सांकेतिक फोटो-सोशल मीडिया
दिल्ली की भाजपा सरकार निजी स्कूलों की मनमानी पर शिकंजा कसने जा रही है. स्कूलों की ओर से की जा रही बेतहाशा फीस वृद्धि को लेकर सरकार सख्त हो गई है. सरकार ये कदम बच्चों के माता-पिता और अभिभावकों की ओर से लगातार की जा रही शिकायतों को ध्यान में रखते उठाया है.
सरकार ने जारी किया बयान
सरकार ने हाल ही में एक अहम बयान जारी किया है जिसमें बताया गया है कि कई निजी, गैर-सहायता प्राप्त स्कूल पिछले कई वर्षों से मनमाने तरीके से फीस बढ़ा रहे हैं. इससे मध्यम और निम्न आय वर्ग के माता-पिता को भारी आर्थिक बोझ उठाना पड़ रहा है. शिक्षा विभाग ने इस गंभीर समस्या पर ध्यान देते हुए सख्त रुख अपनाया है. बयान में कहा गया है कि कोविड के बाद फीस वृद्धि की रफ्तार और तेज हो गई है. कुछ स्कूलों ने हर साल 25% से 30% तक फीस बढ़ाई है. यह तब हुआ जब दिल्ली में अरविंद केजरीवाल सरकार थी.
फीस वृद्धि को लेकर शिकायतें
पिछले 5 से 8 सालों में ऐसी कई शिकायतें आई हैं जिनमें माता-पिता ने बताया कि फीस न भरने पर बच्चों को परीक्षा में बैठने के लिए प्रवेश पत्र नहीं दिया गया. सरकार ने साफ कर दिया है कि अब किसी भी निजी स्कूल को मनमाने ढंग से फीस नहीं बढ़ाने दी जाएगी. ऐसे स्कूलों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी.
शिक्षा विभाग ने शुरू की जांच
शिक्षा विभाग ने इस मुद्दे की गहराई से जांच शुरू कर दी है. जिला मजिस्ट्रेटों के नेतृत्व में टीमें अचानक स्कूलों का निरीक्षण कर रही हैं. हाल ही में डीपीएस द्वारका की जांच की गई थी. सरकार ने यह भी बताया कि जिन स्कूलों ने नियमों का पालन नहीं किया है, उनके खिलाफ कड़े कदम उठाए जाएंगे. इसमें स्कूल की मान्यता रद्द करना या प्रबंधन को सरकारी नियंत्रण में लेना शामिल है.
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इसके साथ ही विशेष ऑडिट टीमें ऐसे स्कूलों के खातों की जांच करेंगी ताकि पता चल सके कि बढ़ी हुई फीस का उपयोग कहां हो रहा है. आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) और वंचित छात्रों के लिए सरकार ने एक नोडल अधिकारी नियुक्त किया है. यह अधिकारी उन छात्रों को किताबें और यूनिफॉर्म मिलने में आ रही समस्याओं को जल्दी सुलझाएगा.
स्कूलों को जारी किया गया निर्देश
स्कूलों को यह निर्देश भी दिया गया है कि वे अभिभावकों को खास दुकानों से किताबें और यूनिफॉर्म खरीदने के लिए मजबूर न करें. शिक्षा विभाग ने यह भी बताया कि 2025-26 के बजट में शिक्षा के लिए करीब 2,000 करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि आवंटित की गई है. इसका उद्देश्य सभी बच्चों को समान और बेहतर शिक्षा देना है.
-भारत एक्सप्रेस
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