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50 की उम्र में छोड़ी CEO की कुर्सी… जानिए विक्स बेचने वाले गुरुचरण दास के ‘ग्लोबल अवॉर्ड’ जीतने की कहानी

Gurucharan Das Story: विक्स वापोरब बेचने वाले एक साधारण युवक से P&G इंडिया के CEO और फिर एक प्रसिद्ध लेखक बनने तक, गुरुचरण दास की जीवन यात्रा स्वतंत्रता, जोखिम और अपने सिद्धांतों पर जीने की एक अद्भुत मिसाल है.

P&G India CEO
Edited by Shubhra Rai

Gurucharan Das Story: गुरुचरण दास का जीवन भारतीय सफलता, व्यक्तिगत स्वतंत्रता और साहस का एक उत्कृष्ट उदाहरण है. कॉर्पोरेट दुनिया के सर्वोच्च शिखर पर पहुँचने के बाद भी अपने सपनों के लिए करियर बदलने वाले गुरुचरण दास ने सिद्ध किया कि वास्तविक सफलता अपने सिद्धांतों पर टिके रहने और जोखिम उठाने में है.

गुरुचरण दास की कहानी विक्स बेचने से शुरू होकर P&G इंडिया के CEO बनने, 50 की उम्र में लेखन चुनने और 82 की उम्र में ‘लाइफटाइम लिबर्टरियन अवॉर्ड’ जीतने वाले पहले भारतीय बनने तक की है. यह यात्रा साबित करती है कि जीवन में असली सफलता पद या वेतन से नहीं, बल्कि अपने जीवन के मूल्यों और सही निर्णयों के लिए जोखिम उठाने से मिलती है.

गुरुचरण दास की जीवन यात्रा (Lifetime Libertarian Award)

17 वर्ष की उम्र में स्कॉलरशिप मिलने के बाद गुरुचरण दास पढ़ाई के लिए हार्वर्ड गए. पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने अखबार में एक विज्ञापन देखकर ‘रिचर्डसन हिंदुस्तान’ में नौकरी की शुरुआत की. अपने शुरुआती दिनों में उन्होंने भारत के ग्रामीण और धूल भरे बाजारों में घूम-घूमकर ‘विक्स वापोरब’ बेचा. यही वह दौर था जिसने उन्हें भारतीय व्यापार और बाजार की ज़मीनी हकीकत से रूबरू कराया.

अपनी मेहनत और दूरदर्शिता के बल पर वे आगे बढ़ते गए और अंततः P&G इंडिया के CEO बने. इसके बाद उन्होंने दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया में कंपनी का नेतृत्व किया और वैश्विक रणनीतिक नियोजन में अहम भूमिका निभाई. इस शानदार कॉर्पोरेट करियर के साथ-साथ लेखन हमेशा उनकी सांसों में बसा रहा और वे 25 वर्षों तक हर वीकेंड पर लिखते रहे.

50 वर्ष की आयु में, जब लोग करियर के सुरक्षित पड़ाव का आनंद लेते हैं, गुरुचरण दास ने कॉर्पोरेट दुनिया को छोड़कर पूर्णकालिक लेखक बनने का साहसिक फैसला किया. अगले तीन दशकों में उन्होंने ‘India Unbound’ और ‘The Difficulty of Being Good’ जैसी कालजयी पुस्तकें लिखीं, जिनमें स्वतंत्रता, उद्यमिता और नैतिक मूल्यों की गहरी छाप दिखती है.

82 वर्ष की आयु में गुरुचरण दास को प्रतिष्ठित ‘लाइफटाइम लिबर्टरियन अवॉर्ड’ से सम्मानित किया गया. यह सम्मान पाने वाले वे पहले भारतीय हैं. पुरस्कार स्वीकार करते हुए उन्होंने कहा, ‘जीवन आपको उस चीज़ के लिए कितनी बार पुरस्कृत करता है जिसे आप अपनी आत्मा से सही मानते हैं?’ उनका यह सफर हर उस व्यक्ति के लिए प्रेरणा है जो अपने सपनों पर विश्वास करता है.

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-भारत एक्सप्रेस



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