सिद्धार्थ मुखर्जी, पुलित्जर पुरस्कार विजेता लेखक और ऑन्कोलॉजिस्ट, अपनी किताबों से विज्ञान को आम पाठकों के लिए इतना रोचक बना देते हैं कि वह महज तथ्यों का संग्रह न रहकर एक भावनात्मक यात्रा लगने लगती है. उनकी नवीनतम कृति कोशिकिय लय: जीवन का विज्ञान (The Song of the Cell: An Exploration of Medicine and the New Human), जो पेंगुइन रैंडम हाउस से प्रकाशित हुई है, इसी परंपरा को आगे बढ़ाती है. यह किताब कोशिकाओं की दुनिया में एक गहन लेकिन आकर्षक गोता लगाती है, जहां जीवन की सबसे छोटी इकाइयां न केवल हमारे शरीर की आधारशिला हैं, बल्कि चिकित्सा के भविष्य को भी आकार दे रही हैं.
सबसे महत्वाकांक्षी और व्यापक रचनाओं में से एक
सिद्धार्थ मुखर्जी की यह किताब उनकी अब तक की सबसे महत्वाकांक्षी और व्यापक रचनाओं में से एक है. पुलित्जर पुरस्कार विजेता (The Emperor of All Maladies के लिए) और The Gene जैसी बेस्टसेलर किताबों के लेखक मुखर्जी इस बार कोशिका (सेल) को केंद्र में रखकर जीवन, चिकित्सा और मानवता की पूरी कहानी कहते हैं. कोशिकीय लय पढ़ते हुए ऐसा लगता है जैसे कोई महान संगीतकार आपको जीवन के सबसे बुनियादी सुरों की सिम्फनी सुना रहा हो. यहां हर कोशिका एक नोट है, और पूरा शरीर एक जीवंत संगीत.
छह भागों में बंटी किताब
किताब छह भागों में बंटी है. मुखर्जी 17वीं शताब्दी से शुरू करते हैं, जब रॉबर्ट हुक और एंटोनी वान ने सबसे पहले माइक्रोस्कोप से कोशिकाओं को देखा. फिर धीरे-धीरे वे कोशिकाओं की खोज, उनके कार्य, विभाजन, विशेषीकरण, प्रतिरक्षा, कैंसर, स्टेम सेल, और भविष्य की चिकित्सा तक ले जाते हैं.
शैली वैज्ञानिक होने के साथ-साथ अत्यंत काव्यात्मक और मानवीय है. वे जटिल जैविक प्रक्रियाओं को इतनी सुंदरता से समझाते हैं कि आम पाठक भी आश्चर्यचकित रह जाता है. उदाहरण के लिए:
- प्रतिरक्षा कोशिकाओं को “गनस्लिंगिंग शेरिफ” और “गमशू डिटेक्टिव” कहकर समझाना
- एक निषेचित अंडकोश से पूरे मानव शरीर के बनने की प्रक्रिया को “अविश्वसनीय चमत्कार” बताना
जीवन दर्शन से जुड़ी किताब
मुखर्जी अपनी डॉक्टर और शोधकर्ता की हैसियत से मरीजों की व्यक्तिगत कहानियां, प्रयोगशाला के अनुभव और ऐतिहासिक घटनाओं को इतनी कुशलता से बुनते हैं कि किताब कभी बोरिंग नहीं लगती. यह सिर्फ विज्ञान की किताब नहीं, बल्कि जीवन दर्शन की किताब है.
आश्चर्य और विस्मय की भावना: मुखर्जी बार-बार पाठक से कहते हैं कि हम अभी भी कोशिकाओं के बारे में बहुत कुछ नहीं जानते. “We don’t know. We don’t know. We don’t know” यह वाक्य किताब में कई बार आता है, जो विनम्रता और उत्सुकता दोनों जगाता है.
नैतिक सवाल: स्टेम सेल, जीन एडिटिंग, भ्रूण चिकित्सा जैसे विषयों पर वे संतुलित दृष्टिकोण देते हैं. इलाज संभव है, लेकिन “नया मानव” बनाने की संभावना डरावनी भी है.
कैंसर और प्रतिरक्षा पर गहराई: लेखक कैंसर विशेषज्ञ हैं, इसलिए इन अध्यायों में उनकी व्यक्तिगत अंतर्दृष्टि बहुत प्रभावशाली है.
शरीर के अंदर की दुनिया
कुछ पाठकों को लग सकता है कि वैज्ञानिक विवरण कभी-कभी बहुत विस्तृत हो जाते हैं. हिंदी अनुवाद में कुछ जगहों पर तकनीकी शब्दों का प्रयोग थोड़ा कठिन लग सकता है (हालांकि अधिकांश जगह अनुवादक ने सरल हिंदी में समझाया है). यदि आप पूरी तरह विज्ञान से अपरिचित हैं, तो शुरुआती अध्याय थोड़े धीमे लग सकते हैं.
कोशिकीय लय वह किताब है जो आपको अपने शरीर के अंदर की दुनिया से दोबारा परिचित कराती है. पढ़ने के बाद आप हर सांस, हर धड़कन को अलग नजर से देखेंगे. यह सब अरबों कोशिकाओं की एक महाकाव्य लय है.
यदि आप विज्ञान, चिकित्सा या जीवन के मूल सवालों में रुचि रखते हैं, तो यह किताब अवश्य पढ़ें. सिद्धार्थ मुखर्जी ने एक बार फिर साबित किया है कि वैज्ञानिक किताब भी साहित्य की तरह सुंदर हो सकती है.
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-भारत एक्सप्रेस
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