Sagar Adani Speech at The Economist Summit: 29 अप्रैल को राजधानी में ‘द इकोनॉमिस्ट’ का ‘रेसिलिएंट फ्यूचर्स समिट’ का अयोजन हुआ. इस शिखर सम्मेलन में सागर अडानी ने भारत के भविष्य, ऊर्जा की जरूरतों और आम आदमी की जिंदगी में बिजली के महत्व पर ऐसा विजन पेश किया, जो केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं था, बल्कि सीधे जमीन से जुड़ा था. सागर ने कहा कि अगर भारत को 2047 तक विकसित देश बनना है, तो हमें धीरे-धीरे नहीं बल्कि एक लंबी छलांग लगानी होगी.
सागर अडानी का संबोधन एक ऐसे समय में आया है जब पूरी दुनिया सप्लाई चेन और ऊर्जा संकट से जूझ रही है. उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि आज ‘लचीलापन’ यानी रेजिलिएंस कोई किताबों में पढ़ी जाने वाली चीज नहीं रह गई है, बल्कि हमारे हर दिन को प्रभावित कर रही है.
ऊर्जा: पानी से लेकर डिजिटल लीडरशिप तक की चाबी
सागर अडानी ने बड़े ही सरल तरीके से समझाया कि क्यों ऊर्जा यानी एनर्जी ही भारत की सबसे बड़ी चुनौती और सबसे बड़ा समाधान है. उन्होंने कहा कि अगर हमें पानी की सुरक्षा चाहिए, तो फिल्टरेशन और डिस्ट्रीब्यूशन के लिए बिजली चाहिए. अगर किसानों को खाद्य सुरक्षा देनी है, तो सिंचाई और खाद बनाने के लिए बिजली चाहिए. यहाँ तक कि आज की डिजिटल दुनिया में, डेटा सेंटर और AI चलाने के लिए भी पावर ही सबसे बड़ी जरूरत है.
उन्होंने एक आंकड़ा देते हुए बताया कि भारत की प्रति व्यक्ति ऊर्जा खपत अभी भी दुनिया के औसत का सिर्फ एक-तिहाई है. ऐसे में अगर हम विकसित देश बनने का सपना देख रहे हैं, तो हमें अगले दो दशकों में लगभग 2,000 गीगावाट नई क्षमता जोड़नी होगी.
चीन का उदाहरण और भारत का रास्ता
चीन की तरक्की का जिक्र करते हुए सागर अडानी ने बताया कि कैसे उसने अपनी घरेलू ऊर्जा क्षमता में निवेश करके खुद को एक ग्लोबल इंडस्ट्रियल ताकत बना लिया. उन्होंने कहा कि भारत के लिए भी रास्ता साफ है, हमें अपनी ऊर्जा की आत्मनिर्भरता बढ़ानी होगी और हर चीज को ‘इलेक्ट्रिफाई’ यानी बिजली पर आधारित करना होगा.
उनका तर्क दिया कि इलेक्ट्रिफिकेशन न केवल अधिक कुशल है, बल्कि यह आयातित तेल और गैस पर हमारी निर्भरता को खत्म कर भारत को लंबे समय तक स्थिरता देगा.
सिर्फ रिन्यूएबल्स से नहीं चलेगा काम
अक्सर लोग रिन्यूएबल एनर्जी यानी सौर और पवन ऊर्जा को ही एकमात्र समाधान मानते हैं, लेकिन सागर अडानी ने यहाँ बड़ी व्यावहारिक बात कही. उन्होंने कहा कि जमीन की कमी और मौसम पर निर्भरता जैसी व्यावहारिक अड़चनें हैं. इसलिए, भारत को एक ‘पोर्टफोलियो अप्रोच’ अपनानी होगी. यानी हमें रिन्यूएबल्स के साथ-साथ हाइड्रो, कुशल थर्मल पावर और न्यूक्लियर एनर्जी का भी पूरा फायदा उठाना होगा. बिना पक्की ‘बेसलोड’ पावर के विकास का गणित नहीं बैठ सकता.
$100 बिलियन का वादा
अपनी कंपनी की भूमिका पर बात करते हुए सागर अडानी ने बताया कि चेयरमैन गौतम अडानी ने एनर्जी ट्रांजिशन के लिए 100 बिलियन डॉलर से ज्यादा के निवेश का वादा किया है. ये दुनिया के सबसे बड़े निजी निवेशों में से एक है. उन्होंने स्पष्ट किया कि अडानी ग्रुप सिर्फ इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं बना रहा, बल्कि वह भारत की ‘एनर्जी बैकबोन’ तैयार कर रहा है. चाहे वो दुनिया का सबसे बड़ा रिन्यूएबल पोर्टफोलियो हो, ट्रांसमिशन नेटवर्क हो या ग्रीन हाइड्रोजन सबका लक्ष्य एक ही है, भारत को ऊर्जावान बनाना.
अंत में उन्होंने एक बहुत ही पते की बात कही, ‘असली सवाल यह नहीं है कि हमें ऊर्जा की जरूरत है या नहीं, वह तो सबको पता है. असली सवाल यह है कि हम इसे कितनी तेजी से बना सकते हैं.’ सागर अडानी के अनुसार, भारत की सफलता सिर्फ 140 करोड़ लोगों के लिए नहीं, बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को स्थिरता देने के लिए जरूरी है.
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-भारत एक्सप्रेस
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