Bharat Express DD Free Dish

‘ये बिहार है भईया, यहां सब मुमकिन है…’  फ्रैक्चर पैर में गत्ता चिपकाकर मरीज को किया रेफर; देखें VIDEO

Begusarai Unique Case: बिहार के बेगूसराय से स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खोलता एक अजब-गजब मामला सामने आया है. सड़क हादसे में घायल युवक के टूटे पैर पर डॉक्टरों ने प्लास्टर की जगह कार्टून का गत्ता बांध दिया. सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद सिविल सर्जन ने जांच के आदेश दिए हैं.

Fracture leg cardboard plaster

Begusarai Unique Case: मेडिकल साइंस की दुनिया में इलाज के नए-नए तरीके आपने सुने होंगे, लेकिन बिहार के बेगूसराय से ‘अजब अस्पताल के गजब इलाज’ का ऐसा कारनामा सामने आया है, जिसे देखकर आप भी माथा पकड़ लेंगे. यहां एक सड़क हादसे में घायल युवक के टूटे पैर पर प्लास्टर ऑफ पेरिस लगाने के बजाय डॉक्टरों ने गत्ते का टुकड़ा (कार्टून) लपेट दिया और पल्ला झाड़कर हायर सेंटर रेफर कर दिया!

बेगूसराय के मंझौल अस्पताल में बाइक हादसे में घायल कुणाल कुमार के फ्रैक्चर पैर पर प्लास्टर की जगह गत्ता बांधकर रेफर करने का वीडियो वायरल हुआ है. अस्पताल प्रशासन ने इसे कर्मचारियों की कमी और आपातकालीन ‘इमोबिलाइजेशन’ प्रक्रिया बताकर बचाव किया है, जबकि सिविल सर्जन ने जांच के आदेश जारी किए हैं.

हादसे के बाद अस्पताल पहुंचा था युवक

मामला बेगूसराय के मंझौल अनुमंडलीय अस्पताल का है. नावकोठी थाना क्षेत्र के महेशवाड़ा गांव का रहने वाला कुणाल कुमार बाइक से जाते वक्त हर साइन पुल के पास सड़क हादसे का शिकार हो गया. हादसे में उसके पैर में गंभीर फ्रैक्चर आ गया. स्थानीय लोगों और परिजनों ने आनन-फानन में उसे मंझौल अस्पताल में भर्ती कराया ताकि समय पर सही डॉक्टरी इलाज मिल सके.

प्लास्टर की जगह गत्ता बांधकर किया रेफर (Fracture leg cardboard plaster)

अस्पताल पहुंचने पर परिजनों को उम्मीद थी कि युवक को उचित चिकित्सकीय सहायता मिलेगी. लेकिन वहां मौजूद स्टाफ ने पैर पर प्लास्टर ऑफ पेरिस लगाने के बजाय रुई और गत्ते का टुकड़ा बांध दिया. इसके बाद मरीज को सदर अस्पताल बेगूसराय के लिए रेफर कर दिया गया. वहां मौजूद परिजनों ने इस अनोखे ‘अस्पताली जुगाड़’ का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया, जिसके बाद बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था कटघरे में खड़ी हो गई.

प्रशासन की सफाई और मेडिकल साइंस का तर्क (Begusarai Manjhaul hospital)

मामला तूल पकड़ते ही मंझौल अस्पताल के प्रभारी चिकित्सा अधिकारी ने सफाई दी कि अस्पताल में ऑर्थोपेडिक डॉक्टर और ड्रेसर उपलब्ध नहीं थे. उन्होंने यह भी कहा कि मेडिकल साइंस में मरीज की स्थिति संभालने (इमोबिलाइजेशन) के लिए अस्थायी तौर पर ऐसा करना गलत नहीं है. वहीं, जिला सिविल सर्जन ने अस्पताल में कर्मचारियों की कमी की बात स्वीकार करते हुए मामले की जांच और कार्रवाई का भरोसा दिलाया है.

यह भी पढ़ें-चीन में क्या हो रहा है? जोरदार धमाके और हथियार के साथ मैदान में उतरे टूरिस्ट

-भारत एक्सप्रेस



इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

Also Read