उपेन्द्र राय, सीएमडी / एडिटर-इन-चीफ, भारत एक्सप्रेस
भारत एक्सप्रेस
आतंक का ‘खजाना’ अनंत
हर बीते दिन के साथ व्यापक हो रहे इजरायल-हमास युद्ध में एक तरफ इजरायल के साथ पश्चिम देश और अमेरिका हैं, तो दूसरी तरफ हमास के हमदर्द ज्यादातर इस्लामिक देश, रूस और चीन हैं।
युद्ध की बेदर्द चाहत, अर्थव्यवस्था पर आफत
सवाल यही है कि क्या जंग की आग में वैश्विक अर्थव्यवस्था की चिता भी जलने वाली है? विश्व बैंक ने तो खतरनाक मंदी के संभावित खतरे का अलर्ट भी जारी कर दिया है।
इजरायल-हमास युद्ध की रक्तपात युक्त राजनीति
सवाल ये है कि अरब देश हमास को कितनी मदद कर पाएंगे? दूसरा ये कि क्या वे खुद इजरायल-अमेरिका-यूरोपीय यूनियन की तिकड़ी से बच पाएंगे?
गाजा में कराहती मानवता
बेशक ये सारी आपत्तियां महत्वपूर्ण हैं और इन्हें बिल्कुल भी नजरंदाज नहीं किया जा सकता। लेकिन इस वक्त इससे ज्यादा जरूरी यह है कि उन लाखों जिंदगियों को बचाया जाए जो किसी और की गलती की सजा भुगत रही हैं।
युद्ध के शोर में शांति का उद्घोष
पिछले कुछ समय से हमारी विदेश नीति का कमाल रहा है कि हम ईरान, अरब देशों और इजरायल के साथ एक साथ दोस्ताना रिश्ते निभा रहे हैं।
पांच राज्यों में चुनाव, आरक्षण और हिंदुत्व पर दांव?
पांच राज्यों के चुनाव और फिर लोकसभा चुनाव से पहले विपक्ष ने जातीय जनगणना का मुद्दा उठाकर एनडीए को बैकफुट पर लाने की कोशिश की है।
मानवता पर वज्रपात, सिर्फ कठपुतली है हमास
यह बात साफ है कि हमास के हमले से फिलिस्तीनियों का संघर्ष कमजोर हो गया है। अपनी जमीन हासिल करने और आजादी एवं संप्रभुता का उनका लक्ष्य इस बर्बर घटना के बाद कोसों दूर चला गया है।
गैंग्स ऑफ पाकनाडा!
आतंकवाद पर नकेल कसने की रट लगाने में कनाडा को भी पाकिस्तान से अलग रखकर नहीं देखा जा सकता। निज्जर हो या पंजवड़, आतंकी वारदातों को लेकर दोनों भारत में वांछित थे।
फिर गरमाई मंडल बनाम कमंडल की सियासत
पिछली बार जब लालू प्रसाद यादव बिहार के मुख्यमंत्री थे, तब जातीय राजनीति की लहर ने बीजेपी ब्रांड के हिंदू ध्रुवीकरण को सफलतापूर्वक चुनौती दी थी।
बिहार में जातिगत जनगणना के आंकड़ों पर पीएम मोदी के दावे को मजबूत करती हैं ये तीन बातें
पीएम मोदी ने दावा किया कि विपक्ष गरीबों की भावनाओं से खेलने और समाज को जात-पात के नाम पर बांटने में 6 दशक बर्बाद कर दिए.





