India US Trade Deal: भारत और अमेरिका के बीच रिश्तों की गर्माहट अब सिर्फ बयानों तक सीमित नहीं रही, बल्कि यह एक नई और मजबूत रणनीतिक साझेदारी की शक्ल लेती जा रही है. ताजा खबर यह है कि दोनों देशों के बीच बहुप्रतीक्षित ‘ट्रेड डील’ यानी व्यापारिक समझौते को लेकर बातचीत का अगला दौर आज से दोबारा शुरू हो सकता है. यह खबर उन लोगों के लिए बड़ी है जो ग्लोबल मार्केट और भारतीय अर्थव्यवस्था पर नजर रखते हैं.
इस पूरी बातचीत को नई हवा तब मिली जब सोमवार को भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने एक बेहद सकारात्मक बयान दिया. उन्होंने कहा कि भारत और अमेरिका के संबंध किसी लेन-देन पर नहीं, बल्कि एक ‘सच्ची दोस्ती’ पर आधारित हैं. उनके इस बयान ने साफ कर दिया कि वाशिंगटन और नई दिल्ली के बीच जो दूरियां कभी हुआ करती थीं, अब वे पूरी तरह से खत्म हो चुकी हैं.
भारत के लिए क्यों है यह बड़ा मौका?
इस ट्रेड डील से भी बड़ी खबर जो निकलकर सामने आई, वो है ‘पैक्स सिलिका’ (Pax Silica) समूह. सर्जियो गोर ने संकेत दिए हैं कि अगले महीने भारत को इस खास ग्रुप में पूर्ण सदस्य के तौर पर शामिल होने के लिए आधिकारिक न्योता दिया जाएगा.
अब आप सोच रहे होंगे कि आखिर यह पैक्स सिलिका बला क्या है? सरल शब्दों में कहें तो यह अमेरिका के नेतृत्व वाली एक ऐसी रणनीतिक पहल है, जिसका मकसद दुनिया में ‘सिलिकॉन सप्लाई चेन’ यानी चिप और सेमीकंडक्टर की दुनिया को सुरक्षित बनाना है. आज के दौर में मोबाइल से लेकर मिसाइल तक सब कुछ इन्हीं चिप्स पर निर्भर है. भारत का इस ग्रुप में जुड़ना इस बात का सबूत है कि दुनिया अब भारत को टेक्नोलॉजी और इनोवेशन के केंद्र के रूप में देख रही है.
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भरोसेमंद पार्टनर के रूप में उभरा भारत
अमेरिकी अंडर सेक्रेटरी ऑफ स्टेट जैकब एस. हेलबर्ग ने भी इस पर अपनी खुशी जाहिर की है. उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए कहा कि जब पैक्स सिलिका का काम शुरू होगा, तो नई दिल्ली को मुख्य चर्चा के लिए बुलाया जाएगा. उन्होंने इसे दोनों देशों की पार्टनरशिप के लिए एक ‘ऐतिहासिक मील का पत्थर’ बताया.
इसका सीधा मतलब यह है कि अमेरिका अब चीन जैसे देशों पर अपनी निर्भरता कम करके भारत जैसे भरोसेमंद दोस्तों के साथ मिलकर एक सुरक्षित सप्लाई चेन बनाना चाहता है. यह कदम न केवल भारत में विदेशी निवेश बढ़ाएगा, बल्कि भारतीय युवाओं के लिए हाई-टेक सेक्टर में नौकरियों के नए दरवाजे भी खोलेगा.
कुल मिलाकर देखें तो भारत और अमेरिका की यह जुगलबंदी अब उस दौर में पहुंच गई है जहां दोनों देश एक-दूसरे की जरूरत बन चुके हैं.
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-भारत एक्सप्रेस
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