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देश में आ रहे हैं डॉलर ही डॉलर: अचानक कैसे बढ़ा भारत का विदेशी मुद्रा भंडार? 672 अरब डॉलर पर पहुंचा फॉरेक्स रिजर्व

RBI के अनुसार भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 672.58 अरब डॉलर पहुंच गया है. जानिए गोल्ड रिजर्व, FCA और फॉरेक्स रिजर्व में बढ़ोतरी की प्रमुख वजहें.

Foreign Exchange Reserves

India Forex Reserves: भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए राहत भरी खबर है. देश का विदेशी मुद्रा भंडार (फॉरेक्स रिजर्व) 19 जून 2026 को समाप्त सप्ताह में 96.3 करोड़ डॉलर बढ़कर 672.58 अरब डॉलर हो गया है. यह जानकारी भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने शुक्रवार को जारी आंकड़ों में दी. इससे पहले 12 जून को समाप्त सप्ताह में विदेशी मुद्रा भंडार 9.98 अरब डॉलर घटकर 671.62 अरब डॉलर रह गया था. अब ताजा बढ़ोतरी से उस गिरावट की आंशिक भरपाई हुई है.

RBI के अनुसार, इस दौरान भारत के गोल्ड रिजर्व का मूल्य 4.11 अरब डॉलर बढ़कर 107.93 अरब डॉलर पहुंच गया, जो विदेशी मुद्रा भंडार में बढ़ोतरी की प्रमुख वजह रहा. वहीं, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के पास भारत की स्पेशल ड्रॉइंग राइट्स (SDR) होल्डिंग 5.2 करोड़ डॉलर घटकर 18.64 अरब डॉलर रह गई.

3.07 अरब डॉलर घटी FCA

आरबीआई के मुताबिक, 19 जून 2026 को समाप्त सप्ताह में विदेशी मुद्रा भंडार का सबसे बड़ा हिस्सा मानी जाने वाली फॉरेन करेंसी एसेट्स (FCA) 3.07 अरब डॉलर घटकर 541.21 अरब डॉलर रह गई. एफसीए में सिर्फ अमेरिकी डॉलर ही नहीं, बल्कि यूरो, पाउंड और येन जैसी अन्य विदेशी मुद्राएं भी शामिल होती हैं. इसलिए इन मुद्राओं की कीमतों में उतार-चढ़ाव का असर भी एफसीए के कुल मूल्य पर पड़ता है.

गोल्ड रिजर्व में बड़ी बढ़ोतरी

आरबीआई के मुताबिक, 19 जून 2026 को समाप्त सप्ताह में भारत के गोल्ड रिजर्व का मूल्य 4.11 अरब डॉलर बढ़कर 107.93 अरब डॉलर पहुंच गया. वहीं, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) में भारत की स्पेशल ड्रॉइंग राइट्स (SDR) होल्डिंग 5.2 करोड़ डॉलर घटकर 18.64 अरब डॉलर रह गई. इसके अलावा, आईएमएफ में भारत की रिजर्व पोजिशन भी 2.2 करोड़ डॉलर घटकर 4.79 अरब डॉलर पर आ गई.


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विदेशी मुद्रा भंडार क्यों है महत्वपूर्ण?

विदेशी मुद्रा भंडार किसी भी देश की आर्थिक मजबूती का बड़ा संकेत माना जाता है. यह मुश्किल समय में देश की वित्तीय सुरक्षा करता है और वैश्विक स्तर पर भरोसा बढ़ाता है. इसके प्रमुख फायदे हैं.

  • विदेशों से होने वाले आयात का भुगतान करने में मदद मिलती है.
  • रुपये की कीमत को स्थिर बनाए रखने में सहारा मिलता है.
  • आर्थिक संकट के समय सुरक्षा कवच का काम करता है.
  • विदेशी कर्ज चुकाने की क्षमता मजबूत होती है.
  • विदेशी निवेशकों का भरोसा बढ़ता है.
  • आपात स्थिति में देश को वित्तीय सहायता मिलती है.

-भारत एक्सप्रेस



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