Adani Group Shares Price: अमेरिकी शॉर्ट-सेलर फर्म हिंडनबर्ग रिसर्च द्वारा लगाए गए आरोपों पर भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) की क्लीन चिट के बाद शुक्रवार को अदाणी समूह की कंपनियों के शेयरों में 10 प्रतिशत तक की तेजी आई.
प्रमुख कंपनियों का हाल
सुबह 12 बजे तक, अदाणी टोटल गैस लिमिटेड का शेयर 7.67 प्रतिशत की बढ़त के साथ 653 रुपए पर कारोबार कर रहा था. अदाणी पावर लिमिटेड का शेयर 7.84 प्रतिशत की बढ़त के साथ 680 रुपए पर पहुंच गया था. अदाणी एंटरप्राइजेज लिमिटेड का शेयर 3.97 प्रतिशत की बढ़त के साथ 2,497 रुपए पर, अदाणी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक जोन लिमिटेड का शेयर 1.22 प्रतिशत की बढ़त के साथ 1,430 रुपए पर पहुंच गया. अदाणी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड का शेयर 2.96 प्रतिशत की बढ़त के साथ 1,007.85 रुपए पर पहुंच गया था.
मॉर्गन स्टेनली की रिपोर्ट
इस बीच, अदाणी पावर लिमिटेड (एपीएल) पर ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म मॉर्गन स्टेनली ने ‘ओवरवेट’ की सलाह दी और 818 रुपए का टारगेट प्राइस दिया, जो कि आखिरी कारोबारी सत्र की क्लोजिंग से 29 प्रतिशत अधिक है. ब्रोकरेज ने एक नोट में कहा कि अदाणी पावर भारत के कॉरपोरेट इतिहास में टर्नअराउंड का एक अच्छा उदाहरण है, जिसमें अधिकांश नियामक मुद्दों का समाधान और कई वैल्यू क्रिएट करने वाले अधिग्रहण शामिल हैं.”
सालभर का प्रदर्शन
इस वर्ष अब तक, अदाणी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक जोन लिमिटेड और अदाणी पावर के शेयरों में क्रमशः 17.14 प्रतिशत और 28.12 प्रतिशत तक की वृद्धि हुई है. शॉर्ट-सेलर द्वारा व्यापक रूप से प्रचारित दावों के झूठे होने की पुष्टि करने वाले अपने अंतिम आदेश में, सेबी ने निष्कर्ष निकाला कि अदाणी समूह ने दो निजी फर्मों के माध्यम से धन का प्रवाह करके किसी भी नियम का उल्लंघन नहीं किया, जिससे छिपे हुए संबंधित पक्ष लेनदेन और धोखाधड़ी के दावों को प्रभावी ढंग से खारिज कर दिया गया.
सेबी की जांच और नतीजे
जनवरी 2023 में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर सेबी ने जांच शुरू की थी. यह जांच अदाणी पोर्ट्स, अदाणी पावर, अदाणी एंटरप्राइजेज और दो निजी कंपनियों माइलस्टोन ट्रेडलिंक्स और रेहवर इंफ्रास्ट्रक्चर के लेन-देन पर केंद्रित थी. हिंडनबर्ग ने दावा किया था कि अदाणी समूह ने इन निजी फर्मों के जरिए “संबंधित पक्ष लेन-देन” (RPT) को छिपाने का प्रयास किया. हालांकि, सेबी की विस्तृत पड़ताल में इन आरोपों में कोई सच्चाई नहीं पाई गई.
कानूनी परिभाषा पर जोर
सेबी ने कहा कि उस समय के कानून में संबंधित पक्ष लेनदेन की परिभाषा केवल किसी कंपनी और उसके संबंधित पक्षों के बीच सीधे लेन-देन के लिए ही थी. माइलस्टोन और रेहवर के बीच व्यावसायिक संबंध होने के बावजूद, उन्हें लागू नियमों के तहत अदाणी कंपनियों के संबंधित पक्ष के रूप में कानूनी रूप से परिभाषित नहीं किया गया था.
गौतम अडानी ने क्या कहा?
सेबी की जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद अडानी समूह के चेयरमैन गौतम अडानी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर प्रतिक्रिया दी. उन्होंने लिखा कि ‘सत्य की हमेशा जीत होती है. गहराई से जांच के बाद सेबी ने साफ कर दिया है कि हिंडनबर्ग के सभी आरोप पूरी तरह निराधार थे. पारदर्शिता और ईमानदारी हमारी पहचान रही है. हम उन निवेशकों के दुख को समझते हैं, जिन्हें झूठे आरोपों की वजह से नुकसान उठाना पड़ा. अब वक्त आ गया है कि देश से माफी वही मांगे, जिन्होंने अफवाहें फैलाईं.’
After an exhaustive investigation, SEBI has reaffirmed what we have always maintained, that the Hindenburg claims were baseless. Transparency and integrity have always defined the Adani Group.
We deeply feel the pain of the investors who lost money because of this fraudulent… pic.twitter.com/8YKeEYmmp5
— Gautam Adani (@gautam_adani) September 18, 2025
-भारत एक्सप्रेस
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