उपेन्द्र राय, सीएमडी / एडिटर-इन-चीफ, भारत एक्सप्रेस
भारत एक्सप्रेस
अयोध्या में पीएम का ऐतिहासिक संबोधन: भारत और इसकी सभ्यता के लिए एक नया युग
पीएम का संबोधन न केवल लंबे समय से प्रतीक्षित राम मंदिर निर्माण का उत्सव था, बल्कि उनकी राजनीतिक विचारधारा और दर्शन का प्रतिबिंब भी था।
2023 में पीएम मोदी ने कैसे जीती कूटनीतिक बाजी?
पीएम मोदी की कूटनीतिक पहुंच लोकतांत्रिक दुनिया तक सीमित नहीं रही। उन्होंने वैश्विक मुद्दों पर चर्चा करने और नई पहल शुरू करने के लिए ब्रिक्स के नेताओं से हाथ मिलाया। जटिल और गतिशील भू-राजनीतिक परिदृश्य से सफलतापूर्वक पार पाया।
भारत के उज्ज्वल दशक का मार्ग प्रशस्त कर रहे हैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
जैसे-जैसे भारत अपनी नियति के चौराहे पर खड़ा है, नेतृत्व का चुनाव महत्वपूर्ण हो जाता है। भारतीय राजनीति के अस्थिर और ध्रुवीकरण परिदृश्य में, एक नेता अटूट संकल्प, दूरदर्शी सोच और समावेशी विकास के प्रति प्रतिबद्धता के प्रतीक के रूप में उभरे हैं- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
गौतम अडानी ने संकट को कैसे अवसर में बदला
हिंडनबर्ग की रिपोर्ट के बाद आई गिरावट के बाद अडानी के शेयर दस महीनों के भीतर जोरदार वापसी करते हुए 7 दिसंबर 2023 को 15.14 लाख करोड़ के मार्केट कैप तक पहुंच गए। यह उछाल बीते 52-सप्ताह में 46% से अधिक रहा।
मोदी की गारंटी विपक्ष के लिए खतरे की घंटी
तीनों राज्यों में स्पष्ट बहुमत के साथ मिली जीत में कई स्थानीय कारणों की भी हिस्सेदारी है, लेकिन इसका केन्द्रीय तत्व निश्चित ही प्रधानमंत्री की लोकप्रियता और उनके प्रति मतदाताओं का अटूट विश्वास है।
इन 4 कारणों से नई ऊंचाइयों पर पहुंचा अडानी ग्रुप का मार्केट कैप
अडानी ग्रुप का बाजार पूंजीकरण गुरुवार, 7 दिसंबर को 7-7 प्रतिशत बढ़कर 15.14 लाख करोड़ हो गया. शुक्रवार को शेयर मार्केट बंद होने पर ग्रुप का मार्केट कैप 11.02 लाख करोड़ था.
‘आकांक्षाओं को पूरा करने पर ध्यान दें, PM मोदी को बदनाम करने पर नही’, विधानसभा चुनाव नतीजों में वोटर्स का राहुल को सबक
मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में आए चुनाव परिणाम इस बात की ओर संकेत देते हैं कि विपक्ष को केवल पीएम मोदी का विरोध करने पर सफलता मिलना बेहद मुश्किल है.
स्वार्थ का संग्राम, दुनिया करे त्राहिमाम
भारत, पश्चिम एशिया और यूरोप के बीच व्यापार को बढ़ावा देने के लिए भारत की अध्यक्षता में जी-20 के देशों ने इंडिया मिडिल ईस्ट इकॉनमिक कॉरिडोर की पहल की है।
प्रदूषण पर चर्चा नहीं एक्शन चाहिए, नहीं जागे तो पछताएंगे
वायु प्रदूषण के कारण एक नहीं, अनेक हैं। सिर्फ किसान नहीं, उद्योग-धंधे और हमारे जीवन-स्तर में आया बदलाव इसके लिए जिम्मेदार हैं।
इजरायल-हमास जंग: भारत क्यों रहे सावधान?
इजरायल-हमास के नाम पर संघर्ष आगे बढ़ने पर यह तय दिखता है कि भारत या तो तटस्थ रहेगा या फिर इजरायल के खिलाफ खड़ा नहीं होगा।





