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Bharat Express Bihar Conclave: राजनीति में जाने को लेकर क्या बोले सुपर 30 कोचिंग वाले गुरु जी?

बिहार के पूर्व डीजीपी अभयानंद ने भारत एक्सप्रेस के मंच से समाज सुधार, नई सोच वाली पुलिसिंग और राजनीति में जाने के अपने विचार साझा किए. उन्होंने कहा कि समाज की समस्याओं का निदान केवल राजनीति में नहीं है और अपने कर्मों से बदलाव लाना जरूरी है.

Bharat Express Bihar Conclave

Bharat Express Bihar Conclave: बिहार में आगामी विधानसभा चुनाव 2025 को लेकर काउनडाउन शुरु हो गया है. इस बीच भारत एक्सप्रेस का मेगा कॉन्क्लेव ‘नये भारत की बात, बिहार के साथ’ आज शुरू हो गया है. भारत एक्सप्रेस के मंच पर बिहार के पूर्व डीजीपी और शिक्षाविद अभयानंद पहुंचे, जिनको गुरु जी के नाम से भी जाना जाता है. उन्होंने कई मुद्दों पर अपनी बात रखी. आइए बताते हैं उन्होंने क्या कुछ कहा?

आपको बता दें कि बिहार के पूर्व डीजीपी अभयानंद जी केवल पुलिस अधिकारी नहीं गुरुजी भी हैं. ये बच्चों को आईआईटी की तैयारी कराते हैं. वह भी मुफ्त में कराते हैं. जब उनसे पूछा गया कि डीजीपी के तौर पर उन्हें ज्यादा फायदा मिला या गुरु जी के तौर पर, तो उन्होंने कहा कि जब मैं पुलिस में था तब एक थॉट बहुत दिन से मेरे मन में चल रहा था. सडनली नई सोच वाली पुलिसिंग का अस्तित्व फ्लैश में आया. तब मैं नालंदा में था.

पुलिस अधिकारी को तौर पर मैंने इस पुलिसिंग को ट्राई किया. तब मैंने पाया की बहुत बढ़िया रिजल्ट आया है. अब जो दूसरा ऑफिसर है, जो उसी पद पर आया है वह भी उसे ट्राई करेगा, लेकिन उसका अपना तरीका हो सकता है. वह नया मेथड भी ट्राई कर सकता है. समाज में ऐसा लगातार चलता रहता है. यह निरंतर प्रवाह है. बस आप अपना कर्म करते चलें.

Bharat Express Bihar Conclave

राजनीति में जाने को लेकर बोले पूर्व डीजीपी

बिहार में कुछ ही दिनों में विधानसभा के चुनाव होने हैं. इससे पहले पूर्व डीजीपी अभयानंद ने सियासी दलों के ऑफर और राजनीति में जाने के प्रेशर को लेकर बेबाकी से अपनी बात रखी. उन्होंने कहा कि मैंने यही समझा है कि समाज की समस्याओं का निदान राजनीति में नहीं है. इसलिए उसे रास्ते क्यों जाना. पॉलीटिकल एक्टिविटीज में क्यों जाना.

कौन हैं बिहार के पूर्व डीजीपी अभयानंद?

आपको बता दें कि बिहार के पूर्व डीजीपी अभयानंद 1977 बैच के एक भारतीय पुलिस सेवा अधिकारी रह चुके हैं, जो अपनी नई सोच वाली पुलिसिंग के लिए जाने जाते थे. उन्होंने समाज के पिछले तबके के बच्चों को आईआईटी जैसी बड़ी परीक्षाओं की तैयारी में मदद करने वाले सुपर-30 कोचिंग संस्थान की स्थापना में भी अहम भूमिका निभाई थी. साथ ही उन्होंने अपने पिता की तरह 2011-12 में बिहार के डीजीपी बने. पिता-पुत्र की एकमात्र ये जोड़ी है जिसने बिहार में डीजीपी तक का सफर तय किया.

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-भारत एक्सप्रेस 



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