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भूत या सच? मरी हुई महिला पहुंची कलेक्टर ऑफिस, बोली- ‘साहब, डॉक्टर बुलाकर जांच लो, मैं जिंदा हूं’

मध्य प्रदेश के दमोह जिले में एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जहां बिलाई गांव की बुजुर्ग महिला दीपारानी पटेल को सरकारी दस्तावेजों में मृत घोषित कर दिया गया था. इसके चलते उनकी पेंशन और राशन बंद हो गए थे.

Ajab Gajab Damoh Shocking Case Living Elderly Woman Reaches Collector Office After Being Declared Dead in Records

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Ajab Gajab: कल्पना कीजिए कि आप बिल्कुल भले-चंगे हैं, अपने घर पर रह रहे हैं, लेकिन अचानक एक दिन आपको पता चले कि सरकारी फाइलों और कंप्यूटर के रिकॉर्ड में आप इस दुनिया को अलविदा कह चुके हैं. सुनने में ये किसी बॉलीवुड फिल्म की अजीबोगरीब कहानी जैसा लगता है, लेकिन मध्य प्रदेश के दमोह जिले में एक बुजुर्ग महिला के साथ असल जिंदगी में ऐसा ही वाकया हो गया.

यहां के बिलाई गांव की रहने वाली एक वृद्ध महिला को सरकारी मुलाजिमों ने कागजों पर मृत घोषित कर दिया था. इसके बाद जो हुआ, उसने महिला की रोजमर्रा की जिंदगी को एक कड़े इम्तिहान में बदल दिया. पूरे एक साल तक दफ्तरों के चक्कर काटने के बाद जब बात नहीं बनी, तो वो खुद सीधे जिला कलेक्टर के सामने जा खड़ी हुई.

‘चाहें तो डॉक्टर बुला लें, पर मुझे जिंदा मान लें’

ये घटना दमोह जिला पंचायत के अंतर्गत आने वाले बिलाई गांव की रहने वाली दीपारानी पटेल की है. जनसुनवाई के दौरान जब दीपारानी कलेक्टर सुधीर कोचर के चैंबर में पहुंचीं, तो वहां मौजूद हर शख्स उन्हें देखकर सन्न रह गया.

बुजुर्ग महिला ने बेहद लाचारी और हिम्मत के मिले-जुले लहजे में कलेक्टर से कहा, ‘साहब, कृपया मेरी जांच करवा लीजिए, आप चाहें तो यहीं डॉक्टर बुलाकर चेक करवा लें… मैं भूत नहीं हूं, आपके सामने जीती-जागती खड़ी हूं. लेकिन आपके ये सरकारी कागज कह रहे हैं कि मैं मर चुकी हूं.’ महिला की ये बात और उनके हाथ में मौजूद ‘मौत का सरकारी ठप्पा’ देखकर खुद डीएम साहब भी एक पल के लिए हैरान रह गए.

साल भर काटा दफ्तरों का चक्कर

दरअसल, करीब एक साल पहले किसी लापरवाह सरकारी कर्मचारी की गलती की वजह से दीपारानी को रिकॉर्ड में मृत दर्ज कर दिया गया था. इंसान कागजों पर मरा तो सरकार की नजरों में उसका वजूद ही खत्म हो गया. नतीजा यह हुआ कि दीपारानी को मिलने वाली बुजुर्ग पेंशन, मुफ्त राशन और तमाम जरूरी सरकारी योजनाएं व सुविधाएं रातों-रात बंद कर दी गईं.

एक गरीब बुजुर्ग महिला के लिए यह किसी बड़ी आफत से कम नहीं था. उन्होंने अपनी फरियाद लेकर साल भर कई छोटे-बड़े दफ्तरों के दरवाजे खटखटाए, मिन्नतें कीं, लेकिन सिस्टम की सुस्ती के आगे उनकी आवाज दब गई. आखिर में हार मानकर उन्होंने सीधे जिले के मुखिया यानी कलेक्टर से मिलने का फैसला किया.

दोषियों पर गिरेगी गाज

कलेक्टर सुधीर कोचर ने बुजुर्ग महिला की पूरी बात को बेहद संवेदनशीलता से सुना. उन्होंने तुरंत उन्हें सम्मान से बिठाया और बिना वक्त गंवाए संबंधित विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों को तलब कर लिया. कलेक्टर के कड़े निर्देश के बाद मौके पर ही सरकारी रिकॉर्ड को सुधारा गया और जो महिला हकीकत में जिंदा थीं, उन्हें कागजों में भी दोबारा ‘जीवित’ घोषित कर दिया गया. उनकी रुकी हुई तमाम सुविधाएं भी बहाल करने के आदेश दिए गए.

कलेक्टर सुधीर कोचर ने इस मामले पर सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि महिला का रिकॉर्ड तो ठीक कर दिया गया है, लेकिन जीती-जागती महिला को कागजों पर मारने वाले दोषी कर्मचारियों और अधिकारियों को कतई बख्शा नहीं जाएगा. उनके निलंबन (सस्पेंशन) की कार्रवाई शुरू कर दी गई है ताकि भविष्य में कोई भी कर्मचारी ऐसी गंभीर लापरवाही करने की जुर्रत न कर सके.

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-भारत एक्सप्रेस



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