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बंदरगाह परियोजनाओं में ₹11,083 करोड़ का निवेश, शिपिंग मंत्री का लोकसभा में बयान

भारत में बंदरगाह आधुनिकीकरण के लिए ₹11,083 करोड़ की परियोजनाएं स्वीकृत. सरकार बंदरगाहों के विकास, हरित तकनीक अपनाने और समुद्री व्यापार को आसान बनाने पर जोर दे रही है.

(प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)

Prashant Rai Edited by Prashant Rai

बंदरगाह और शिपिंग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने लोकसभा में जानकारी दी कि वित्त वर्ष 2022 से अब तक बंदरगाह आधुनिकीकरण से जुड़ी ₹11,083 करोड़ की परियोजनाएं शुरू की गई हैं. यह सभी कार्य मैरीटाइम इंडिया विजन 2030 के तहत किए जा रहे हैं.

मंत्री ने बताया कि 2021-22 से 2023-24 तक देश के प्रमुख बंदरगाहों में कुल 75 बुनियादी ढांचा परियोजनाएं स्वीकृत की गई हैं. इनमें से ₹11,083 करोड़ की परियोजनाएं प्रमुख बंदरगाहों पर शुरू की गईं, जबकि पिछले तीन वर्षों में ₹5,741 करोड़ खर्च किए जा चुके हैं.

सोनोवाल ने कहा कि देश के सभी 12 प्रमुख बंदरगाह कार्बन उत्सर्जन कम करने के लिए विभिन्न हरित तकनीकों को अपना रहे हैं. उन्होंने बताया कि नवीकरणीय ऊर्जा के उपयोग में वृद्धि, शिप-टू-शोर पावर सप्लाई, बंदरगाह के उपकरणों और वाहनों का विद्युतीकरण, ऊर्जा-कुशल उपकरणों की स्थापना जैसी प्रमुख पहलें की जा रही हैं.

प्रमुख समुद्री विधेयक पारित

लोकसभा ने “कैरेज ऑफ गुड्स बाय सी बिल, 2024” पारित किया, जो पुराने औपनिवेशिक “कैरेज ऑफ गुड्स बाय सी एक्ट” की जगह लेगा. इस विधेयक का उद्देश्य कानूनी ढांचे को आधुनिक बनाना और समुद्री क्षेत्र में व्यापार को आसान बनाना है.

शिपिंग मंत्रालय ने कहा कि पुराना कानून सदी पुराने हेग नियमों (Hague Rules) पर आधारित था, जिसकी भाषा जटिल थी और यह आधुनिक व्यापार आवश्यकताओं से मेल नहीं खाता था. नया विधेयक स्पष्टता, दूरदृष्टि और प्रासंगिकता के साथ इन कमियों को दूर करेगा.

सोनोवाल ने कहा, “कैरेज ऑफ गुड्स बाय सी बिल का पारित होना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भारत को वैश्विक व्यापार के लिए मजबूत कानूनी ढांचा देने के विजन को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है. यह कानून निवेशकों का विश्वास बढ़ाएगा और भारत को ‘विकसित भारत’ की ओर ले जाएगा.”

भारतीय बंदरगाह विधेयक 2025 पेश

इसके साथ ही, सोनोवाल ने “भारतीय बंदरगाह विधेयक, 2025” भी लोकसभा में पेश किया. यह विधेयक बंदरगाह प्रबंधन से जुड़े सभी कानूनों को एकीकृत करने, बंदरगाहों के विकास को बढ़ावा देने और समुद्री व्यापार को आसान बनाने के लिए लाया गया है.

इस विधेयक के तहत, राज्य समुद्री बोर्डों (State Maritime Boards) को अधिक अधिकार दिए जाएंगे, ताकि प्रमुख बंदरगाहों के अलावा अन्य बंदरगाहों का बेहतर प्रबंधन किया जा सके. साथ ही, “मैरीटाइम स्टेट डेवलपमेंट काउंसिल” के गठन का भी प्रस्ताव है, जिससे देश में बंदरगाह विकास को संगठित रूप दिया जा सके.


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-भारत एक्सप्रेस



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