भारत को वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण का प्रमुख केंद्र बनाने और विदेशी पुर्जों पर निर्भरता घटाने की दिशा में मोदी सरकार ने शुक्रवार को बड़ा कदम उठाया. इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के सचिव एस. कृष्णन ने जानकारी दी कि सरकार ने ‘इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स मैन्युफैक्चरिंग स्कीम’ (ECMS) के तहत 12 नए प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दे दी है. इन परियोजनाओं के माध्यम से देश में ₹7,500 करोड़ से अधिक का प्रत्यक्ष निवेश प्रस्तावित है.
वैल्यू चेन होगी मजबूत, कैपिटल गुड्स व कच्चे माल पर जोर
मंजूर की गई इन 12 नई परियोजनाओं में केवल बुनियादी इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स ही नहीं, बल्कि उससे जुड़ी महत्वपूर्ण सामग्री और कैपिटल गुड्स (विनिर्माण उपकरण) से संबंधित इकाइयां भी शामिल हैं. नीति निर्माता अब कंपोनेंट असेंबली के साथ-साथ कच्चे माल और उपकरणों जैसे अपस्ट्रीम क्षेत्रों को सुदृढ़ करने पर विशेष ध्यान दे रहे हैं. इसका सीधा उद्देश्य देश के भीतर ‘वैल्यू एडिशन’ (मूल्यवर्धन) को बढ़ाना और आपूर्ति श्रृंखला (सप्लाई चेन) को अधिक लचीला व आत्मनिर्भर बनाना है.
‘सेमीकॉन 2.0’ वेब पोर्टल का शुभारंभ, 2030 तक $500 अरब का लक्ष्य
इस रणनीतिक पहल के साथ ही सरकार ने शुक्रवार को सेमीकंडक्टर क्षेत्र को गति देने के लिए ‘सेमीकॉन इंडिया प्रोग्राम’ के अंतर्गत ‘सेमीकॉन 2.0’ वेब एप्लिकेशन पोर्टल भी लॉन्च किया. आधिकारिक फैक्टशीट के अनुसार, भारत ने वर्ष 2030 तक 500 अरब डॉलर का घरेलू इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण इकोसिस्टम विकसित करने और 150 अरब डॉलर का इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात हासिल करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया है.
उत्पादन में 7 गुना और निर्यात में 11 गुना की ऐतिहासिक छलांग
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, देश का इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन वित्त वर्ष 2014-15 के ₹1.9 लाख करोड़ से बढ़कर वित्त वर्ष 2025-26 में ₹13.11 लाख करोड़ के ऐतिहासिक स्तर पर पहुंच गया है. इसी अवधि के दौरान देश का इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात भी ₹38,000 करोड़ से उछलकर ₹4.24 लाख करोड़ दर्ज किया गया. आधुनिक अर्थव्यवस्था में स्मार्टफोन, ऑटोमोबाइल, डिफेंस, टेलीकॉम और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के बढ़ते दायरे को देखते हुए यह मजबूत घरेलू इकोसिस्टम देश की आर्थिक व रणनीतिक सुरक्षा का मजबूत आधार बनेगा.
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