भारत और पाकिस्तान को एक साथ मिली आजादी, लेकिन इन वजहों से PAK 14 अगस्त को मनाने लगा स्वतंत्रता दिवस
भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम 1947 के अनुसार, ‘15 अगस्त, 1947 से भारत में दो स्वतंत्र राष्ट्र स्थापित किए जाएंगे, जिन्हें क्रमशः भारत और पाकिस्तान के नाम से जाना जाएगा.’
जानें कौन हैं वो प्रधानमंत्री जिन्होंने सबसे अधिक बार लाल किले पर फहराया झंडा? पीएम मोदी इस बार रचेंगे इतिहास
इस बार गरीब वर्ग के साथ ही महिला, किसान, युवा सहित 4 हजार से अधिक लोगों को विशेष रूप से आमंत्रण भेजा गया है.
बंटवारे के वक्त टॉस जीतकर भारत ने अपने नाम कर ली थी ये शानदार चीज…जानें पाकिस्तान को मिले थे कितने करोड़?
मातृ भूमि के लिए मर मिटने के जज्बे ने अंग्रेजों के पांव उखाड़ दिए थे और उन्हें भारत देश छोड़ने को मजबूर होना पड़ा था.
कौन थीं भीकाजी कामा, जिन्होंने आजादी से बहुत पहले 1907 में विदेशी धरती पर लहराया था भारतीय ध्वज
‘भारतीय क्रांति की जननी’ के रूप में ख्याति अर्जित करने वाली भीकाजी कामा ने ब्रिटेन के अलावा अमेरिका और जर्मनी की अपनी यात्रा के दौरान भारत की स्वतंत्रता के लिए अभियान चलाया था.
Shah Alam II कौन थे, जिन्होंने आज ही के दिन ईस्ट इंडिया कंपनी को ‘सौंप’ दिया था बंगाल, अंग्रेज वसूलने लगे टैक्स
Treaty of Allahabad : सन् 1765 में ईस्ट इंडिया कंपनी को बंगाल का नियंत्रण मिलना भारत में मुगल साम्राज्य और ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन के इतिहास में एक महत्वपूर्ण घटना थी. यह निर्णय मुख्य रूप से बक्सर की लड़ाई में देशी शासकों की हार के कारण लेना पड़ा.
पिंगली वेंकैया: तिरंगे के रचयिता को ही राष्ट्रध्वज नसीब न हुआ!
कांग्रेस के एक अधिवेशन के पिंगली वेंकैया ने राष्ट्रध्वज की आवश्यकता पर बल दिया था. उनका यह विचार महात्मा गांधी को बहुत पसंद आया. उन्होंने उन्हें राष्ट्रीय ध्वज का प्रारूप तैयार करने का सुझाव दिया था.
Independence Day 2024: अंग्रेजी हुकूमत की नाक में कर दिया था दम, 18 साल की उम्र में दी गई फांसी, पढ़ें खुदीराम बोस से जुड़ी ये घटनाएं
फांसी के समय खुदीराम की उम्र 18 साल, 8 महीने और 8 दिन थी. उनकी शहादत ने देश को झकझोर कर रख दिया. देश के लिए मर मिटने के उनके जज्बे ने कइयों को प्रेरित किया.
काकोरी कांड के 100 साल, जब क्रांतिकारियों ने अंग्रेजी हुकूमत का लूट लिया था खजाना
अंग्रेजी हुकूमत से लोहा लेते हुए साल 1925 में क्रांतिकारियों ने ट्रेन से ले जाए जा रहे उनके खजाने को लूट लिया था. इस लूटकांड को काकोरी के पास अंजाम दिया गया था.
जानें रविंद्रनाथ टैगोर ने अंग्रेजों को क्यों लौटा दी थी ‘नाइटहुड’ की उपाधि
नोबेल पुरस्कार विजेता रवींद्रनाथ टैगोर 20वीं सदी के शुरुआत में बंगाल और पूरे भारत में एक प्रमुख लेखक, कवि और कलाकार के साथ-साथ दुनिया भर में लाखों लोगों के लिए प्रेरणास्रोत रहे हैं.
भारत छोड़ो आंदोलन: 1942 में आज ही के दिन महात्मा गांधी ने दिया था ‘करो या मरो’ का नारा
महात्मा गांधी ने अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के बॉम्बे अधिवेशन में ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ को नई दिशा दी. इस आंदोलन ने ही देशवासियों को ब्रिटिश शासन के खिलाफ जुटने के लिए प्रेरित किया.





