Bihar Election 2025: विधानसभा चुनाव अब अपने निर्णायक मोड़ पर है. मंगलवार को होने वाले दूसरे और अंतिम चरण की वोटिंग में 20 जिलों की 122 सीटों पर मतदान अपने प्रतिनिधि चुनेंगे. इस चरण में कुल 1302 उम्मीदवार मैदान में हैं और 3 करोड़ 70 लाख से ज़्यादा मतदाता उनकी किस्मत का फैसला करेंगे. यही चरण तय करेगा कि बिहार की सत्ता की चाबी किसके हाथ में जाएगी.
दूसरे चरण का मतदान
इस फाइनल राउंड में मिथिलांचल, सीमांचल, चंपारण बेल्ट और शाहाबादमगध क्षेत्र की सीटें शामिल हैं. कुल 122 सीटों में से 101 सामान्य, 19 अनुसूचित जाति और 2 अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित हैं. 2020 के नतीजों को देखें तो इस बार सबसे बड़ी चुनौती एनडीए के सामने है. महागठबंधन की वापसी की उम्मीदें भी इन्हीं सीटों पर टिकी हैं.
एनडीए बनाम महागठबंधन
एनडीए की तरफ से बीजेपी 53 सीटों पर चुनाव लड़ रही है, जेडीयू 44 सीटों पर किस्मत आजमा रही है. जीतनराम मांझी की पार्टी हम (HAM) अपने कोटे की सभी 6 सीटों पर मैदान में है, उपेंद्र कुशवाहा की आरएलएम 4 सीटों पर और एलजेपी (रामविलास) 15 सीटों पर उतरी है. दूसरी तरफ महागठबंधन में आरजेडी सबसे बड़ी पार्टी के तौर पर 71 सीटों पर चुनाव लड़ रही है, कांग्रेस 37 सीटों पर, वीआईपी 7 पर, सीपीआई (माले) 7 पर, सीपीआई 4 पर और सीपीएम एक सीट पर मैदान में है. असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम 21 सीटों पर उम्मीदवार उतार चुकी है, जबकि प्रशांत किशोर की जनसुराज पार्टी 120 सीटों पर चुनाव लड़ रही है.
2020 का बैकग्राउंड
पिछले चुनाव में इन 122 सीटों पर महागठबंधन ने 66 सीटें जीती थीं, जबकि एनडीए को 49 सीटें मिली थीं. बीजेपी ने 42 सीटें, जेडीयू ने 20 सीटें और हम ने 4 सीटें जीती थीं. महागठबंधन में आरजेडी को 33, कांग्रेस को 11 और सीपीआई (माले) को 5 सीटें मिली थीं. एआईएमआईएम (AIMIM) ने सीमांचल में 5 सीटें जीती थीं, बसपा और एक निर्दलीय उम्मीदवार ने भी जीत दर्ज की थी. बाद में बसपा और निर्दलीय विधायक जेडीयू में शामिल हो गए, जिससे एनडीए का आंकड़ा 68 तक पहुंच गया.
सीमांचल की जंग
सीमांचल की 24 सीटों पर मुकाबला बेहद दिलचस्प है. कटिहार, किशनगंज, अररिया और पूर्णिया जैसे मुस्लिम बहुल जिलों में महागठबंधन का दबदबा रहा है. 2020 में यहां महागठबंधन को 12, एनडीए को 6 और एआईएमआईएम (AIMIM) को 5 सीटें मिली थीं. इस बार ओवैसी की पार्टी और आक्रामक रणनीति के साथ उतरी है, जिससे मुकाबला और पेचीदा हो गया है.
शाहाबादमगध का समीकरण
इस क्षेत्र की 46 सीटों पर यादव, कुर्मी, राजपूत, दलित और भूमिहार वोटरों का समीकरण बड़ा फैक्टर है. 2020 में यहां एनडीए और महागठबंधन ने बराबरी पर 23-23 सीटें जीती थीं. गया, औरंगाबाद, जहानाबाद, अरवल, बक्सर और सासाराम जैसे जिलों में इस बार भी कांटे की टक्कर है.
मिथिलांचल और चंपारण बेल्ट
चंपारण बेल्ट की 21 सीटें और मिथिलांचल के दो जिले मधुबनी और सुपौल की 15 सीटें मिलाकर कुल 36 सीटों पर भी सियासी परीक्षा है. 2020 में एनडीए ने यहां शानदार प्रदर्शन किया था. इस बार महागठबंधन रोजगार और स्थानीय विकास जैसे मुद्दों को हवा देकर मुकाबले को धार देने की कोशिश कर रहा है. प्रशांत किशोर की जनसुराज पार्टी भी इन इलाकों में सक्रिय है. माना जा रहा है कि उनका वोट शेयर एनडीए और महागठबंधन दोनों के समीकरण बिगाड़ सकता है.
किसका क्या दांव पर?
एनडीए के सामने अपनी सीटें बचाने और सत्ता तक पहुंचने की चुनौती है. महागठबंधन को अपनी वापसी की उम्मीदें इन्हीं सीटों पर टिकी हैं. कांग्रेस के लिए यह करो या मरो की स्थिति है. ओवैसी की एआईएमआईएम सीमांचल में बड़ा फैक्टर है. प्रशांत किशोर की जनसुराज नए विकल्प के तौर पर मैदान में है. मांझी और कुशवाहा की साख भी इसी चरण में दांव पर है.
दिग्गज नेताओं की अग्निपरीक्षा
इस चरण में कई बड़े नेताओं की साख दांव पर है. पूर्व उपमुख्यमंत्री रेणु देवी बेतिया से और तारकिशोर प्रसाद कटिहार से बीजेपी के टिकट पर मैदान में हैं. नीतीश सरकार के मंत्री सुमित कुमार सिंह, जमा खान, जयंत राज, नीतीश मिश्रा, नारायण प्रसाद, शीला मंडल और लेशी सिंह भी चुनाव लड़ रहे हैं. बाहुबली आनंद मोहन के बेटे चेतन आनंद जेडीयू से मैदान में हैं. आरजेडी से बीमा भारती और संतोष कुशवाहा जैसे दिग्गज भी चुनावी अखाड़े में हैं. एआईएमआईएम के प्रदेश अध्यक्ष अख़्तरुल ईमान भी मैदान में हैं.
नतीजों का असर
यह चरण सिर्फ सीटों का नहीं बल्कि बिहार की सत्ता का फैसला करेगा. अगर एनडीए ने 2020 जैसा प्रदर्शन दोहराया तो सत्ता की राह आसान होगी. अगर महागठबंधन ने वापसी की तो तेजस्वी यादव का कद और बढ़ेगा. ओवैसी और प्रशांत किशोर का प्रदर्शन तय करेगा कि भविष्य की राजनीति में उनकी कितनी हिस्सेदारी होगी.
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बिहार विधानसभा चुनाव का यह दूसरा और अंतिम चरण असल में सत्ता की कुंजी है. सीमांचल से लेकर मिथिलांचल और मगध से चंपारण तक हर सीट पर सियासी समीकरण अलग-अलग हैं. एनडीए और महागठबंधन दोनों के लिए यह अग्निपरीक्षा है. कांग्रेस, मांझी, कुशवाहा, ओवैसी और प्रशांत किशोर जैसे नेताओं के लिए भी यह चुनाव भविष्य की राजनीति का रास्ता तय करेगा.
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