‘प्रख्यात गल्पकार’ ब्रिटिश काल से लेकर स्वतंत्र भारत तक के प्रमुख इतिहासकारों द्वारा भारतीय इतिहास की व्याख्या में किए गए कथित तोड़-मरोड़, छेड़छाड़ और आधा सच परोसने का विश्लेषण करती है. शीर्षक ‘प्रख्यात गल्पकार’ (Eminent Distorians) बहुत सटीक और व्यंग्यात्मक है: जहां ‘Distorians’ शब्द ‘Historians’ और ‘Distort’ (तोड़ना-मरोड़ना) का मिलाप है.
पुस्तक मुख्य रूप से उन प्रसिद्ध इतिहासकारों की पड़ताल करती है जिन्होंने औपनिवेशिक काल की सोच को आगे बढ़ाया और स्वतंत्र भारत में भी वामपंथी-नेहरूवादी इतिहास-लेखन को स्थापित किया.
किन मुद्दों पर चर्चा?
उतपल कुमार सरल, तथ्यपूर्ण और आक्रामक शैली में लिखते हैं. पुस्तक में वे निम्नलिखित मुद्दों पर गहराई से चर्चा करते हैं:
- औपनिवेशिक इतिहास-लेखन की विरासत: कैसे ब्रिटिश इतिहासकारों ने भारतीय सभ्यता को नीचा दिखाने के लिए ‘आर्यन इनवेजन थ्योरी’ जैसी अवधारणाओं को बढ़ावा दिया.
- आधुनिक भारतीय इतिहासकारों की आलोचना: रोमिला थापर, इरफान हबीब, बिपिन चंद्रा, आर.एस. शर्मा आदि जैसे प्रमुख इतिहासकारों के कार्यों में चयनात्मक तथ्यों, छुपाए गए पहलुओं और वैचारिक पूर्वाग्रहों की पड़ताल.
- अशोक का मिथक: नेहरूवादी इतिहास में अशोक को ‘महान’ बनाने की प्रवृत्ति की समीक्षा.
- भारत का स्वर्ण युग: गुप्त काल के अलावा कर्कोट, गुर्जर-प्रतिहार, पल्लव, चोल, अहोम आदि राजवंशों की उपेक्षित उपलब्धियों पर प्रकाश.
- मध्यकालीन इतिहास: मुगल, खिलजी, तुगलक काल की घटनाओं की प्रामाणिक व्याख्या.
- स्वतंत्रता संग्राम और विभाजन: गांधी, नेहरू और सावरकर जैसे व्यक्तित्वों के चित्रण में आए विकृतियों का विश्लेषण.
पुस्तक का मुख्य उद्देश्य
पाठक को ‘आधिकारिक इतिहास’ के परे जाकर सोचने के लिए प्रेरित करना और भारत की अपनी सभ्यतागत दृष्टि (Bharat’s own lens) से इतिहास देखने की वकालत करना.
ये पुस्तक वर्तमान समय की ‘इतिहास-वार’ (History Wars) का हिस्सा है. जब भारत अपनी सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत को पुनः खोज रहा है, तब ‘प्रख्यात गल्पकार’ उन युवाओं और पाठकों के लिए उपयोगी है जो स्कूल की किताबों के बाहर सच्चाई जानना चाहते हैं.
ये पुस्तक न केवल आलोचना करती है, बल्कि ‘सच्चे इतिहास’ की तलाश को प्रोत्साहित भी करती है. Sandeep Balakrishna, Sanjeev Sanyal जैसे विचारकों की परंपरा में यह एक नई कड़ी
‘प्रख्यात गल्पकार’ एक विचारोत्तेजक पुस्तक है. यह उन पाठकों के लिए अवश्य पढ़नी चाहिए जो भारतीय इतिहास को सिर्फ ‘कहानी’ के रूप में नहीं, बल्कि अपनी सभ्यता की आत्मा के रूप में देखना चाहते हैं. उत्पल कुमार ने साबित किया है कि इतिहास लेखन निष्पक्ष होना चाहिए, न कि किसी खास विचारधारा का गुलाम.
यदि आप इतिहास, राजनीति या सांस्कृतिक विमर्श में रुचि रखते हैं तो यह पुस्तक आपके संग्रह में जरूर होनी चाहिए.
लेखक परिचय
उत्पल कुमार वरिष्ठ पत्रकार और लेखक हैं. वे News18 और Firstpost में ओपिनियन एडिटर के रूप में कार्यरत हैं. दो दशक से अधिक के पत्रकारिता अनुभव के साथ उन्होंने सैकड़ों लेख लिखे हैं. उनकी पहली पुस्तक ‘Bharat Rising: Dharma, Democracy, Diplomacy’ (2024) बेस्टसेलर रही. ‘प्रख्यात गल्पकार’ उनकी दूसरी पुस्तक है, जो अंग्रेजी में 2025 की शुरुआत में प्रकाशित हुई और अब हिंदी में उपलब्ध है.
मूल अंग्रेजी पुस्तक: Eminent Distorians: Twists and Truths in Bharat’s History
हिंदी अनुवादक: अरुण तिवारी
प्रकाशक: BluOne Ink Pvt. Ltd.(अंग्रेजी संस्करण का हिंदी रूपांतरण)
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-भारत एक्सप्रेस
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