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BRICS में डॉलर का दबदबा घटाने की तैयारी, भारत के UPI मॉडल से खुलेगा पेमेंट का नया रास्ता

BRICS Summit India: दिल्ली में होने वाले BRICS शिखर सम्मेलन में सदस्य देश डॉलर पर निर्भरता घटाने और अपनी-अपनी मुद्राओं में लेन-देन को आसान बनाने पर चर्चा कर सकते हैं.

Preparations to reduce dollar dominance within BRICS

भारत के UPI मॉडल से खुलेगा पेमेंट का नया रास्ता

BRICS Summit India: दिल्ली में होने वाले BRICS शिखर सम्मेलन में इस बार सिर्फ निवेश और व्यापार ही नहीं, बल्कि वैश्विक भुगतान व्यवस्था को बदलने पर भी अहम बातचीत होगी. सदस्य देश डॉलर पर निर्भरता कम करने और अपनी-अपनी मुद्राओं में लेन-देन को आसान बनाने के लिए क्रॉस-बॉर्डर डिजिटल पेमेंट्स और सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (CBDC) को जोड़ने के विकल्प तलाश रहे हैं.

भारत का UPI मॉडल चर्चा में

भारत का यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस यानी UPI इस पूरी कवायद का केंद्र बन सकता है. जिस तरह UPI ने देश के भीतर तत्काल डिजिटल भुगतान को आसान बनाया है, उसी तरह BRICS देशों के अलग-अलग फास्ट पेमेंट सिस्टम्स को आपस में लिंक करने का प्रस्ताव है. इससे दो देशों के बीच लेन-देन के लिए हर बार डॉलर को बीच में लाने की जरूरत कम हो सकती है.

RBI ने क्या कहा?

भारतीय रिजर्व बैंक ने भी यह माना है कि BRICS के भीतर फास्ट पेमेंट सिस्टम्स को जोड़ने और CBDC की इंटरऑपरेबिलिटी पर चर्चा हो रही है. हालांकि अभी किसी एक मॉडल पर अंतिम फैसला नहीं हुआ है.

नई करेंसी नहीं, कनेक्टिविटी पर फोकस

अक्सर BRICS में डॉलर से दूरी की बात नई साझा करेंसी से जोड़कर देखी जाती है, लेकिन मौजूदा प्रयास अलग हैं. फिलहाल मकसद कोई नई मुद्रा लाना नहीं, बल्कि मौजूदा नेशनल करेंसी और डिजिटल पेमेंट सिस्टम्स को जोड़ना है. उदाहरण के लिए भारत और रूस रुपये-रूबल में कारोबार कर सकें या अन्य देशों की अपनी-अपनी करेंसी में लेन-देन हो सके. भारत पहले से ही लोकल करेंसी में व्यापार बढ़ाने की पैरवी करता रहा है, ऐसे में डिजिटल पेमेंट कनेक्टिविटी इस रणनीति का अगला कदम है.

भारतीय कारोबारियों को फायदा

अगर यह व्यवस्था लागू होती है तो भारतीय कंपनियों को सबसे ज्यादा लाभ मिलेगा. भुगतान की प्रक्रिया तेज और सस्ती होगी. साथ ही रुपये के अंतरराष्ट्रीय इस्तेमाल को बढ़ावा देने की भारत की कोशिशों को भी मजबूती मिलेगी. भारत पहले से ही अपने UPI मॉडल को अन्य देशों से जोड़ने पर काम कर रहा है. BRICS के भीतर पेमेंट इंटरऑपरेबिलिटी भारत को अपनी डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर की ताकत दिखाने का बड़ा मौका दे सकती है.

चुनौतियां भी कम नहीं

हालांकि ऐसा नेटवर्क तैयार करना आसान नहीं होगा. हर देश की बैंकिंग व्यवस्था, करेंसी और रेगुलेशन अलग हैं. करेंसी रिस्क, लिक्विडिटी, साइबर सिक्योरिटी, डेटा प्रोटेक्शन और वित्तीय अपराध रोकथाम जैसे मुद्दों पर भी साझा समाधान बनाना होगा. खासकर चीन जैसे बड़े सदस्य के अपने डिजिटल पेमेंट सिस्टम को देखते हुए डेटा और सिक्योरिटी से जुड़े सवाल अहम होंगे. इसलिए इसे डॉलर को खत्म करने की योजना कहना सही नहीं होगा. मौजूदा दिशा ज्यादा व्यावहारिक है. ऐसे विकल्प तैयार करना जिनमें डॉलर पर निर्भरता जरूरी न हो.

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भारत के लिए वैश्विक अवसर

अगर दिल्ली BRICS समिट में इस दिशा में ठोस कदम उठते हैं, तो यह सिर्फ सदस्य देशों के बीच भुगतान व्यवस्था में बदलाव नहीं होगा, बल्कि भारत के UPI और डिजिटल पेमेंट मॉडल के लिए वैश्विक स्तर पर बड़ा अवसर साबित होगा.

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-भारत एक्सप्रेस



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