भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात अब देश के शीर्ष 10 निर्यात क्षेत्रों में सबसे तेजी से बढ़ने वाला क्षेत्र बन गया है और इसने मौजूदा वित्तीय वर्ष के 10 महीने में पहली बार 2.5 लाख करोड़ रुपये का आंकड़ा पार किया है. वाणिज्य मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, जनवरी तक इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र का निर्यात पिछले साल के 2.41 लाख करोड़ रुपये से भी अधिक हो चुका है.
स्मार्टफोन निर्यात का प्रमुख योगदान
इस वृद्धि में सबसे बड़ा योगदान स्मार्टफोन निर्यात का है, खासकर एप्पल जैसी कंपनियों से. स्मार्टफोन अब इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात का प्रमुख घटक बन चुका है, और इसका योगदान पिछले वित्तीय वर्ष में 52% से बढ़कर FY25 में 60% हो गया है. 10 महीने के दौरान स्मार्टफोन निर्यात 1.55 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है. जनवरी में स्मार्टफोन निर्यात ने 25,000 करोड़ रुपये ($3 बिलियन) का रिकॉर्ड बनाया, जिसमें से 16,500 करोड़ रुपये ($2 बिलियन) एप्पल के iPhones का योगदान था.
पीएलआई योजना का असर और संभावित खतरे
निर्माण से जुड़ी उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजना के तहत, भारत ने स्मार्टफोन निर्माण में एक महत्वपूर्ण बदलाव देखा है, जिसमें एप्पल ने अपनी आपूर्ति श्रृंखला को भारत में स्थानांतरित किया और इसे चीन के बाद अपना दूसरा घर बना लिया. हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि इस क्षेत्र को डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन द्वारा लगाए गए प्रतिकूल शुल्क से सतर्क रहने की आवश्यकता है, और सरकार एवं उद्योग एक साथ मिलकर इसका समाधान निकालने पर काम कर रहे हैं.
इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात में वृद्धि की गति
इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात ने पिछले कुछ वर्षों में भारी वृद्धि दिखाई है, विशेष रूप से PLI योजना लागू होने के बाद. मोबाइल फोन उत्पादन में भी 2020-21 से 2023-24 तक दोगुनी वृद्धि हुई है. इस वित्तीय वर्ष में उत्पादन 5.10 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है, और स्मार्टफोन अब भारत के शीर्ष निर्यात उत्पाद बनने के लिए तैयार हैं.
-भारत एक्सप्रेस
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