अमेरिकी मिडटर्म चुनावों के नतीजों ने अंतरराष्ट्रीय ऑयल मार्केट में भूचाल ला दिया है. चुनाव में ट्रंप की पार्टी को मिली हार के बाद वैश्विक स्तर पर crude oil price में भारी गिरावट दर्ज की गई है. इस राजनीतिक उलटफेर से ईरान युद्ध के जल्द थमने की उम्मीदें बढ़ गई हैं, जिसके चलते कच्चे तेल पर जबर्दस्त दबाव बना हुआ है.
अंतरराष्ट्रीय बाजार में बुधवार को crude oil price today में करीब 9% तक की ऐतिहासिक गिरावट देखने को मिली. वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड लुढ़ककर 88.27 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा था.
वहीं, प्रमुख बेंचमार्क brent crude भी 100 डॉलर के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे फिसलकर 94.62 डॉलर प्रति बैरल के आसपास आ गया है. इसमें एक ही दिन में भारी गिरावट दर्ज की गई है. कच्चे तेल की कीमतों में आई इस बड़ी गिरावट से भारत जैसे आयातक देशों के लिए पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने का खतरा फिलहाल टलता नजर आ रहा है, जिसे देश के लिए बहुत बड़ी राहत माना जा रहा है.
राजनीतिक बदलाव और ईरान युद्ध पर विराम की आस(Crude Oil Price)
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने स्वीकार किया है कि ईरान युद्ध और अमेरिका-इजरायल संबंधों से खफा मतदाताओं की नाराजगी ने चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी को बड़ा नुकसान पहुंचाया है. दूसरी ओर, सीनेट में डेमोक्रेटिक नेताओं ने इस संघर्ष को जल्द खत्म करने का वादा किया है, जो अब अपने नौवें महीने में पहुंच चुका है.
जानकारों का मानना है कि राजनीतिक समीकरण बदलने से फारस की खाड़ी से तेल का निर्यात सुचारू होने की उम्मीद है, जिससे oil prices में और नरमी आ सकती है.
ट्रंप के सुर बदले, तत्काल हमलों से इनकार
बीते अक्टूबर महीने में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से ईरान पर नए हमलों की धमकियों के बाद brent crude छह महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया था. हालांकि, मिडटर्म चुनाव के परिणामों और जनता के दबाव के बीच ट्रंप ने स्पष्ट किया कि फिलहाल ईरान पर हमले तेज करने की उनकी कोई योजना नहीं है. उन्होंने खुद माना कि युद्ध को लेकर जनता में उपजा असंतोष पार्टी की हार की एक बड़ी वजह बना.
सप्लाई सुधरने से कीमतों पर दबाव
भू-राजनीतिक मोर्चे पर अनिश्चितताओं के बावजूद मिडिल ईस्ट से crude oil का निर्यात एक बार फिर बढ़ा है, जिससे वैश्विक बाजार में कीमतों को नीचे लाने में मदद मिली है. हालांकि, रिफाइंड उत्पादों की सप्लाई और रूस की रिफाइनरियों पर यूक्रेन के बढ़ते हमलों जैसी वजहों से बाजार पर पूरी तरह से स्थिरता अभी दूर की कौड़ी, लेकिन इस ताजा गिरावट ने आम आदमी और वैश्विक अर्थव्यवस्था को बड़ी राहत जरूर दी है.
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-भारत एक्सप्रेस
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