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‘वीजा पर आई थीं अमेरिका, अब संसद में बुलंद करेंगी आवाज’ म‍िडटर्म इलेक्‍शन में भारतीय मूल की प्रमिला जयपाल ने जीता चुनाव

Pramila Jayapal: प्रमिला जयपाल का जन्म भारत में हुआ था. उन्होंने अपना बचपन भारत, इंडोनेशिया और सिंगापुर में बिताया. 16 साल की उम्र में वह अकेले उच्च शिक्षा के लिए अमेरिका चली गईं और जॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी में दाखिला लिया. बाद में उन्होंने नॉर्थवेस्टर्न यूनिवर्सिटी से एमबीए की डिग्री हासिल की.

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म‍िडटर्म इलेक्‍शन में भारतीय मूल की प्रमिला जयपाल ने जीता चुनाव

Pramila Jayapal: अमेरिका की सत्ता में बैठे डोनाल्ड ट्रंप और उनके तीखे तेवरों को भारतीय मूल की एक दबंग नेता ने अमेरिकी जमीन पर ही तगड़ा झटका दे दिया है. ट्रंप लगातार अमेरिका में रहने वाले प्रवासियों और खासकर एच-1बी वीजा पर काम करने वाले भारतीयों के खिलाफ जिस तरह की बयानबाजी करते आए हैं और उन्हें देश से बाहर निकालने की धमकियां देते रहे हैं, उसके बीच भारतीय मूल की डेमोक्रेट सांसद प्रमिला जयपाल ने अपनी जीत से ट्रंप के मंसूबों को करारा जवाब दिया है. जयपाल ने अमेरिकी प्रतिनिधि सभा के चुनाव में एक बार फिर धमाकेदार जीत दर्ज कर अपनी सियासी ताकत का लोहा मनवा दिया है.

वॉशिंगटन राज्य के 7वें कांग्रेसनल जिले में प्रमिला जयपाल ने रिपब्लिकन उम्मीदवार नीरव शेठ को धूल चटाते हुए एकतरफा और बड़ी शिकस्त दी है. चुनावी नतीजों के शुरुआती आंकड़ों में जब करीब 54 फीसदी वोटों की गिनती हुई, तो जयपाल को अकेले लगभग 88 फीसदी वोट मिले, जबकि उनके विरोधी नीरव शेठ महज 12 फीसदी वोटों पर ही सिमटकर रह गए.

स्टूडेंट वीजा से प्रतिनिधि सभा तक सफर

इस शानदार जीत के साथ प्रमिला जयपाल एक बार फिर अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में कदम रखेंगी. खास बात यह है कि इस बार सदन में डेमोक्रेटिक पार्टी का नियंत्रण रहेगा, जिससे उनकी आवाज और भी ज्यादा बुलंद होगी. जयपाल अमेरिकी संसद के निचले सदन यानी प्रतिनिधि सभा के लिए चुनी जाने वाली पहली दक्षिण एशियाई अमेरिकी महिला हैं. इसके अलावा, वह अमेरिकी कांग्रेस की इकलौती ऐसी सदस्य भी हैं, जो कभी खुद स्टूडेंट वीजा और एच-1बी वर्क वीजा पर अमेरिका आई थीं और यहां संघर्ष कर इस मुकाम तक पहुंची हैं.

चुनाव की रात उन्होंने फ्लोरिडा से जीतने वाली पिया डंडिया का स्वागत करते हुए कहा कि वह अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में पहुंचने वाली तीसरी दक्षिण एशियाई-अमेरिकी महिला हैं. जयपाल ने इस संदर्भ में अपना और आयशा वहाब का भी उल्लेख किया.

प्रमिला जयपाल का जन्म भारत में हुआ था. उन्होंने अपना बचपन भारत, इंडोनेशिया और सिंगापुर में बिताया. 16 साल की उम्र में वह अकेले उच्च शिक्षा के लिए अमेरिका चली गईं और जॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी में दाखिला लिया. बाद में उन्होंने नॉर्थवेस्टर्न यूनिवर्सिटी से एमबीए की डिग्री हासिल की.

साल 2023 में एक बयान में उन्होंने भारत को -‘मेरा जन्मस्थान, जहां मेरे माता-पिता आज भी रहते हैं’ बताया था. उन्होंने कहा था कि वह लगभग तीन दशक तक भारत की नागरिक रहीं.

ट्रंप के इमिग्रेशन पॉलिसी का विरोधी

जयपाल ने अक्सर अपने प्रवासी जीवन के अनुभव का जिक्र करते हुए ट्रंप प्रशासन की कानूनी आव्रजन (लीगल इमिग्रेशन) को सीमित करने वाली नीतियों का विरोध किया है. उन्होंने एच-1बी वीजा शुल्क को एक लाख डॉलर तक बढ़ाने जैसे कदमों की भी आलोचना की.

दिसंबर 2025 में एक संसदीय सुनवाई के दौरान उन्होंने कहा था कि प्रशासन कानूनी आव्रजन के रास्ते बंद कर रहा है और यह भेदभावपूर्ण नीतियों की याद दिलाता है. उन्होंने भारतीय मूल के लोगों के खिलाफ बढ़ती नफरत की घटनाओं पर भी चिंता जताई थी. उसी सुनवाई में उन्होंने भारतीय उत्पादों पर लगाए गए टैरिफ की भी आलोचना की थी. उनका कहना था कि इससे भारत की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंच रहा है और अमेरिकी कारोबारियों तथा उपभोक्ताओं पर भी असर पड़ रहा है.

अप्रैल 2025 में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद जयपाल ने कहा था, “यह हिंसा पूरी तरह अस्वीकार्य है. मैं पहलगाम में हुए उस भयानक हमले की निंदा करती हूं, जिसमें निर्दोष लोगों की जान गई.”

रिपब्लिकन पार्टी के विरोधी के रूप में पहचान

रिकॉर्ड के अनुसार, जनवरी 2025 से सितंबर 2026 के बीच प्रतिनिधि सभा में हुई वोटिंग में उन्होंने लगभग 96 प्रतिशत मामलों में डेमोक्रेटिक पार्टी के बहुमत के साथ मतदान किया. इस दौरान वह कुछ मतदान सत्रों में अनुपस्थित भी रहीं, जिनमें ईरान, लेबनान और यूक्रेन से जुड़े कुछ प्रस्ताव शामिल थे.

जयपाल ने इस अवधि के दौरान रिपब्लिकन पार्टी के सभी प्रमुख आव्रजन विधेयकों का विरोध किया. उन्होंने 2026 और 2027 के रक्षा बजट विधेयकों, रिपब्लिकन मेल-मिलाप (रिकंसिलिएशन) बिल और जनवरी 2026 के खर्च पैकेज के खिलाफ भी वोट दिया.

मेडिकेयर फॉर ऑल एक्ट की प्रमुख प्रायोजक हैं जयपाल

वह पहले कांग्रेसनल प्रोग्रेसिव कॉकस की अध्यक्ष रह चुकी हैं और वर्तमान में उसकी मानद अध्यक्ष (चेयर एमेरिटा) हैं. इसके अलावा, वह कांग्रेसनल एशियन पैसिफिक अमेरिकन कॉकस की इमिग्रेशन टास्क फोर्स की अध्यक्ष हैं और विदेश मामलों की समिति की दक्षिण एवं मध्य एशिया उपसमिति तथा बजट समिति में भी सदस्य हैं.

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जयपाल कई महत्वपूर्ण विधेयकों से जुड़ी रही हैं. उनकी वेबसाइट के अनुसार, वह मेडिकेयर फॉर ऑल एक्ट की प्रमुख प्रायोजक हैं और कॉलेज फॉर ऑल एक्ट, अल्ट्रा-मिलियनेयर टैक्स एक्ट तथा डिग्निटी फॉर डिटेन्ड इमिग्रेंट्स एक्ट जैसी पहल की भी प्रमुख समर्थक रही हैं.

-भारत एक्सप्रेस



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