"सोनम नहीं, तेजस्वी बेवफा हैं...", मुस्लिम मुख्यमंत्री के मुद्दे पर AIMIM का RJD पर हमला, AIMIM नेता ने राजद पर विश्वासघात करने का लगाया आरोप
AIMIM attacks RJD Over Muslims: बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां अपने चरम पर हैं. एनडीए के नेतृत्व में सत्ता पक्ष जहां अपनी कुर्सी बचाने की लड़ाई लड़ रहा है. वहीं महागठबंधन की कोशिश है कि इस बार एनडीए के हाथों से बिहार की कुर्सी खींच ली जाए. इसी जुगत में राजनीतिक घमासान मचा हुआ है. बिहार चुनाव में एनडीए और महागठबंधन के इस नूरा कुश्ती में तीसरे प्लेयर ने ऐसी एंट्री मारी है कि महागठबंधन की नींद उड़ गई है.
दरअसल एनडीए के गठबंधन दलों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) ने ट्वीट कर 2005 का मामला उठा दिया है. अपने ट्वीट में उन्होंने कहा कि राजद कभी भी मुस्लिमों को मुख्यमंत्री की कुर्सी पर नहीं बैठाना चाहती. वह सिर्फ उन्हें बंधुआ वोट बैंक बनाकर रखना चाहती है.
पुलिस के डंडे मुसलमान खाए, आंदोलन मुसलमान करेगा,विपक्ष की भूमिका में मुसलमान खड़ा रहता है, UAPA में जेल में बंद मुसलमान नौजवान मगर उपमुख्यमंत्री मुकेश साहनी बनेंगे..😡 pic.twitter.com/hkZB27OrdH
— Dr. Shoaib Jamai (@shoaibJamei) October 24, 2025
चिराग पासवान के ट्वीट के बाद मचा कोहराम
चिराग पासवान के इस ट्वीट के बाद बिहार में AIMIM राजद पर हमलावर है. AIMIM दिल्ली के अध्यक्ष शोएब जमाली ने राजद पर मुसलमानों के साथ धोखा करने का आरोप लगाया है. उन्होंने कहा कि पुलिस के डंडे मुसलमान खाए, आंदोलन मुसलमान करेगा, विपक्ष की भूमिका में मुसलमान खड़ा रहता है. UAPA में जेल में बंद मुसलमानों के नौजवान होते हैं. मगर उपमुख्यमंत्री मुकेश साहनी बनेंगे.
2005 में मेरे नेता मेरे पिता स्व. रामविलास पासवान जी ने मुस्लिम मुख्यमंत्री बनाने के लिए अपनी पार्टी तक कुर्बान कर दी थी – तब भी आपने उनका साथ नहीं दिया।
राजद 2005 में भी मुस्लिम मुख्यमंत्री के लिए तैयार नहीं था, आज 2025 में भी न मुस्लिम मुख्यमंत्री देने को तैयार है, न…
— युवा बिहारी चिराग पासवान (@iChiragPaswan) October 25, 2025
मुसलमानों के साथ हुआ छल
शोएब जमाली ने चुनावी मंच पर खड़ा होकर महागठबंधन के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार तेजस्वी यादव पर मुसलमानों की वफादारी के साथ विश्वासघात करने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि आपने 4 प्रतिशत वोट बैंक वाले मुकेश साहनी को उपमुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित कर दिया. मौका पड़ने पर वो भाजपा में चले जाएंगे. वो पहले भी गए थे.
सोनम नहीं तेजस्वी बेवफा हैं- जमाली
AIMIM नेता जमाली ने तेजस्वी यादव पर बेवफाई का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि आपके मुश्किल समय में मुसलमान आपके साथ खड़ा रहा. आपके 18 प्रतिशत वोटबैंक को खिसकने नहीं दिया. लेकिन जब हिस्सेदारी देने की बारी आई तो आपने उन्हें दे दी. सच तो ये है कि सोनम बेवफा नहीं है तेजस्वी यादव बेवफा हो गए हैं.
लालू यादव पर विश्वासघात करने का लगाया आरोप
शोएब जमाली ने लालू प्रसाद यादव पर भी मुसलमानों के साथ विश्वासघात करने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि 2005 में भी जब मुसलमान को मुख्यमंत्री बनाने की बात हुई तब लालू प्रसाद यादव ने अडंगा डाल दिया और बिहार में राष्ट्रपति शासन लागू हो गया.
नीतीश सरकार लालू की गलती का नतीजा
उन्होंने आगे कहा कि 2005 में लालू प्रसाद ने गलती की थी. जब रामविलास पासवान के पास लालू यादव समर्थन मांगने गए थे, तो रामविलास पासवान जी ने कहा कि आप बिहार में मुस्लिम मुख्यमंत्री बना दीजिये. तब भी लालू प्रसाद यादव ने बिहार में मुस्लिम मुख्यमंत्री बनाना उचित नहीं समझा. जिसके बाद बिहार में राष्ट्रपति शासन लागू हुआ. दोबारा विधानसभा चुनाव हुए तो बीजेपी और नीतीश ने मिलकर सरकार बनाई. लालू प्रसाद की उसी गलती का परिणाम है कि बिहार में 2005 के बाद उस परिवार को गद्दी नसीब नहीं हुई.
क्या हुआ था 2005 में?
बिहार की राजनीति में 2005 का साल बेहद ही महत्वपूर्ण और निर्णायक मोड़ था. इसने जहां राजद के कैद से बिहार को आजाद किया. तो वहीं लोजपा के लिए सबसे बड़ा डिजास्टर साबित हुआ. सर्वेश्रेष्ठ प्रदर्शन के बावजूद रामविलास पासवान के नेतृत्व वाली यह पार्टी आंतरिक टूट और पतन की गवाह बनी. दरअसल तत्कालीन लोजपा मुखिया राम विलास पासवान उस समय दलित मुस्लिम समीकरण को साधने की कोशिश कर रहे थे. राम विलास पासवान NDA और राजद से अलग तीसरे मोर्चे के रूप में मैदान में उतरे. उन्होंने कांग्रेस के साथ गठबंधन किया था.
जब विधानसभा चुनाव के नतीजे आए तो पूरा देश चौंक गया. रामविलास पासवान के नेतृत्व वाली पार्टी लोजपा ने अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए 29 सीटें जीती थी. वहीं आरजेडी ने 75 और एनडीए ने 92 सीटों पर जीत दर्ज की थी. सरकार बनाने के लिए बहुमत का आंकड़ा 122 था, लेकिन चुनाव में किसी भी पार्टी या गठबंधन को बहुमत नहीं मिला. पासवान ने इस दौरान एक ऐसा फैसला लिया, जो उनकी पार्टी की बर्बादी का कारण बना. उन्होंने किसी भी पार्टी या गठबंधन को समर्थन देने से इनकार कर दिया. जिसकी वजह से बिहार में राष्ट्रपति शासन लागू हो गया.
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रामविलास पासवान की टूट गई पार्टी
रामविलास पासवान के इस फैसले ने नीतीश कुमार को नाराज कर दिया. जिसके बाद नीतीश कुमार और बीजेपी ने मिलकर एक प्लान बनाया. उन्होंने लोजपा में बगावत करा दी. लोजपा के 12 विधायकों ने बगावत कर जदयू और भाजपा को समर्थन कर दिया. इन बागियों में रामविलास पासवान के भाई पशुपति पारस भी थे. इस बगावत ने बिहार में लोजपा की राजनीति को काफी हद तक अप्रासंगिक कर दिया.
अक्टूबर-नवंबर में जब बिहार में दोबारा विधानसभा चुनाव हुआ तो लोजपा का प्रदर्शन बेहद खराब रहा. लोजपा इस चुनाव में सिर्फ 10 सीटों पर सिमट गई. बागी विधायकों की मदद से NDA ने सरकार बना ली और नीतीश कुमार मुख्यमंत्री बने.
-भारत एक्सप्रेस
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