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हांगकांग शिखर सम्मेलन में डॉ. प्रीति अडानी ने वैश्विक परोपकारियों से बदलाव की ‘सह-निर्माता’ बनने की अपील की

हांगकांग में एवीपीएन शिखर सम्मेलन 2025 में डॉ. प्रीति अडानी ने कहा कि परोपकार केवल दान नहीं, बल्कि साझा जिम्मेदारी है. अडानी फाउंडेशन की प्रेरणादायक कहानियाँ और 7 अरब डॉलर की प्रतिज्ञा समाज में गहरा प्रभाव डाल रही हैं.

Dr. Preeti Adani

हांगकांग, 9 सितम्बर 2025: एशियन वेंचर फिलान्थ्रॉपी नेटवर्क (AVPN) शिखर सम्मेलन में अडानी फाउंडेशन की चेयरपर्सन डॉ. प्रीति अडानी ने कहा कि परोपकार को केवल दान तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसे जिम्मेदारी पर आधारित एक साझा मिशन बनाना होगा.

कच्छ की महिला से मिली प्रेरणा

डॉ. अडानी ने अपने संबोधन की शुरुआत कच्छ की एक महिला की कहानी से की, जो सूखी जमीन पर बीज बो रही थी. जब उनसे कारण पूछा गया, तो महिला ने कहा एक दिन बारिश आएगी, और अगर बीज नहीं बोए तो बारिश कुछ भी अंकुरित नहीं कर पाएगी. इस रूपक का प्रयोग उन्होंने परोपकार के महत्व को समझाने के लिए किया.

निजी सफर और अडानी फाउंडेशन की शुरुआत

डॉ. अडानी ने बताया कि कैसे वे अहमदाबाद में एक युवा डेंटिस्ट थीं, लेकिन अपने पति गौतम अडानी के राष्ट्र निर्माण के सपनों को समर्थन देने के लिए उन्होंने पेशा छोड़ दिया. 1996 में अडानी फाउंडेशन की स्थापना हुई, जो आज भारत के सबसे बड़े सामाजिक संगठनों में से एक है. परिवार की ओर से परोपकार में 7 अरब डॉलर की प्रतिज्ञा की गई है.

लाखों लोगों तक पहुंच

फाउंडेशन शिक्षा, स्वास्थ्य और पोषण, सतत आजीविका, सामुदायिक ढांचा और जलवायु कार्रवाई जैसे क्षेत्रों में काम कर रहा है. यह 7,000 गांवों और 9.6 मिलियन से अधिक लोगों को प्रभावित कर चुका है. लेकिन डॉ. अडानी ने कहा कि असली सफलता आंकड़ों से नहीं, बल्कि उन कहानियों से मापी जाती है जो बदलाव की गवाही देती हैं.

तीन प्रेरणादायक कहानियां

वंश की कहानी: गुजरात का 3 साल का बच्चा, जो कुपोषण से जूझ रहा था, फाउंडेशन की मदद से फिर से स्वस्थ हो सका.

रेखा की मिसाल: महाराष्ट्र की विधवा महिला, जिन्होंने दूध चिलिंग सेंटर शुरू किया और सौ से अधिक महिलाओं को प्रेरित किया.

सोनल की उपलब्धि: मुंद्रा की छात्रा, जिन्होंने आयरलैंड से मास्टर्स किया और अब एप्पल में कार्यरत हैं.

परोपकार का असली अर्थ

डॉ. अडानी ने कहा कि लाभार्थी केवल मदद पाने वाले न होकर, आशा और प्रभाव के गुणक भी बन सकते हैं. उन्होंने स्पष्ट संदेश दिया यह ताली बजाने का समय नहीं है, यह प्रतिबद्ध होने का समय है. उन्होंने कहा कि असली बदलाव तभी आएगा जब परोपकारी दानदाता नहीं, बल्कि सह-निर्माता बनें. इसके लिए सरकारों, व्यवसायों और समुदायों के बीच साझेदारी जरूरी है.

बीज बोने का संदेश

अपने भाषण के अंत में डॉ. अडानी ने फिर से बीज बोने का संदेश दिया. उन्होंने कहा हमें वह पीढ़ी बनना है जो सूखे में बोए, बारिश से पहले विश्वास रखे और सभी के लिए गरिमा व अवसर की फसल काटे. उन्होंने याद दिलाया कि बारिश जरूर आएगी और जब आएगी, तो इतिहास याद रखेगा कि इस सभा में बैठे लोगों ने उम्मीद के बीज बोए और मिलकर सहयोग का सागर बनाया.

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-भारत एक्सप्रेस 



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