Bharat Express DD Free Dish

भारत में गैर-खाद्य वस्तुओं पर खर्च बढ़ा, शहरी-ग्रामीण खर्च का अंतर घटा

गैर-खाद्य वस्तुओं पर बढ़ते खर्च और शहरी-ग्रामीण खर्च के अंतर को घटाना इस बात का संकेत है कि भारत के लोग अब अपनी आवश्यकताओं के साथ-साथ अन्य जरूरतों और आराम की चीजों पर भी ध्यान दे रहे हैं. इससे भारतीय अर्थव्यवस्था में स्थिरता और विकास की संभावना और बढ़ेगी.

India's Household spending

2023/24 के लिए घरेलू उपभोग व्यय सर्वेक्षण (Household Consumption Expenditure Survey) के आंकड़े भारत के बदलते खर्च के पैटर्न को दिखाते हैं. यह सर्वेक्षण अगस्त 2023 से जुलाई 2024 के बीच किया गया और इसमें ग्रामीण और शहरी इलाकों के लोगों के खर्च का अध्ययन किया गया.

सर्वेक्षण में पाया गया कि ग्रामीण इलाकों में लोग अब गैर-खाद्य वस्तुओं, जैसे परिवहन, कपड़े और मनोरंजन पर ज्यादा खर्च कर रहे हैं. ग्रामीण क्षेत्रों में प्रति व्यक्ति गैर-खाद्य वस्तुओं पर खर्च 2023/24 में कुल खर्च का 53% हो गया, जो 2011/12 में 47% था. इसी तरह, शहरी क्षेत्रों में यह आंकड़ा 57% से बढ़कर 60% हो गया. जहां गैर-खाद्य वस्तुओं पर खर्च में इजाफा हुआ है, वहीं खाद्य पदार्थ जैसे गेहूं और चावल पर खर्च घटा है.

उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) पर असर

इस बदलाव का सीधा असर उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) पर पड़ेगा. CPI वह पैमाना है जिसका उपयोग भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) मौद्रिक नीति तय करने के लिए करता है. अब, खाद्य पदार्थों का वजन सीपीआई में कम हो सकता है, जिससे गैर-खाद्य वस्तुओं को ज्यादा महत्व मिलेगा.

इसके अलावा, सरकार 2012 के आधार वर्ष को बदलकर 2024 करने की योजना पर विचार कर रही है, ताकि इन नए आंकड़ों को मौद्रिक नीतियों में शामिल किया जा सके. इसका मतलब है कि भारत में खुदरा महंगाई (Retail Inflation) को मापने के तरीके में बदलाव किया जाएगा. अभी जो आंकड़े बनाए जाते हैं, उनमें 2012 को आधार वर्ष माना जाता है. लेकिन सरकार अब इसे 2024 को आधार वर्ष बनाने की योजना बना रही है. इसका मतलब है कि महंगाई की गणना में इस्तेमाल किए जाने वाले पुराने डेटा की जगह नए और ताज़ा डेटा का इस्तेमाल किया जाएगा, जिससे यह ज़्यादा सटीक और वर्तमान स्थिति के करीब होगा.

शहरी-ग्रामीण खर्च का अंतर हुआ कम

सर्वेक्षण में यह भी देखा गया कि शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के खर्च में जो बड़ा अंतर था, वह अब घट रहा है. 2011/12 में शहरी-ग्रामीण मासिक खर्च का अंतर 84% था, जो 2023/24 में घटकर 70% रह गया.

2023/24 में ग्रामीण इलाकों में प्रति व्यक्ति मासिक खर्च 9.55% बढ़कर 4,122 रुपये हो गया, जो पिछले साल 3,773 रुपये था. वहीं, शहरी इलाकों में यह खर्च 8.31% बढ़कर 6,996 रुपये हो गया, जो पहले 6,459 रुपये था. हालांकि, महंगाई के हिसाब से देखें तो ग्रामीण इलाकों का खर्च असली रूप में सिर्फ 3.5% बढ़ा. शहरी इलाकों में महंगाई (लगभग 5.5%) के कारण खर्च में ज्यादा बदलाव नहीं हुआ.

2011/12 की तुलना में, ग्रामीण इलाकों में खर्च में 45.4% की वृद्धि हुई है, जबकि शहरी इलाकों में यह 38.1% बढ़ा है. इससे पता चलता है कि ग्रामीण और शहरी इलाकों के उपभोग पैटर्न में धीरे-धीरे समानता आ रही है.

भारतीय अर्थव्यवस्था पर प्रभाव

भारत की कुल आर्थिक गतिविधियों में उपभोक्ता खर्च का योगदान लगभग 58% है. यह देश की अर्थव्यवस्था को बढ़ाने का एक प्रमुख स्रोत है. गैर-खाद्य वस्तुओं पर बढ़ते खर्च और शहरी-ग्रामीण खर्च के अंतर को घटाना इस बात का संकेत है कि भारत के लोग अब अपनी आवश्यकताओं के साथ-साथ अन्य जरूरतों और आराम की चीजों पर भी ध्यान दे रहे हैं. इससे भारतीय अर्थव्यवस्था में स्थिरता और विकास की संभावना और बढ़ेगी.

-भारत एक्सप्रेस



इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

Also Read