GST Rate Cut: वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) की दरों में कटौती से आम लोगों को राहत मिलने की संभावना है. अर्थशास्त्रियों का कहना है कि इससे कीमतों पर दबाव कम होगा. साथ ही भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) के पास नीतिगत दर में कटौती करने की गुंजाइश बढ़ सकती है. यदि कर कटौती का पूरा लाभ उपभोक्ताओं तक पहुँचता है, तो अगले 12 महीनों में खुदरा मुद्रास्फीति 60 से 80 आधार अंक तक घट सकती है.
आरबीआई का ताजा अनुमान
अगस्त में हुई मौद्रिक नीति समीक्षा में आरबीआई ने कहा था कि वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही में औसत मुद्रास्फीति 4.4% रह सकती है. अगले वित्त वर्ष की पहली तिमाही में इसके 4.9% तक पहुंचने की उम्मीद है. जनवरी से मुद्रास्फीति में बढ़ोतरी का अनुमान है, इसी वजह से दरों में कटौती की सीमित संभावना जताई गई थी.
विशेषज्ञों की राय
स्टैंडर्ड चार्टर्ड बैंक की अनुभुति सहाय का कहना है कि जीएसटी दरों में कटौती से सबसे ज्यादा फायदा कंज्यूमर नॉन-ड्यूरेबल्स सेक्टर को होगा। इनका खुदरा मुद्रास्फीति में बड़ा हिस्सा है. उनके अनुसार, साल भर में कुल मिलाकर 60 से 65 आधार अंक तक की गिरावट संभव है. आरबीआई ने 2025-26 के लिए खुदरा मुद्रास्फीति 3.1% रहने का अनुमान पहले ही जारी किया है.
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रीपो दर और अमेरिकी प्रभाव
केंद्रीय बैंक की छह सदस्यीय मौद्रिक नीति समिति फरवरी से अब तक 100 आधार अंक की दर कटौती कर चुकी है. आगे की कटौती इस पर निर्भर करेगी कि अमेरिकी शुल्क बढ़ोतरी के असर को आरबीआई कैसे देखता है. फिलहाल वित्त वर्ष 2026 के लिए जीडीपी वृद्धि दर का अनुमान 6.5% है.
आईडीएफसी फर्स्ट बैंक का आकलन
आईडीएफसी फर्स्ट बैंक की मुख्य अर्थशास्त्री गौरा सेनगुप्ता का कहना है कि महंगाई के लिहाज से कटौती की गुंजाइश मौजूद है. उन्होंने बताया कि जीएसटी कटौती से खुदरा मुद्रास्फीति 60 से 80 आधार अंक तक घट सकती है. यही कारण है कि उन्होंने अपने अनुमान को 2.7% से घटाकर 2.4% कर दिया है. उनका मानना है कि इससे अगले 12 महीनों में जीडीपी वृद्धि में लगभग 0.6% का इजाफा हो सकता है.
तेज हुई जीडीपी वृद्धि
वित्त वर्ष की पहली तिमाही में जीडीपी वृद्धि दर 7.8% रही। यह आरबीआई के 6.5% के अनुमान से काफी अधिक है. विशेषज्ञ मानते हैं कि जीएसटी कटौती से आने वाले महीनों में विकास दर और मजबूत हो सकती है.
आरबीआई का रुख और अगली बैठक
आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि मौद्रिक नीति में तटस्थ रुख बनाए रखने से घरेलू और वैश्विक दोनों ही हालात से निपटने में लचीलापन मिलेगा. मौद्रिक नीति समिति की अगली बैठक 29 सितंबर से 1 अक्टूबर के बीच होगी.
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-भारत एक्सप्रेस
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