Gautam Adani in IIM Lucknow: भारत के सबसे बड़े उद्योगपति गौतम अडानी ने लखनऊ स्थित भारतीय प्रबंधन संस्थान (IIM Lucknow) में आज एक प्रेरणादायक संबोधन दिया. इस अवसर पर उन्होंने युवा छात्रों को संबोधित करते हुए भारत के भविष्य के वास्तुकारों के रूप में उनकी भूमिका पर प्रकाश डाला. उन्होंने अपने जीवन के अनुभवों, चुनौतियों और सफलताओं को साझा करते हुए छात्रों को साहस, दृढ़ विश्वास और नवाचार की भावना से काम करने की प्रेरणा दी.
अडानी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अडानी का यह संबोधन न केवल एक व्यावसायिक नेता के रूप में उनकी यात्रा को दर्शाता है, बल्कि भारत के उभरते अवसरों और युवाओं की जिम्मेदारियों पर भी गहराई से विचार करता है.
#WATCH | Lucknow, UP | Addressing the students at IIM Lucknow, Adani Group Chairman Gautam Adani says, "When I first announced my intention to build a port, most people thought that I had lost my mind…When I presented the idea, some of the bankers laughed and how do you expect… pic.twitter.com/iV5fb7usVQ
— ANI (@ANI) August 7, 2025
प्रारंभिक जीवन और उद्यमिता की शुरुआत
अडानी ने अपने संबोधन की शुरुआत अपने जीवन के शुरुआती दिनों से की. उन्होंने बताया कि 16 साल की उम्र में उन्होंने अहमदाबाद से मुम्बई की यात्रा की और हीरे के व्यापार में कदम रखा. यह उनका पहला जोखिम भरा कदम था, जहां उन्होंने रिश्तों, जोखिम और वैश्विक नेटवर्क की शक्ति को समझा. तीन साल बाद, अपने भाई के पॉलिमर कारखाने में काम करने के लिए अहमदाबाद लौटने पर उन्हें पैमाने, रसद और आपूर्ति श्रृंखला के महत्व का एहसास हुआ, जो उनकी व्यावसायिक सोच का आधार बना.
भारत का उदारीकरण, व्यापारिक सफलता
1990 के दशक में भारत के उदारीकरण के साथ, अडानी ने एक अनोखा अवसर देखा. तत्कालीन प्रधानमंत्रियों राजीव गांधी और नरसिम्हा राव के नेतृत्व में भारत एक आपूर्ति-सीमित बाजार से विकास की ओर बढ़ रहा था. इस अवसर का लाभ उठाते हुए उन्होंने भारत की सबसे बड़ी व्यापारिक कंपनी बनाने का दांव खेला. तीन साल के भीतर उन्होंने यह उपलब्धि हासिल कर ली और 1994 में 32 साल की उम्र में अपनी कंपनी को सार्वजनिक कर दिया, जो आज अडानी एंटरप्राइजेज के नाम से जानी जाती है.
अडानी द्वारा विकसित मुंद्रा पोर्ट: बड़ा केंद्र
अडानी ने मुंद्रा पोर्ट की स्थापना की कहानी साझा करते हुए बताया कि कुछ लोगों ने उन्हें पागल समझा. एक ऐसी जमीन पर पोर्ट बनाना, जो कीचड़ और खारे पानी से भरी थी, एक असंभव सपना लगता था. बैंकर्स ने हंसी उड़ाई और पूछा, “आप पानी के नीचे की जमीन पर निवेश कैसे करवाएंगे?” लेकिन अडानी का दृढ़ विश्वास था कि यह एक संभावना है, न कि केवल जमीन. आज मुंद्रा भारत का सबसे बड़ा व्यावसायिक पोर्ट है और 21 पोर्ट्स व टर्मिनलों का केंद्र बिंदु बना है, जो देश के 30% समुद्री कार्गो को संभालता है.
ऑस्ट्रेलिया में कारमाइकल कोल माइन प्रोजेक्ट
अगला पड़ाव था- ऑस्ट्रेलिया में कारमाइकल कोल माइन प्रोजेक्ट. उन्होंने बताया कि यह परियोजना भारत को बेहतर गुणवत्ता का कोयला और ऊर्जा स्वतंत्रता देने के लिए शुरू की गई थी, न कि केवल कोयले की महत्वाकांक्षा के लिए. लेकिन इस परियोजना का वैश्विक पर्यावरण समूहों ने कड़ा विरोध किया. प्रदर्शन, कानूनी चुनौतियां, बैंकिंग और बीमा कंपनियों का समर्थन वापस लेना – हर कदम पर बाधाएं थीं. फिर भी, अडानी ने हार नहीं मानी. आज यह प्रोजेक्ट भारत की ऊर्जा सुरक्षा और ऑस्ट्रेलिया में हजारों आजीविकाओं का आधार बनी है.
खावड़ा रिन्यूएबल एनर्जी पार्क – नवाचार का चमत्कार
खावड़ा, जहां तक ऊंट भी नहीं चलते, वहां अडानी ने विश्व का सबसे बड़ा एकल-स्थल नवीकरणीय ऊर्जी पार्क बनाने का संकल्प लिया. 500 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में 30 GW हरित ऊर्जा पैदा करने का लक्ष्य रखा गया. शुरू में यह असंभव लगता था, लेकिन अडानी की दृष्टि ने इसे संभव बनाया. आज 5 GW ऊर्जा पहले ही उत्पादन में है और यह विश्व की सबसे सस्ती हरित ऊर्जा का उदाहरण बन रहा है.
धारावी का पुनर्विकास करना: मानवता का प्रोजेक्ट
एशिया के सबसे बड़े स्लम एरिया धारावी का पुनर्विकास अडानी की सबसे चुनौतीपूर्ण परियोजनाओं में से एक है. उन्होंने कहा कि मुम्बई में उड़ान भरते समय नीचे दिखने वाले स्लम उनकी अंतरात्मा को झकझोरते थे. यह परियोजना केवल ईंट-पत्थर का काम नहीं, बल्कि 10 लाख लोगों की गरिमा को फिर से स्थापित करने का प्रयास है. उन्होंने जोर देकर कहा कि सच्चा विकास मानवता की नींव पर खड़ा होना चाहिए.
छात्रों को आधुनिक शिक्षा और नवाचार की जरूरत
अडानी ने छात्रों को आधुनिक शिक्षा और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के युग में सलाह दी. उन्होंने कहा कि डीसीएफ मॉडल, पोर्टर के पांच बल और SWOT विश्लेषण जैसे ढांचे जोखिम को कम करने में मदद करते हैं, लेकिन भविष्य को अधिकतम करने के लिए साहस और नवाचार की जरूरत है. उन्होंने जोर दिया कि भारत को ऐसे नेता चाहिए जो कैनवास को ही चुनौती दें और नई संभावनाएं तलाशें.
भारत को आगे बढ़ाने के लिए चार अनिवार्य बल
अडानी ने भारत के चार अनिवार्य बलों-जनसांख्यिकी, मांग, डिजिटल बुनियादी ढांचा और घरेलू पूंजी-को उजागर किया. उन्होंने भविष्यवाणी की कि 2050 तक भारत 25 खरब डॉलर की अर्थव्यवस्था बनेगा, और युवाओं का सबसे उत्पादक समय इस विकास से मेल खाएगा.
चरित्र, योगदान और साहस: जीवन का मंत्र
अडानी ने छात्रों को तीन सिद्धांतों का पालन करने की सलाह दी: चरित्र पर कटुता, योगदान पर सुविधा, और साहस पर आराम को चुनना. उन्होंने कहा कि आसान रास्ता असाधारण जीवन नहीं गढ़ता; साहस और जोखिम ही नेतृत्व को परिभाषित करते हैं.
भारत में सपनों को साकार करने का आह्वान
अंत में, अडानी ने छात्रों से भारत की मिट्टी में जन्मे सपनों को साकार करने का आह्वान किया. उन्होंने कहा कि भारत एक जीवंत चेतना है, जो युवाओं को बुला रही है कि वे इसे जीएं, गढ़ें और गौरव बनाएं. उनका नारा था, “जाओ निर्माण करो, नेतृत्व करो, गर्जना करो—भारत तुम्हें पुकार रहा है!”
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