भारत में कुल 6,327 नदी डॉल्फिन पाई जाती हैं. इनमें सबसे ज्यादा उत्तर प्रदेश में हैं, इसके बाद बिहार, पश्चिम बंगाल और असम का स्थान है. यह जानकारी देश में पहली बार हुई डॉल्फिन जनगणना से सामने आई है.
यह गणना “प्रोजेक्ट डॉल्फिन” का हिस्सा थी, जिसमें आठ राज्यों की 28 नदियों का सर्वेक्षण किया गया. इस प्रक्रिया में 3,150 मैन-डे खर्च हुए और 8,500 किलोमीटर से ज्यादा का क्षेत्र कवर किया गया.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात के गिर में राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड की 7वीं बैठक के दौरान इस रिपोर्ट को जारी किया. उन्होंने डॉल्फिन संरक्षण को लेकर जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया. साथ ही स्थानीय लोगों और ग्रामीणों को इस अभियान में शामिल करने की अपील की. पीएम मोदी ने यह भी सुझाव दिया कि स्कूल के बच्चों को डॉल्फिन के प्राकृतिक आवासों का दौरा कराया जाए, ताकि वे इनके संरक्षण के प्रति जागरूक हो सकें.
वन्यजीव संरक्षण के लिए नई पहल
डॉल्फिन के अलावा, मछलियां खाने वाले घड़ियाल की घटती संख्या को देखते हुए प्रधानमंत्री ने इनके संरक्षण के लिए एक नई परियोजना की घोषणा की. साथ ही, 2025 में होने वाली 16वीं एशियाई शेर गणना की भी घोषणा की गई. यह सर्वेक्षण हर पांच साल में होता है और पिछली बार यह 2020 में हुआ था.
इसके अलावा, चीतों को नए क्षेत्रों में बसाने की योजना भी बनाई गई है. अब इन्हें मध्य प्रदेश के गांधीसागर अभयारण्य और गुजरात के बन्नी ग्रासलैंड्स में लाया जाएगा. वहीं, बाघों के संरक्षण को लेकर भी नई योजना पेश की गई. इस योजना के तहत, संरक्षित क्षेत्रों से बाहर रहने वाले बाघों और अन्य जंगली जानवरों के साथ मानवीय टकराव को कम करने के लिए स्थानीय समुदायों के साथ सह-अस्तित्व को बढ़ावा दिया जाएगा.
मानव-वन्यजीव संघर्ष रोकने के लिए नई तकनीक
मानव और वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिए कोयंबटूर स्थित सलीम अली सेंटर फॉर ऑर्निथोलॉजी एंड नेचुरल हिस्ट्री (SACON) में एक नया उत्कृष्टता केंद्र (Centre of Excellence) स्थापित किया जाएगा. यह केंद्र राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को प्रशिक्षित करेगा और उनके रैपिड रिस्पांस टीम को आधुनिक तकनीक से लैस करेगा. इसमें ट्रैकिंग सिस्टम, अलर्ट सिस्टम और निगरानी उपकरण शामिल होंगे.
इसके अलावा, जंगल की आग और मानव-पशु संघर्ष से निपटने के लिए रिमोट सेंसिंग, जियोस्पेशियल मैपिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग जैसी आधुनिक तकनीकों के उपयोग पर जोर दिया गया.
प्रधानमंत्री ने यह भी सुझाव दिया कि जंगल की आग की बेहतर निगरानी और नियंत्रण के लिए भारतीय वन सर्वेक्षण (FSI), देहरादून और BISAG-N के बीच अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के माध्यम से सहयोग किया जाए. इससे संवेदनशील वन क्षेत्रों में आग को पहले से भांपकर उसके प्रभाव को कम किया जा सकेगा.
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-भारत एक्सप्रेस
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