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चीन में क्या हो रहा है? जोरदार धमाके और हथियार के साथ मैदान में उतरे टूरिस्ट

चीन के गुइझोउ प्रांत में इन दिनों एक अजीबोगरीब नजारा देखने को मिल रहा है, जहां हजारों लोग वीकेंड पर 1935 के ऐतिहासिक युद्ध के मैदान पर पहुंचकर जंग को लाइव महसूस कर रहे हैं. लाल सेना की ड्रेस पहने छोटे बच्चों का नकली हथियारों के साथ युद्ध के मैदान में उतरना सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया है.

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China Red Tourism: आजकल चीन में घूमने-फिरने का तरीका बिल्कुल बदल चुका है. वहां के पहाड़ों और ऐतिहासिक जगहों पर आजकल लोग सिर्फ आम छुट्टियां बिताने नहीं जा रहे बल्कि इतिहास को अपनी आंखों से जीते हुए नजर आ रहे हैं. हाल ही में गुइझोउ प्रांत के एक पहाड़ी इलाके में कुछ ऐसा देखने को मिला जिसने सोशल मीडिया पर चर्चा तेज कर दी है. वीकेंड पर एक हजार से ज्यादा लोग एक ऐतिहासिक जंग के मैदान पर पहुंचे और 1935 के दौर की उस ऐतिहासिक लड़ाई को महसूस किया जिसने चीन के इतिहास को बदला था.

लाल सेना के लिबास में बच्चे

इस अनोखे टूरिज्म का अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि वहां महज पांच साल तक के छोटे-छोटे बच्चे भी लाल सेना यानी रेड आर्मी की ड्रेस पहने नजर आए. उनके हाथों में खिलौने वाले हथियार थे और वे जोर-जोर से चिल्लाते हुए पहाड़ियों की तरफ भाग रहे थे. उनका मकसद उन मोर्चों पर कब्जा करना था जहां कभी राष्ट्रवादी च्यांग काई-शेख की सेना हुआ करती थी.

इस दौरान बच्चों के कदमों के पास नकली बम फोड़े जा रहे थे जिनसे तेज धुआं उठ रहा था और माहौल एकदम किसी असली जंग के मैदान जैसा लग रहा था. अपनी इस जीत के बाद इन बच्चों ने गर्व से लाल झंडे लहराए.

क्या है ‘रेड टूरिज्म’ का यह क्रेज?

दरअसल यह सब चीन की सरकार के उस लंबे समय से चले आ रहे प्लान का हिस्सा है जिसे ‘रेड टूरिज्म’ कहा जाता है. इसके जरिए लोगों को देश के कम्युनिस्ट इतिहास से जुड़ी जरूरी जगहों पर बुलाया जाता है ताकि वे अपनी पुरानी संस्कृति और इतिहास को करीब से जान सकें. 1935 में माओ त्से तुंग के नेतृत्व वाली कम्युनिस्ट सेना ने इसी लुशान पास पर राष्ट्रवादियों को मात दी थी. यह रेड आर्मी की पहली बड़ी जीत थी जिसे माओ ने अपनी एक कविता में भी अमर कर दिया था.

वहां घूमने आए जियांग जुन नाम के एक 40 साल के टूरिस्ट ने बताया कि यह अनुभव दिल दहला देने वाला और रोंगटे खड़े कर देने वाला था. उन्हें ऐसा लगा मानो वे सचमुच उस भयानक युद्ध के बीचों-बीच खड़े हों और उन शहीदों के दर्द को महसूस कर पा रहे हों.

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-भारत एक्सप्रेस



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