कांच के पिंजरे का कैदी
Ajab Gajab News: कल्पना कीजिए एक ऐसी जेल की कोठरी की, जहां कोई दीवारें नहीं बल्कि चारों तरफ मजबूत कंक्रीट और बुलेटप्रूफ कांच हो. एक ऐसा कैदी, जो दिन के पूरे 23 घंटे उसी कांच के पिंजरे में अकेले काटता हो और जिससे मिलने या बात करने वाला भी कोई न हो. सुनने में यह किसी हॉलीवुड थ्रिलर फिल्म की कहानी जैसा लगता है, लेकिन ब्रिटेन की एक जेल में यह खौफनाक हकीकत पिछले पांच दशकों से ज्यादा समय से जिंदा है.
ब्रिटेन का सबसे खतरनाक कैदी
यह कहानी है रॉबर्ट मौड्सली नाम के कैदी की, जिसे ब्रिटेन के इतिहास के सबसे खतरनाक और खूंखार कैदियों में गिना जाता है. मौड्सली साल 1974 से लगातार सलाखों के पीछे है. हैरानी की बात यह है कि उसने अपनी चार में से तीन हत्याएं जेल के अंदर ही की हैं. पहली बार उसने 1974 में लंदन में एक शख्स की हत्या की थी, जिसके बाद उसे मानसिक रूप से अस्थिर मानकर एक हाई-सिक्योरिटी अस्पताल भेज दिया गया था. लेकिन असली खौफनाक खेल तो इसके बाद शुरू हुआ.
जेल के अंदर ही ले ली तीन कैदियों की जान
अस्पताल और फिर जेल में शिफ्ट होने के बावजूद मौड्सली का खूनखराबा नहीं रुका. साल 1977 में उसने अस्पताल के अंदर ही एक साथी कैदी की हत्या कर दी. इसके बाद जब उसे वेकफील्ड जेल भेजा गया, तो साल 1978 में उसने एक ही दोपहर में दो और कैदियों को मौत के घाट उतार दिया. जिन लोगों को उसने निशाना बनाया, वे सभी संगीन अपराधों और बच्चों के यौन शोषण के मामलों में सजा काट रहे थे. इन वारदातों के बाद जेल प्रशासन के होश उड़ गए और उन्हें समझ आ गया कि यह शख्स सलाखों के पीछे भी बाकी कैदियों के लिए एक बड़ा खतरा है.
हनिबल लेक्टर जैसी ‘कांच की कोठरी’
मौड्सली की इस खतरनाक फितरत को देखते हुए 1983 में जेल के तहखाने में उसके लिए एक बेहद खास और अनोखी सेल बनाई गई. कंक्रीट और बुलेटप्रूफ कांच से बने इस पिंजरे को हॉलीवुड फिल्म ‘द साइलेंस ऑफ द लैम्ब्स’ के मशहूर किरदार हनिबल लेक्टर की कोठरी से तुलना किया जाता है. पिछले करीब 17,500 दिनों से वह इसी एकांत कैद में जी रहा है. हालात यह हैं कि उसके पैर के नाखून काटने तक के लिए जेलकर्मियों को भारी सुरक्षा के बीच छोटे से रास्ते का इस्तेमाल करना पड़ता है.
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आज भी नहीं है पछतावा
इतनी लंबी सजा काटने के बाद भी मौड्सली के तेवर नरम नहीं हुए हैं. साल 2000 में उसने अदालत से गुहार लगाई थी कि उसे या तो मरने दिया जाए या उसकी कैद के हालात सुधारे जाएं, लेकिन उसकी अपील खारिज हो गई. हाल ही में एक इंटरव्यू में उसने खुद यह माना कि अगर उसे आज भी किसी ऐसे अपराधी से आमना-सामना करने का मौका मिले, तो वह उसे बख्शेगा नहीं. कुल मिलाकर, यह कहानी इंसानी दिमाग के उस अंधेरे कोने की है, जिसे समाज से हमेशा के लिए अलग कर दिया गया है.
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-भारत एक्सप्रेस
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