20 साल पुराना रिकॉर्ड तोड़ने की राह पर भारत?
India Economic Growth: भारत की आर्थिक रफ्तार को लेकर एक दिलचस्प और उत्साहजनक आकलन सामने आया है. कोरिया इंस्टीट्यूट फॉर इंटरनेशनल इकोनॉमिक पॉलिसी (KIEP) में दक्षिण एशिया मामलों के प्रमुख क्यूंगहून किम का मानना है कि भारत ऐसी स्थिति की ओर बढ़ रहा है, जहां वह दशकों में पहली बार 7 प्रतिशत से अधिक आर्थिक वृद्धि के सबसे लंबे दौर का नया रिकॉर्ड बना सकता है.
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर साझा किए गए अपने विश्लेषण में किम ने कहा कि कोविड-19 महामारी के बाद भारतीय अर्थव्यवस्था ने जिस मजबूती के साथ वापसी की है, उसने दुनिया की प्रमुख आर्थिक संस्थाओं का भरोसा भी बढ़ाया है. यही वजह है कि कई वैश्विक एजेंसियां आने वाले वित्तीय वर्षों के लिए भारत की विकास दर के अनुमान को ऊपर की ओर संशोधित कर रही हैं.
Nearly all major forecasters, including the IMF, ADB and World Bank, have recently raised their growth forecasts for India to above 7% for this year AND next. Remarkable in itself – even more so when viewed against India’s recent performance. (1/n) https://t.co/3xfQdPvEsY
— Kyunghoon Kim (@Kyunghoon_Kim_) October 16, 2026
वैश्विक संस्थाओं को भी भारत पर भरोसा
किम की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF), विश्व बैंक और एशियाई विकास बैंक (ADB) भारत की विकास संभावनाओं को लेकर पहले से अधिक आशावादी नजर आ रहे हैं.
इन संस्थाओं ने भारत के लिए करीब 7 प्रतिशत या उससे अधिक आर्थिक वृद्धि दर का अनुमान जताया है. किम के मुताबिक, भारत पहले ही लगातार पांच कैलेंडर वर्षों में 7 प्रतिशत से अधिक की विकास दर का प्रदर्शन कर चुका है. यह उपलब्धि 2003 से 2007 के दौरान देखने को मिली तेज आर्थिक वृद्धि के बराबर है. यदि मौजूदा पूर्वानुमान सही साबित होते हैं तो भारत उस रिकॉर्ड को पीछे छोड़ सकता है.
महामारी के झटके के बाद जबरदस्त वापसी
आंकड़े बताते हैं कि कोरोना महामारी के दौरान 2020 में भारतीय अर्थव्यवस्था को बड़ा झटका लगा था. उस वर्ष अर्थव्यवस्था में 5.8 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई. हालांकि इसके ठीक अगले साल यानी 2021 में भारत ने शानदार वापसी की और 9.7 प्रतिशत की आर्थिक वृद्धि हासिल की. इसके बाद लगातार चार वर्षों तक देश की जीडीपी ग्रोथ 7 प्रतिशत के ऊपर बनी रही. यह दिखाता है कि भारत की रिकवरी केवल अस्थायी नहीं थी, बल्कि उसने मजबूत विस्तार का रूप लिया.
20 साल पुराना रिकॉर्ड खतरे में
क्यूंगहून किम ने अपने विश्लेषण में बताया कि लगातार पांच वर्षों तक 7 प्रतिशत से अधिक की आर्थिक वृद्धि भारत पहले भी 2003 से 2007 के बीच देख चुका है. वह दौर ऐसा था जब BRIC देशों के समूह में शामिल भारत वैश्विक निवेशकों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र बन गया था.
उनका कहना है कि यदि मौजूदा अनुमानों के अनुसार आने वाले वर्षों में भी आर्थिक विस्तार तेज बना रहता है, तो भारत उस ऐतिहासिक रिकॉर्ड को भी पीछे छोड़ देगा. यह उपलब्धि इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि आज की वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां दो दशक पहले की तुलना में कहीं अधिक चुनौतीपूर्ण हैं.
हालिया पांच साल बने इतिहास के सबसे मजबूत दौरों में शामिल
किम ने एक और महत्वपूर्ण तथ्य साझा किया. उनके अनुसार 2021 से 2025 के बीच भारत की औसत वार्षिक विकास दर 7.83 प्रतिशत रही है. तुलना करें तो 2003 से 2007 के दौर में यह आंकड़ा 7.89 प्रतिशत था. यानी हाल के पांच वर्षों का प्रदर्शन भारत के आर्थिक इतिहास में दूसरे सबसे मजबूत ग्रोथ फेज के रूप में सामने आया है. वर्ष 1960 के बाद के आंकड़ों को देखें तो इतनी लंबी और मजबूत विकास यात्रा बेहद खास मानी जा रही है.
उन्होंने कहा कि इतने लंबे समय तक तेज गति से विकास बनाए रखना किसी भी अर्थव्यवस्था के लिए आसान नहीं होता. यही कारण है कि भारत के हालिया प्रदर्शन को केवल महामारी के बाद की रिकवरी कहकर नहीं देखा जा सकता.
IMF, विश्व बैंक और ADB ने बढ़ाया अनुमान
किम ने यह भी बताया कि दुनिया की बड़ी वित्तीय संस्थाएं भारत को लेकर लगातार अधिक सकारात्मक होती जा रही हैं. हाल ही में IMF ने 2026-27 के लिए भारत की अनुमानित विकास दर को 6.4 प्रतिशत से बढ़ाकर 7 प्रतिशत कर दिया. संस्था ने अपनी वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक रिपोर्ट में 2027-28 के लिए भी 7 प्रतिशत ग्रोथ की संभावना जताई है.
किम ने कहा कि वह स्वयं भी उन अर्थशास्त्रियों में शामिल रहे हैं जिन्होंने तिमाही जीडीपी आंकड़े सामने आने के बाद बार-बार अपने अनुमान ऊपर किए. उनके मुताबिक विश्व बैंक, IMF और ADB सभी ने भारत के लिए अपने पूर्वानुमान में सकारात्मक संशोधन किया है और अधिकांश अनुमान अब 7 प्रतिशत के आसपास या उससे ऊपर पहुंच चुके हैं.
वैश्विक चुनौतियों के बीच और बड़ी उपलब्धि
विशेषज्ञों का मानना है कि यह उपलब्धि इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि दुनिया इस समय कई आर्थिक चुनौतियों से जूझ रही है. ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव, भू-राजनीतिक तनाव और कई विकसित अर्थव्यवस्थाओं की धीमी वृद्धि ने अंतरराष्ट्रीय माहौल को जटिल बना दिया है. ऐसे समय में भारत की मजबूत आर्थिक गति निवेशकों और वैश्विक संस्थाओं का ध्यान आकर्षित कर रही है.
आज का 7 प्रतिशत, पहले से कहीं बड़ा
किम ने यह भी समझाया कि आज की 7 प्रतिशत विकास दर को 20 साल पहले के 7 प्रतिशत से सीधे तौर पर नहीं जोड़ा जा सकता. वर्ष 2007 में भारत की जीडीपी केवल 1 ट्रिलियन डॉलर से थोड़ी अधिक थी. आज देश की अर्थव्यवस्था 4 ट्रिलियन डॉलर के करीब पहुंच चुकी है. ऐसे में समान प्रतिशत वृद्धि का मतलब पहले की तुलना में कहीं ज्यादा बड़ा आर्थिक विस्तार है. दूसरे शब्दों में कहें तो आज 7 प्रतिशत की वृद्धि दर देश के आर्थिक उत्पादन में कहीं अधिक मूल्य जोड़ती है, जबकि दो दशक पहले इसका प्रभाव अपेक्षाकृत सीमित था.
2030 तक तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था?
क्यूंगहून किम का अनुमान है कि भारत करीब 2030 तक दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकता है. हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ऐसी रैंकिंग केवल आर्थिक वृद्धि पर निर्भर नहीं करती. विनिमय दर, मुद्रास्फीति का स्तर और अन्य देशों का आर्थिक प्रदर्शन भी इस गणना को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारक होते हैं.
ग्रोथ के साथ रोजगार और आय भी जरूरी
हालांकि तेज जीडीपी वृद्धि अपने आप में बड़ी उपलब्धि है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि हर परिवार की आय और जीवन स्तर उसी अनुपात में बेहतर हो गया हो. विशेषज्ञों का मानना है कि रोजगार सृजन, निजी निवेश और आम लोगों की आय में बढ़ोतरी जैसे संकेतक भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं. इन्हीं पैमानों से यह तय होगा कि आर्थिक विकास का वास्तविक लाभ देश के नागरिकों तक कितनी प्रभावी तरीके से पहुंच रहा है.
चुनौतियों के बावजूद भारत की तारीफ
किम ने स्वीकार किया कि भारत के सामने अभी भी कई आर्थिक और सामाजिक चुनौतियां मौजूद हैं. इसके बावजूद उनका मानना है कि 140 करोड़ आबादी वाले देश का लगातार ऊंची विकास दर बनाए रखना अपने आप में उल्लेखनीय उपलब्धि है.
उन्होंने कहा कि भारत के इस प्रदर्शन को वैश्विक स्तर पर अधिक पहचान मिलनी चाहिए. साथ ही उम्मीद जताई कि आने वाले समय में जारी होने वाले तिमाही जीडीपी आंकड़े अर्थशास्त्रियों को अपने अनुमान और बेहतर करने का अवसर दे सकते हैं. भारत की आर्थिक यात्रा जिस गति से आगे बढ़ रही है, उसने दुनिया का ध्यान एक बार फिर अपनी ओर खींच लिया है.
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-भारत एक्सप्रेस
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