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स्वीडन दौरे पर जाएंगे पीएम मोदी: भारत के लिए क्यों इतनी खास है यह दोस्ती? समझिए इसका पूरा गणित

भारत और स्वीडन के व्यापारिक और कूटनीतिक रिश्ते एक नए मुकाम पर पहुंच गए हैं. एशिया में भारत अब स्वीडन का तीसरा सबसे बड़ा बिजनेस सहयोगी है. 2.82 अरब डॉलर के एफडीआई (FDI) और भारत में काम कर रही 280 स्वीडिश कंपनियों के साथ दोनों देशों का यह रिश्ता आईटी, ग्रीन ट्रांजिशन और मजबूत सप्लाई चेन जैसे बड़े मुद्दों पर आगे बढ़ रहा है.

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India Sweden Relations: जब भी यूरोप के अमीर और विकसित देशों की बात होती है, तो स्वीडन का नाम सबसे ऊपर आता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारत के बिजनेस और तरक्की के नक्शे पर स्वीडन कितनी अहम भूमिका निभा रहा है? पिछले कुछ सालों में भारत और स्वीडन के बीच व्यापारिक और कूटनीतिक रिश्ते एक नए मुकाम पर पहुंच गए हैं. इसी साझेदारी को और अधिक मजबूत करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वीडन दौरे के लिए पहुंच गए हैं, जिससे दोनों देशों के रणनीतिक रिश्तों में एक नया उछाल आने की उम्मीद है. आज स्वीडन न सिर्फ भारत का एक मजबूत ग्लोबल पार्टनर बन चुका है बल्कि एशिया में भारत उसका तीसरा सबसे बड़ा बिजनेस सहयोगी है. आइए दोनों देशों के इस मजबूत होते रिश्ते को आंकड़ों और बिजनेस के नजरिए से समझने की कोशिश करते हैं.

भारत में स्वीडन का बड़ा दांव

अगर व्यापार और निवेश के आंकड़ों पर नजर डालें, तो भारत के लिए स्वीडन कितना जरूरी है, यह साफ हो जाता है. स्वीडन आज भारत में निवेश करने वाला 22वां सबसे बड़ा देश बन चुका है. दोनों देशों के बीच होने वाला द्विपक्षीय व्यापार बढ़कर करीब 7.75 अरब डॉलर के आंकड़े को छू चुका है.

सिर्फ व्यापार ही नहीं, भारत के बाजारों और युवाओं को रोजगार देने में भी स्वीडन पीछे नहीं है. स्वीडन ने भारत में करीब 2.82 अरब अमेरिकी डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) किया है. आज की तारीख में भारत में छोटी-बड़ी मिलाकर करीब 280 स्वीडिश कंपनियां ग्राउंड लेवल पर काम कर रही हैं, जो भारतीय अर्थव्यवस्था को रफ्तार देने के साथ-साथ हजारों लोगों को रोजगार भी दे रही हैं.

स्वीडन में भारतीयों का जलवा

बात सिर्फ कंपनियों और पैसों के लेन-देन तक ही सीमित नहीं है, बल्कि दोनों देशों के बीच ‘पीपुल-टू-पीपुल’ कनेक्शन भी बहुत मजबूत हुआ है. इस समय स्वीडन में करीब 66,400 भारतीय नागरिक रह रहे हैं. इनमें से ज्यादातर लोग वहां के IT सेक्टर में ऊंचे पदों पर काम कर रहे हैं और स्वीडन की तकनीकी क्रांति का हिस्सा बने हुए हैं.

इसके अलावा, स्वीडन की यूनिवर्सिटीज और रिसर्च सेंटर्स में भारतीय दिमाग का डंका बज रहा है. बड़ी संख्या में भारतीय रिसर्चर्स वहां अपनी सेवाएं दे रहे हैं, वहीं करीब 2500 भारतीय छात्र स्वीडन में रहकर उच्च शिक्षा हासिल कर रहे हैं.

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इन चार बड़े मुद्दों पर टिकी है नजर

आने वाले दिनों में यह दोस्ती और गहरी होने वाली है, क्योंकि दोनों देश अब उन मुद्दों पर मिलकर काम कर रहे हैं जो पूरी दुनिया का भविष्य तय करेंगे. रणनीतिक स्तर पर दोनों देशों का फोकस मुख्य रूप से चार बड़े एजेंडों पर है:

ग्रीन ट्रांजिशन: कार्बन उत्सर्जन को कम करने और पर्यावरण को बचाने के लिए नए तौर-तरीकों पर काम करना.

जलवायु: क्लाइमेट चेंज की चुनौतियों से मिलकर निपटना.

टेक्नोलॉजी: आईटी और एआई के दौर में एक-दूसरे के साथ नई तकनीक साझा करना.

मजबूत सप्लाई चेन: दुनिया भर में चल रही उथल-पुथल के बीच बिजनेस और मैन्युफैक्चरिंग की सप्लाई चेन को बिना किसी रुकावट के मजबूत बनाए रखना.

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-भारत एक्सप्रेस



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