 30 सितंबर को खिलाड़ियों के ड्राफ्ट के तुरंत बाद पाकिस्तानी खिलाड़ियों के लिए एनओसी की अर्जी दी थी. टूर्नामेंट शुरू होने से ठीक कुछ दिन पहले पीसीबी ने अचानक अपना रंग बदला और प्रति खिलाड़ी 10,000 यूएस डॉलर (करीब 9.5 लाख रुपये) की डिमांड रख दी.
इस प्लेयर्स ड्राफ्ट में छह में से पांच फ्रेंचाइजी टीमों ने पाकिस्तान के कुल 16 खिलाड़ियों को चुना था. जब टीमों को इस बेतुके और जबरन वसूली वाले नियम का पता चला, तो उन्होंने अतिरिक्त पैसे देने से साफ इनकार कर दिया. कुछ खिलाड़ी अपनी जेब से या सैलरी से यह फीस चुकाना चाहते थे, लेकिन बात नहीं बनी. नतीजा यह हुआ कि बिना फीस के पीसीबी ने अपने खिलाड़ियों के रास्ते पूरी तरह ब्लॉक कर दिए हैं और अब फ्रेंचाइजी टीमें मजबूर होकर पाकिस्तानी खिलाड़ियों के विकल्प यानी रिप्लेसमेंट की तलाश कर रही हैं.
NPL में भी मचा चुका है लूटपाट का तांडव
यह कोई पहला मामला नहीं है जब पीसीबी ने ऐसा घिनौना दांव खेला हो. पिछले महीने नेपाल प्रीमियर लीग में खेलने जाने वाले पाकिस्तानी खिलाड़ियों को लेकर भी ऐसा ही विवाद सामने आया था. पीसीबी ने एनपीएल आयोजकों से एक-एक खिलाड़ी को एनओसी देने के नाम पर 25-25 हजार यूएस डॉलर (करीब 24 लाख रुपये) की भारी-भरकम मांग रख दी थी.
इतनी तगड़ी रकम के चलते अधिकांश टीमें खिलाड़ियों को खरीदने से पीछे हट गईं. रिपोर्ट के मुताबिक, सिर्फ दो ही पाकिस्तानी खिलाड़ी-हुसैन तलत और जहांदाद खान-नेपाल लीग में खेल पा रहे हैं, क्योंकि संभवतः उनकी फ्रेंचाइजी ने पीसीबी की यह अवैध मांग मान ली थी. छोटे देशों के बोर्ड जो अपने क्रिकेट को ऊपर उठाने की कोशिश कर रहे हैं, उन्हें पाकिस्तान का यह बोर्ड आर्थिक रूप से दबाने की कोशिश कर रहा है.
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पीसीबी की ‘ऑन-ऑफ’ गंदी पॉलिसी
जानकारों का कहना है कि पिछले कुछ सालों में पीसीबी की एनओसी देने को लेकर एक ‘ऑन-ऑफ’ और मनमाने नियमों वाली नीति रही है. इस तरह की वित्तीय वसूली का सबसे पहले खुलासा तब हुआ था जब यूएई की इंटरनेशनल लीग टी20 (ILT20) लॉन्च हुई थी. असल में, पीसीबी इस गंदी मानसिकता के साथ काम कर रहा है कि नेपाल या यूएई जैसे उभरते क्रिकेट बोर्ड्स के खिलाड़ी पाकिस्तान सुपर लीग (PSL) में खेलने नहीं आते, इसलिए वे इन लीग्स को ब्लैकमेल करके अपनी तिजोरी भर सकते हैं. पीसीबी इस बात का फायदा उठा रहा है कि मजबूरी में ये छोटे देश उनकी शर्तें मान लें.
लेकिन इस ड्रामे से अंततः नुकसान बेचारे उन पाकिस्तानी खिलाड़ियों का हो रहा है, जिनके करियर और कमाई पर उनका अपना ही बोर्ड लात मार रहा है.
-भारत एक्सप्रेस
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