उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले में एक निजी अस्पताल की लापरवाही ने एक परिवार की खुशियां छीन ली. मामला जिले के महेवागंज कस्बे का है जहां गोलदार नामक एक निजी अस्पताल ने पैसे नहीं मिलने पर गर्भवति महिला का इलाज करने से इनकार कर दिया और उसे अस्पताल से बाहर कर दिया. समय पर इलाज नहीं मिलने की वजह से महिला के गर्भ में पल रहे नवजात बच्चे की मौत हो गई.
जानकारी के मुताबिक मामला लखिमपुर खीरी जिले के भीरा थाना क्षेत्र के भानपुर गांव का है. जहां के निवासी विपिन गुप्ता की पत्नी गर्भवती थी. अपनी गर्भवती पत्नी को डिलीवरी के लिए विपिन गोलदार अस्पताल पहुंचा था.
पैसे नहीं देने पर महिला को स्ट्रेचर पर बाहर छोड़ा
शुरुआत में अस्पताल प्रबंधन ने 10 हजार रुपये नॉर्मल डिलीवरी के लिए और ऑपरेशन के लिए 12 से 25 हजार रुपये की मांग की. परिवार के लोगों ने 8 हजार रुपये जमा कर दिये. लेकिन जैसे ही रात हुई अस्पताल प्रशासन ने उसकी फीस 25 हजार रुपये तक पहुंचा दी. जब पैसे नहीं दे पाये तो महिला को स्ट्रेचर पर बाहर छोड़ दिया.
नवजात की मौत के प्रकरण में जिला प्रशासन ने गोलदार अस्पताल को किया सील। भर्ती मरीजों को जिला महिला अस्पताल शिफ्ट कराया जा रहा है। DM के निर्देश पर ADM एके रस्तोगी सृजन अस्पताल पहुंचे, प्रसूता का हालचाल लिया। बेहतर इलाज के निर्देश दिए। जिला प्रशासन पीड़ित परिवार के साथ।@CMOfficeUP pic.twitter.com/D1HUnq0Tgx
— DM LAKHIMPUR KHERI (@DmKheri) August 22, 2025
मृत पाया गया नवजात बच्चा
जिसके बाद परिजन महिला को लेकर दूसरे अस्पताल पहुंचे जहां ऑपरेशन से बच्चा हुआ. लेकिन जब अस्पताल ने बच्चे की जांच की तो बच्चा मृत पाया गया. मृत नवजात को लेकर विपिन गुप्ता और उनके परिजन डीएम के पास पहुंचकर न्याय की गुहार लगाई. परिजनों की आर्थिक हालत का अंदाजा इस बात से लगा सकते हैं कि उनके पास अपने जिगर के टुकड़े को रखने के लिए बस झोला था. वो झोले में ही अपने बेटे के शव को लेकर अधिकारियों के चक्कर काटते रहे.
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न्याय की मांग को लकेर डीएम दफ्तर पहुंचा विपिन
न्याय की मांग को लेकर डीएम दफ्तर पहुंचे विपिन ने मीडिया को बताया कि वो अपने बच्चों को लेकर आए हैं. मेरी पत्नी अपना बच्चा मांग रही है. हम उससे झूठ बोल रहे हैं कि बच्चे को कांच में रखा गया है. हम कैसे बताएं कि उसके जिगर के टुकड़े की मौत हो चुकी है. हमें हमारा बच्चा जिंदा दिला दें, हम कोई कार्रवाई नहीं करेंगे. नहीं तो जो भी हमारे बस में होगा हम वो करेंगे.
वहीं इस मामले को लेकर जिले के डीएम और सीडीओ अभिषेक कुमार ने संबंधित अधिकारियों को मौके पर मामले की जांच के लिए भेजा. जांच के बाद अस्पताल को सील कर दिया गया है. अधिकारियों का कहना है कि यदि लापरवाही साबित हुई तो संबंधित लोगों पर कठोर कार्रवाई की जाएगी.
– भारत एक्सप्रेस
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