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जापान को पछाड़कर दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा सौर ऊर्जा उत्पादक देश बना भारत- मोदी सरकार के मंत्री प्रल्हाद जोशी

भारत ने 1,08,494 GWh सौर ऊर्जा उत्‍पादन कर से जापान को पछाड़ा. हमारा देश अब दुनिया का तीसरा बड़ा उत्पादक बन गया है. मंत्री प्रल्हाद जोशी ने कहा- 50% गैर-जीवाश्म लक्ष्य पार, 2030 तक 500 GW का लक्ष्य रखा.

Solar Energy

(प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)

Vijay Ram Edited by Vijay Ram

Solar energy in India: भारत ने सौर ऊर्जा उत्पादन में जापान को पीछे छोड़ते हुए दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा सौर ऊर्जा उत्पादक देश बनने का गौरव हासिल किया है. केंद्रीय नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रल्हाद जोशी ने यह घोषणा की. उन्होंने बताया कि भारत ने अब तक 1,08,494 गीगावाट घंटे (GWh) सौर ऊर्जा का उत्पादन किया है, जो जापान के 96,459 GWh से काफी अधिक है. यह उपलब्धि भारत को नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में अग्रणी बनाती है, जो पीएम नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में स्वच्छ ऊर्जा क्रांति का हिस्सा है.

गैर-जीवाश्म स्रोतों से 50% लक्ष्य पार

नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रल्हाद जोशी ने कहा कि भारत ने अपने बिजली उत्पादन का 50% गैर-जीवाश्म स्रोतों से प्राप्त करने का लक्ष्य पहले ही पार कर लिया है. अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) के 2024 के आंकड़ों के अनुसार, चीन और अमेरिका के बाद भारत इस सूची में तीसरे स्थान पर है. इस सफलता के पीछे सरकार की नीतियां, सौर ऊर्जा परियोजनाओं में निवेश और निजी क्षेत्र की भागीदारी प्रमुख कारण हैं. उन्होंने ट्विटर पर लिखा कि यह उपलब्धि भारत को वैश्विक स्वच्छ ऊर्जा क्रांति में अग्रणी बनाती है.

सौर ऊर्जा में उल्लेखनीय प्रगति

भारत में सौर ऊर्जा क्षमता में पिछले कुछ वर्षों में तेजी से वृद्धि हुई है. 116.25 गीगावाट की संचयी सौर ऊर्जा क्षमता के साथ, देश ने नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में बड़ी छलांग लगाई है. राजस्थान जैसे राज्यों में बड़े सौर ऊर्जा संयंत्रों का निर्माण और ग्रामीण क्षेत्रों में सौर ऊर्जा तक पहुंच बढ़ाने की पहल ने इस प्रगति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. इसके अलावा, 435 मेगावाट के सौर संयंत्र का उद्घाटन हाल ही में राजस्थान में हुआ, जिसे मंत्री ने गति और स्थिरता का मॉडल बताया.

भविष्य के लक्ष्य और प्रभाव

नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रल्हाद जोशी ने भरोसा जताया कि भारत 2030 तक 500 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता हासिल करने के अपने लक्ष्य की ओर तेजी से अग्रसर है. इस उपलब्धि से न केवल पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक विकास में भी योगदान होगा. विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम भारत को जलवायु परिवर्तन से निपटने में वैश्विक नेतृत्व प्रदान करेगा.

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